दिल्ली की संजय झील में सैकड़ों मछलियों की मौत, यहां पढ़ें पूरा मामला

दिल्ली की संजय झील में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. झील का पानी गंदा और कम होता जा रहा है, जबकि भीषण गर्मी ने हालात और खराब कर दिए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो पर्यावरण को बड़ा नुकसान हो सकता है.

नोएडा | Updated On: 22 May, 2026 | 02:00 PM

Heatwave Crisis: दिल्ली में पड़ रही भीषण गर्मी अब इंसानों के साथ-साथ जानवरों और जल जीवों पर भी भारी पड़ने लगी है. राजधानी के पूर्वी इलाके त्रिलोकपुरी स्थित संजय झील (Sanjay Lake) में गुरुवार को बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई, जहां सैकड़ों मछलियां मरी हुई हालत में पानी में तैरती दिखीं. झील का पानी काला और बदबूदार नजर आया, जबकि कई हिस्सों में पानी पूरी तरह सूख चुका था. सूखी जमीन पर दरारें साफ दिखाई दे रही थीं और किनारों पर काली कीचड़ जमा थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लगातार पड़ रही हीटवेव, पानी की कमी और ऑक्सीजन घटने से ये संकट और गहरा गया है. अधिकारियों का कहना है कि कोंडली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से आने वाली पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण झील तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं.

झील में दिखा डरावना नजारा

पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में स्थित संजय झील में गुरुवार सुबह लोगों ने बड़ी संख्या में मछलियों को मरा हुआ देखा. कई मछलियां पानी की सतह  पर पेट ऊपर किए तैर रही थीं. झील के किनारे काली कीचड़ जमा थी और पानी का रंग हरा-काला दिखाई दे रहा था. झील में छोटे मच्छर खाने वाले गंबूसिया फिश के साथ बड़ी मछलियां भी मरी मिलीं. कुछ हिस्सों में पानी इतना कम हो गया था कि झील की जमीन सूखी और फटी हुई नजर आई. वहां घूमने आने वाले लोग भी इस हाल को देखकर हैरान रह गए.

पानी की सप्लाई बंद होने से बढ़ी परेशानी

अधिकारियों के मुताबिक संजय झील में पानी की सप्लाई दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) की तरफ से की जाती है. यह पानी कोंडली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पाइपलाइन के जरिए आता है. लेकिन कुछ समय पहले पाइपलाइन में लीकेज हो गया था. इसके बाद से झील तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि पाइपलाइन की मरम्मत का काम चल रहा है और जल्द इसे ठीक करने की कोशिश की जा रही है. पानी कम होने से झील का स्तर लगातार नीचे जा रहा है. गर्मी की वजह से पानी तेजी से सूख रहा है और इससे मछलियों के लिए हालात  और खराब हो गए हैं.

गर्मी और गंदगी से घुट रही मछलियों की सांस

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जब पानी कम हो जाता है और तापमान बहुत ज्यादा  बढ़ जाता है, तब पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है. मछलियों को जिंदा रहने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन चाहिए होती है. इसके अलावा गंदगी, सीवर का पानी और सड़ता कचरा भी पानी की गुणवत्ता खराब कर देता है. जब गंदा पदार्थ पानी में सड़ता है तो वह भी ऑक्सीजन को खत्म करता है. ऐसे में मछलियां सांस नहीं ले पातीं और मरने लगती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि हीटवेव के दौरान ऐसे मामले ज्यादा बढ़ जाते हैं क्योंकि तेज धूप पानी को जल्दी गर्म कर देती है.

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

संजय झील को लेकर पहले भी कई बार चिंता जताई जा चुकी है. साल 2022 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि झील का पानी  काफी प्रदूषित है. रिपोर्ट में बताया गया था कि पानी में प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने से जलीय जीवों को खतरा हो सकता है. रिपोर्ट में आसपास के नालों और गंदे पानी को भी झील की खराब हालत का कारण बताया गया था. ये झील प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए भी खास मानी जाती है. हालांकि अप्रैल में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की जांच में कोंडली STP का पानी तय मानकों के अनुसार पाया गया था. इसके बावजूद झील में गंदगी और बदबू साफ दिखाई दे रही है.

लोगों में बढ़ी चिंता

संजय झील की ये हालत देखकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है. लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पानी की सप्लाई और सफाई व्यवस्था  ठीक नहीं हुई तो झील का पर्यावरण पूरी तरह खराब हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि झीलों को बचाने के लिए नियमित सफाई, साफ पानी की सप्लाई और प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण बेहद जरूरी है. वरना आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं.

Published: 22 May, 2026 | 11:42 AM

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