कृषि लोन पर पड़ सकता है अल नीनो का असर, पर बैंकों पर बड़े संकट का खतरा नहीं.. जानें क्या कहती है रिपोर्ट

यस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित अल नीनो का असर कृषि ऋण और माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र पर पड़ सकता है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर पर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है. FY27 में बैंकों की कर्ज लागत स्थिर रहने की उम्मीद है, जबकि कॉरपोरेट, एमएसएमई और रिटेल लोन की मजबूत मांग से क्रेडिट ग्रोथ को समर्थन मिलेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 30 Jun, 2026 | 01:13 PM

संभावित अल नीनो (El Nino) को लेकर कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ रही है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर के लिए राहत की खबर है. यस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो का असर कृषि लोन पर पड़ सकता है. हालांकि इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा खतरा नहीं दिख रहा है. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में बैंकों की लोन लागत स्थिर बनी रह सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 में खराब लोन के कारण होने वाले खर्च में FY26 की तुलना में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं होने की संभावना है. साथ ही, FY28 में लागू होने वाले एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) नियमों का भी बैंकिंग क्षेत्र पर कोई बड़ा एकमुश्त प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है. हालांकि, रिपोर्ट में कृषि लोन को एक ऐसा क्षेत्र बताया गया है जिस पर नजर रखने की जरूरत होगी. यस सिक्योरिटीज ने कहा कि यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो कुछ कृषि लोन प्रभावित हो सकते हैं. लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि इसका असर इतना गंभीर नहीं होता कि बैंकिंग व्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़े. फिर भी, रिपोर्ट में संभावित सुपर अल नीनो की स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही गई है.

मॉनसून की गति कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की स्थिति और मॉनसून की प्रगति कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन  को प्रभावित कर सकती है, लेकिन फिलहाल बैंकिंग क्षेत्र के लिए कोई बड़ी चिंता की स्थिति नहीं दिख रही है. रिपोर्ट में बैंकिंग क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख जोखिमों पर नजर रखने की बात कही गई है. इनमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर, अल नीनो की स्थिति और वैश्विक व्यापार पर लगाए गए टैरिफ का देर से पड़ने वाला प्रभाव शामिल हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, बिना गारंटी वाले लोन (अनसिक्योर्ड लोन) से जुड़ी क्रेडिट लागत, जो पहले घरेलू आर्थिक सुस्ती और इस क्षेत्र में तेज बढ़ोतरी के कारण बढ़ गई थी, अब घटने लगी है. हालांकि, नाममात्र जीडीपी वृद्धि में धीमी सुधार और अल नीनो के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर पर संभावित असर के कारण यह लागत कुछ समय तक ऊंची बनी रह सकती है. रिपोर्ट में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र के कर्ज को भी निगरानी वाले क्षेत्रों में रखा गया है. पश्चिम एशिया संकट  और व्यापार से जुड़ी चुनौतियों के कारण इस क्षेत्र पर कुछ दबाव पड़ सकता है. हालांकि, यस सिक्योरिटीज का मानना है कि इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर तनाव या एनपीए बढ़ने की आशंका फिलहाल नहीं है.

लगातार बढ़ती मांग बैंकिंग क्षेत्र को सहारा देगी

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) एमएसएमई क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान कर सकती है, जिससे संभावित वित्तीय दबाव को कम करने में मदद मिलेगी. यस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में बैंकों की कर्ज वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) मजबूत बनी रहने की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉरपोरेट लोन, एमएसएमई लोन और रिटेल लोन की लगातार बढ़ती मांग बैंकिंग क्षेत्र को सहारा देगी.

बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ फिलहाल 17 प्रतिशत तक पहुंच गई

रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ  फिलहाल करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसके पीछे कॉरपोरेट क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज में सुधार और एमएसएमई सेक्टर में बढ़ी हुई लेंडिंग प्रमुख कारण हैं. हालांकि वित्त वर्ष के अंत तक वृद्धि दर में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन इसके बावजूद यह निचले से मध्य स्तर (लो-टू-मिड टीन्स) में बनी रहने की संभावना है.

 

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Published: 30 Jun, 2026 | 01:05 PM

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