सुपारी तस्करी का खेल बेनकाब, विदेशों में करोड़ों के मुनाफे के लिए हो रहा अवैध कारोबार

पूर्वोत्तर क्षेत्र में विदेशी सुपारी की बड़ी तस्करी का खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों ने 60 हजार किलो सुपारी जब्त कर 5 लोगों को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि पड़ोसी देश से लाई जा रही सुपारी घरेलू बाजार और किसानों को नुकसान पहुंचा रही थी. मामले की जांच अब तेजी से की जा रही है.

नोएडा | Published: 23 May, 2026 | 05:17 PM

Betel Nut Smuggling: पूर्वोत्तर क्षेत्र में विदेशी सुपारी की तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है. खुफिया जानकारी के आधार पर हुई कार्रवाई में करीब 60,000 किलोग्राम विदेशी सुपारी जब्त की गई है. इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. जांच एजेंसियों के अनुसार यह सुपारी पड़ोसी देश म्यांमार से मिजोरम सीमा के रास्ते भारत लाई जा रही थी. तस्कर इसे अलग-अलग राज्यों में पहुंचाकर ऊंचे दामों पर बेचने की तैयारी में थे. शुरुआती जांच में पता चला है कि विदेशी सुपारी को गुप्त रास्तों और वाहनों के जरिए भारत में पहुंचाया जा रहा था.

डीआरआई और सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई

विशिष्ट खुफिया सूचना मिलने के बाद डीआरआई (DRI) ने मिजोरम और असम में कई जगहों पर अभियान चलाया. कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में सूखी विदेशी सुपारी बरामद  की गई. एक अभियान में असम राइफल्स की 38वीं बटालियन ने भी डीआरआई का सहयोग किया. संयुक्त कार्रवाई के दौरान संदिग्ध वाहनों और गोदामों की जांच की गई, जहां से सुपारी की बड़ी खेप पकड़ी गई. जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है. अधिकारियों को शक है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और सीमावर्ती इलाकों के जरिए लगातार तस्करी कर रहा था.

आखिर क्यों हो रही है सुपारी की तस्करी?

विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी सुपारी की अंतरराष्ट्रीय बाजार  में काफी ऊंची कीमत मिलती है. यही वजह है कि तस्कर बड़े पैमाने पर इसकी अवैध सप्लाई कर रहे हैं. विदेशी सुपारी कई बार घरेलू बाजार में सस्ती कीमत पर बेची जाती है, जिससे स्थानीय व्यापार और किसानों को नुकसान होता है. तस्कर कम लागत में सुपारी लाकर ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं. बताया जा रहा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में कमजोर निगरानी और जंगलों वाले रास्तों का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से माल भारत तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं. इसके बाद इसे अलग-अलग राज्यों के बाजारों में सप्लाई किया जाता है.

घरेलू सुपारी किसानों पर बढ़ रहा असर

पड़ोसी देशों से होने वाली अवैध सुपारी की आवक अब घरेलू सुपारी उत्पादकों  के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है. सस्ती विदेशी सुपारी बाजार में आने से स्थानीय किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तस्करी पर समय रहते रोक नहीं लगी तो इसका असर सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है. इससे सरकार को टैक्स का नुकसान होता है और अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलता है. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में सीमा क्षेत्रों में निगरानी और सख्त की जाएगी ताकि विदेशी सुपारी की अवैध तस्करी को रोका जा सके.

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