FCI चावल घोटाला! एथेनॉल प्लांट की जगह राइस मिलों में पहुंचा सरकारी चावल, 4 गिरफ्तार.. जांच जारी
मध्य प्रदेश के बालाघाट में FCI के गोदाम से एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे गए सरकारी चावल की कथित हेराफेरी मामले में SIT ने जांच तेज कर दी है. अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार और 13 ट्रक जब्त किए गए हैं. जांच में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के करीब 5 लाख मीट्रिक टन चावल की हेराफेरी की आशंका जताई गई है.
मध्य प्रदेश के बालाघाट में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदाम से एथेनॉल बनाने के लिए छिंदवाड़ा भेजे गए चावल में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है. आरोप है कि यह चावल एथेनॉल प्लांट तक पहुंचने के बजाय महाकौशल क्षेत्र की कई राइस मिलों में भेज दिया गया. मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अब अपनी जांच तेज कर दी है. वहीं, इस मामले में 4 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया और 13 ट्रकों को जब्त किया गया है.
गिरफ्तार लोगों में ट्रक चालक, एथेनॉल प्लांट से जुड़ा एक व्यक्ति और एक ट्रांसपोर्टर शामिल हैं. इसके अलावा, करीब 40 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, जिनमें राइस मिल संचालक, ट्रांसपोर्टर और एथेनॉल प्लांट के कर्मचारी शामिल हैं. SIT से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि जांच के दौरान 13 ट्रकों को भी जब्त किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
490 बोरियों में 242.55 क्विंटल सरकारी चावल
सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का मामला जून के पहले सप्ताह में सामने आया था. बालाघाट के नवगांव स्थित FCI गोदाम से छिंदवाड़ा के AVJ एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे गए तीन ट्रक अपने तय स्थान तक नहीं पहुंचे. 3 जून को इनमें से एक ट्रक बालाघाट के वारासीवनी इलाके की एक राइस मिल में मिला, जबकि बाकी दो ट्रक भी एथेनॉल प्लांट तक नहीं पहुंचे थे. इसके बाद तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की संयुक्त टीम ने राइस मिल में अचानक जांच की. जांच के दौरान ट्रक मिल परिसर के अंदर खड़ा मिला. उसमें 490 बोरियों में 242.55 क्विंटल सरकारी चावल लदा हुआ था.
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चावल नवगांव स्थित FCI गोदाम से लोड किया गया था
अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह चावल नवगांव स्थित FCI गोदाम से लोड किया गया था और इसे छिंदवाड़ा के एथेनॉल प्लांट भेजा जाना था, लेकिन रास्ते में इसे कथित तौर पर राइस मिल में पहुंचा दिया गया. इसके बाद पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई. राइस मिल में सरकारी चावल मिलने के बाद जिला प्रशासन ने बालाघाट पुलिस को इसकी जानकारी दी. इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया.
जांच के दौरान 13 ट्रकों को जब्त करने के बाद SIT ने अपनी जांच का दायरा बालाघाट से आगे बढ़ा दिया है. अब सिवनी और छिंदवाड़ा समेत आसपास के जिलों में भी तलाशी और पूछताछ की जा रही है. अधिकारियों को आशंका है कि सरकारी चावल सिर्फ एक राइस मिल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की कई अन्य राइस मिलों में भी पहुंचाया गया हो सकता है.
SIT पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है
एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं राज्य के अन्य एथेनॉल प्लांटों से जुड़े लोग भी इस कथित गड़बड़ी के नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं हैं. फिलहाल SIT पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है. SIT की जांच में यह आशंका भी जताई गई है कि एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे गए सरकारी चावल में फोर्टिफाइड चावल भी शामिल हो सकता है. इस चावल में जरूरी विटामिन और खनिज मिलाए जाते हैं और इसे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में कुपोषण और एनीमिया से निपटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
एथेनॉल उत्पादन के लिए 5 लाख टन सरकारी चावल आवंटित
जांच एजेंसियों को शक है कि राइस मिलों ने इस सरकारी चावल को दोबारा पैक कर कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के रूप में सरकारी गोदामों में वापस सप्लाई कर दिया, जबकि इसका इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए होना था. SIT अब यह भी जांच कर रही है कि यह गड़बड़ी सिर्फ सामने आए ट्रकों तक सीमित है या इसका दायरा कहीं बड़ा है. जांच अधिकारियों के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित करीब 5 लाख मीट्रिक टन सरकारी चावल, जिसकी कीमत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है, की हेराफेरी होने की आशंका है. आरोप है कि इस चावल को एथेनॉल बनाने के बजाय दोबारा सरकारी भंडार में पहुंचा दिया गया.
एथेनॉल ब्लेंडिंग योजना के तहत मिलता है चावल
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग योजना के तहत FCI अतिरिक्त और टूटा हुआ चावल पंजीकृत डिस्टिलरियों को ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के जरिए 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की रियायती दर पर उपलब्ध कराता है. इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करना है, जबकि FCI के लिए इस चावल की वास्तविक लागत 4,000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बताई जाती है.