9 साल से बंद पड़ी सहकारी चीनी मिल फिर से होगी शुरू? इथेनॉल प्लांट शुरू कराने पर जोर
ओडिशा के बरगढ़ में बंद शुगर मिल को फिर से शुरू करने की मांग तेज हो गई है. कर्मचारियों ने आधुनिक मिल और एथेनॉल प्लांट की मांग रखी है. मिल बंद होने से गन्ना खेती प्रभावित हुई, कर्मचारी बेरोजगार हुए और बकाया भुगतान भी अटका है, जिससे आर्थिक संकट गहराया है.
Sugarcane Farmers: ओडिशा के बरगढ़ जिले में बंद पड़ी कोऑपरेटिव शुगर मिल को फिर से शुरू करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. कर्मचारियों के यूनियन ने सहकारिता और हथकरघा मंत्री प्रदीप बल सामंत को ज्ञापन सौंपकर एक आधुनिक शुगर मिल स्थापित करने की मांग की है, जिसमें ड्यूल-फीड एथेनॉल प्लांट भी शामिल हो. 29 अप्रैल को यूनियन के सचिव सुभ्रत साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से मुलाकात की. ज्ञापन में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ओडिशा दौरे के दौरान राज्य की बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की बात कही थी.
यूनियन ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि कभी जिले की प्रमुख नकदी फसल रही गन्ना, मिल बंद होने के बाद लगभग खत्म हो गई है. तोरा में 104 एकड़ जमीन पर बनी यह फैक्ट्री अप्रैल 2017 से खराब प्रबंधन और रखरखाव के लिए धन की कमी के कारण बंद पड़ी है. कर्मचारियों ने यह भी कहा कि इंडियन पोटाश लिमिटेड ने 16 नवंबर 2022 को इस मिल को फिर से शुरू करने और संचालन के लिए अपनी रुचि (EoI) पहले ही जमा कर दी थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने इस प्रस्ताव को राज्य के सहकारिता विभाग को भेज दिया था.
इस मिल को अधिकारियों ने लिक्विडेशन में डाल दिया
कर्मचारियों की बार-बार अपील के बावजूद 16 अक्टूबर 2023 को इस मिल को अधिकारियों ने लिक्विडेशन में डाल दिया, जिसके बाद सभी कर्मचारियों की नौकरी खत्म हो गई. कई कर्मचारी अब तक अपनी पूरी बकाया राशि नहीं पा सके हैं और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं. यूनियन ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने वैकल्पिक उद्योग और रोजगार के वादे पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के लिए सहमति दे दी थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मिल को तोड़कर उसकी संपत्तियां पश्चिम बंगाल की एक कंपनी को बेच दी गई हैं. जमीन को IDCO के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी, लेकिन अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है. साथ ही, जमीन के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा भी बताया जा रहा है. मंत्री प्रदीप बल सामंत ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे.
150 कर्मचारी अब भी पुनर्वास की उम्मीद लगाए हुए हैं
यूनियन के सचिव सुभ्रत साहू ने कहा कि बरगढ़ शुगर मिल पिछले 50 सालों से जिले की पहचान रही है और कई पीढ़ियों ने इसे चलाने में अपनी जिंदगी लगा दी. मिल बंद होने से कई कर्मचारी मजबूरी में रिटायर हो गए, लेकिन करीब 150 कर्मचारी अब भी पुनर्वास की उम्मीद लगाए हुए हैं. उन्होंने कहा कि मंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें उम्मीद है कि आधुनिक तकनीक के साथ मिल को फिर से शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. यूनियन ने सुझाव दिया है कि तोरा की खाली जमीन पर एक आधुनिक शुगर मिल बनाई जाए, जिसमें बाय-प्रोडक्ट आधारित उत्पादन के साथ ड्यूल-फीड एथेनॉल प्लांट भी शामिल हो.