उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते दिनों एक जिला एक व्यंजन (ODOC) की लिस्ट जारी कर दी है. इसमें राज्य के 75 जिलों के 208 व्यंजनों को शामिल किया गया है. लेकिन, बहस इस बात पर छिड़ गई है कि नॉनवेज व्यंजनों को क्यों जगह नहीं दी गई है. फूड एक्सपर्ट ने नॉनवेज आइटम्स शामिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है. खासकर लखनऊ, मुरादाबाद और बरेली के नॉनवेज व्यंजनों को लेकर घमासान मचा हुआ है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए 208 व्यंजनों की एक लंबी सूची जारी की है. इस सूची में एक भी मांसाहारी व्यंजन शामिल नहीं है. लखनऊ की रेवड़ी, चाट, मलाई मक्खन और आम के उत्पाद शामिल किए गए हैं. जबकि मुरादाबाद के हप्सी हलवे को जगह दी गई है. जबकि, मशहूर खास व्यंजन जैसे गलाउटी कबाब, मुरादाबादी बिरयानी या आजमगढ़ का धीमी आंच पर पका हांडी मटन, बरेली की मटन करी आदि इस सूची से गायब हैं.
व्यंजनों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग उद्देश्य
एक जिला एक उत्पाद (ODOP) की तर्ज पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिसंबर में एक जिला एक व्यंजन (ODOC) की शुरुआत की थी और इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 24 जनवरी को लखनऊ में ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ समारोह के दौरान लॉन्च किया था. सोमवार को कैबिनेट ने इस योजना को मंजूरी दे दी. इस योजना का मकसद ‘एक जिला, एक उत्पाद (ODOP)’ पहल की तर्ज पर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देना है.
रायबरेली के मसाला को शामिल करने पर बिफरे फूड हिस्टोरियन
एक जिला एक व्यंजन योजना के सरकारी आदेश में 208 व्यंजन शामिल हैं, जिन्हें 18 मंडलों और 75 जिलों के व्यंजन शामिल किए गए हैं. खानपान के जानकारों ने मशहूर मांसाहारी व्यंजनों को इस सूची से बाहर रखे जाने पर सवाल उठाए हैं. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार फूड हिस्टोरियन पुष्पेश पंत ने कहा कि इसका कोई मतलब नहीं बनता. मैंने सूची देखी है और उसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि रायबरेली के व्यंजनों की सूची में ‘मसाला’ शामिल है. भला मसाला कोई व्यंजन कैसे हो सकता है?”
रामपुर के हलवा और लखनऊ की रेवड़ी पर सवाल उठे
पुष्पेश पंत ने कहा कि रामपुर से हप्सी हलवा को शामिल किया गया है, जो कोई व्यंजन नहीं है. लखनऊ की सूची में रेवड़ी है, जो कि एक मिठाई है. लखनऊ में गलाउटी कबाब के अलावा मिलने वाले कई तरह के मांसाहारी व्यंजनों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि यहां काकोरी कबाब भी है, जो अवध का एक खास व्यंजन है और लखनऊ के परिवारों में बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार भी यह मानती है कि 68 फीसदी आबादी मांसाहारी है. यह हर वर्ग और जाति के लोगों में है.
अगले चरण में सिफारिश मिली तो शामिल किए जाएंगे मांसाहारी व्यंजन – मंत्री
इस सूची से मांसाहारी पकवानों को हटाए जाने के मुद्दे पर बात करते हुए कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने मीडिया से कहा कि यह जान-बूझकर नहीं किया गया है. अगर भविष्य में इसकी सिफारिश की जाती है, तो इन्हें जोड़ा जा सकता है. इसका मकसद किसी एक लोकप्रिय चीज को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि ऐसे पकवानों को बढ़ावा देना है जिनसे पैकेजिंग, बिक्री और प्रचार के ज़रिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचे. उनके मुताबिक यह सूची लचीली है और लोगों की राय और सुझावों के आधार पर इसे बेहतर बनाया जा सकता है.
कैबिनेट मंत्री ने बताया कैसे चुने गए व्यंजन
कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कहा कि पकवानों की सूची को स्थानीय सिफारिशों और लोगों की मांग के आधार पर शामिल किया गया है. उन्होंने आगे कहा कि सभी 75 जिलों में जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट ने की और जिसमें शिक्षक, प्रोफेसर और स्थानीय विशेषज्ञों को शामिल किया गया. इन्हीं लोगों ने ये सुझाव दिए थे. सर्वे भी करवाए गए थे. इन्हीं सुझावों के आधार पर यह लिस्ट तय की गई थी.

एक्सपर्ट ने कहा मुर्गी-मछली और गोट मीट के व्यंजनों को जगह मिले
कृषि विशेषज्ञों ने किसान इंडिया से कहा कि सरकार को मांसाहारी व्यंजनों को भी सूची में शामिल किया जाना चाहिए. क्योंकि, अगर हम बकरी पालन, मछली पालन और मुर्गीपालन को बढ़ावा दे रहे हैं और योजनाएं चला रहे हैं. इसका मतलब है कि मछली, मुर्गा और बकरी के मीट और उसके व्यंजन खाए जाने हैं. ऐसे में मांसाहार व्यंजनों को भी जगह मिलनी जरूरी है. विशेषज्ञों ने कहा कि कैबिनेट मंत्री ने अपने बयान में कहा है कि अगले चरण में ऐसे व्यंजनों को शामिल किया जाएगा तो अगले चरण का इंतजार करना होगा.