पेट्रोल-डीजल की एक्साइज कटौती क्या राजनीतिक दांव है या सच में जनता को राहत मिलेगी, पढ़ें एक्सपर्ट ने क्या कहा 

Petrol Diesel Tax Cut : केंद्र सरकार के पेट्रोल डीजल से एक्साइज ड्यूटी कटौती के आदेश के बाद उपभोक्ता को तेल कितना सस्ता मिलेगा. इस पर बहस छिड़ गई है. ऑल इंडिया मोटर्स एसोसिएशन (AIMGTA) ने कहा है कि यह फैसला तेल कंपनियों के दबाव को कम करेगा. लेकिन, उपभोक्ता को राहत देनी है तो राज्यों को वैट कटौती का निर्देश केंद्र को देना होगा.

नोएडा | Updated On: 27 Mar, 2026 | 02:01 PM

मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात के चलते क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई बाधित चल रही है. देश में इन वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर लागू 13 रुपये एक्साइज ड्यूटी को घटाकर केवल 3 रुपये कर दिया है और डीजल पर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया है. यह एक्साइज ड्यूटी तेल कंपनियां बाहर से तेल लाने पर सरकार को टैक्स के रूप में देती हैं. अब कंपनियों को यह टैक्स नहीं देना होगा और उन्हें तेल खरीदना सस्ता पड़ेगा. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के रिटेल रेट में भी कमी का ऐलान कर सकती हैं. हालांकि, इसको लेकर संशय है. आइये जानते हैं जानकार लोगों ने सरकार के इस फैसले पर क्या कहा है.

मोटर्स एसोसिएशन ने केंद्र के फैसले को सराहा और तेल कंपनियों पर दबाव कम किया

ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (पंजीकृत) के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने किसान इंडिया से बातचीत में कहा कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी के लिए उनका संगठन सरकार का आभार व्यक्त करता है. उन्होंने बताया कि जब वैश्विक अनिश्चितताओं, विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव और संघर्ष ने ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव डाला है. ऐसे समय पर लिया गया केंद्र का यह फैसला परिवहन क्षेत्र को बहुत जरूरी राहत देने वाला साबित होगा और यह सुनिश्चित होगा कि बढ़ती ईंधन लागत का बोझ आम आदमी पर न पड़े. इससे उत्पादन और लॉजिस्टिक्स लागत को स्थिर करने में भी मदद मिलेगी, जिससे जरूरी सामानों की कीमतों में बेवजह की बढ़ोतरी रुकेगी और उपभोक्ता महंगाई के दबाव से सुरक्षित रहेंगे.

राज्यों को वैट कम करने का निर्देश दे केंद्र सरकार- राजेंद्र कपूर

अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने बताया कि सरकार के इस फैसले से तेल कंपनियों की लागत में गिरावट आएगी, जो अंत में उपभोक्ताओं को भी राहत देने वाली साबित होगी. उन्होंने कहा कि कम से कम तेल के दाम नहीं बढ़ेंगे.  उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को उनके संगठन की ओर से 7 मार्च को पत्र भेजा था, जिसमें तेल के दाम बढ़ने से रोकने के लिए उपायों को अपनाने की मांग की गई है. हमने केंद्र को सलाह दी थी है कि सबसे पहले एक्साइज ड्यूटी कम की जाए और अब केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती को लागू कर दिया है. उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार राज्यों से पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने कहे, क्योंकि राज्य भी तेल कंपनियों पर वैट लगाते हैं, जिससे तेल की कीमत बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में उथल-पुथल की स्थिति बनी रही तो केंद्र सरकार राज्यों को वैट कम करने का निर्देश दे सकती है.

एक्साइज कटौती से डीलर और ग्राहक को कोई फायदा नहीं होगा- पवन खेड़ा

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तहा कि सरकार की एक्साइज कटौती से डीलरों और ग्राहकों के लिए कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा. यह सिर्फ सिर्फ दिखावा है असल में उपभोक्ता को कोई राहत नहीं मिलने वाली है. उन्होंने कहा कि सरकार को सुर्खियां बनाने और लोगों को बेवकूफ बनाने की बजाय ग्राहकों को असल राहत देने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर जनता सोच रही है कि सरकार ने आपकी जेब को राहत दी है, तो आप गलत हैं. उन्होंने दावा किया कि अभी तक डीलरों और ग्राहकों के लिए कीमतें पहले जैसी ही बनी हुई हैं.

पवन खेड़ा ने कहा कि असल में जो कम किया गया है, वह है ‘विशेष अतिरिक्त एक्साइज़ ड्यूटी’, एक ऐसा टैक्स जो तेल मार्केटिंग कंपनियां सरकार को देती हैं. ‘विशेष’ और ‘अतिरिक्त’ शब्द ही बताते हैं कि यह टैक्स कितना अनावश्यक है. उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से ये कंपनियां लगातार घाटा उठा रही हैं. सरकार ने अब बस उस बोझ का एक छोटा सा हिस्सा उठाने पर सहमति जताई है, वह भी ‘विशेष अतिरिक्त’ टैक्स को कम करके. वह भी लगभग एक महीने बाद.

पहले एक्साइज बढ़ाकर 49 लाख करोड़ रुपये समेटे और अब राजनीतिक चाल चली जा रही- कांग्रेस

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने फ्यूल एक्साइज ड्यूटी में कटौती पर कहा कि ये जो एक्साइज ड्यूटी में कटौती हुई है इससे लोगों के फ्यूल कीमत में कमी नहीं होगी. लोगों का पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं होगा. ये सरकार ने ग्राहक को लाभ देने के लिए नहीं बल्कि तेल विपणन कंपनी को सहारा देने के लिए किया है. पिछले 12 साल में पीएम ने 14 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है और उससे 49 लाख करोड़ रुपए अपने राजस्व में कमाए हैं. जब तेल सस्ता भी हुआ तभी उसका लाभ लोगों को नहीं मिला. सवाल है ये क्या ये जो 5 राज्यों में चुनाव है ये न होते तो क्या ये सरकार लोगों को सुरक्षित करती? और जब चुनाव में वोट डल जाएंगे तो क्या सरकार दाम बढ़ाएगी इस पर हम नजर रखेंगे और हम इसका विरोध करेंगे.

खाड़ी देशों में युद्ध के हालात से कच्चे तेल की कीमतें 50 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ीं

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए और उसके बाद ईरान के पलटवार से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.इस महीने की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें 119 USD प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं.  भारत अपने कच्चे तेल का 88 फीसदी और अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है. यह ज्यादा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है. वहीं, सरकार की इस कटौती से तेल कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. एक्साइज ड्यूटी में कटौती की अधिसूचना के बाद फ्यूल रिटेलर्स IOC, BPCL और HPCL के शेयर BSE पर बढ़त के साथ खुले हैं.

Published: 27 Mar, 2026 | 01:56 PM

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