चावल बाजार पर मंडराया संकट! 90 लाख टन घट सकता है उत्पादन, मांग बढ़ने से बढ़ेगा कीमतों का खतरा

Global Rice Market 2027: 2027 में अलनीनो, मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती खेती व ट्रांसपोर्ट लागत के चलते ग्लोबल चावल बाजार पर दबाव बढ़ सकता है. उत्पादन में करीब 90 लाख टन की कमी का अनुमान है, जबकि बढ़ती मांग और घटते स्टॉक से कीमतों में तेजी का जोखिम बना हुआ है.

नोएडा | Updated On: 12 Aug, 2026 | 08:18 PM

Rice Shortage: दुनिया के चावल बाजार के लिए साल 2027 चुनौतीपूर्ण रह सकता है. मौसम में बदलाव, अलनीनो के मजबूत होने की आशंका और खेती से लेकर ट्रांसपोर्ट तक बढ़ती लागत ने चावल की ग्लोबल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. अनुमान है कि, 2026-27 मार्केटिंग ईयर में दुनिया का चावल उत्पादन करीब 90 लाख टन घटकर 536.4 मिलियन टन रह सकता है. ऐसे में अगर मौसम ने साथ नहीं दिया तो आने वाले समय में चावल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

अलनीनो ने बढ़ाई चावल की चिंता

चावल की खेती के लिए पानी और सही समय पर बारिश बेहद जरूरी होती है. ऐसे में अल नीनो की आशंका दुनिया के बड़े चावल उत्पादक देशों के लिए चिंता का कारण बन गई है. भारत के अलावा पाकिस्तान, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, म्यांमार और फिलीपींस जैसे देशों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. कहीं पानी की कमी फसल को प्रभावित कर सकती है तो कहीं जरूरत से ज्यादा बारिश या मौसम में बदलाव बुवाई और फसल की बढ़त पर असर डाल सकता है. यही वजह है कि ग्लोबल चावल सप्लाई को लेकर अभी से सतर्कता बढ़ रही है.

2027 की शुरुआत तक रह सकता है असर

IREF के मुताबिक, अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने जुलाई में अनुमान जताया था कि अल नीनो के 2027 की शुरुआत तक बने रहने की संभावना 97 फीसदी है. वहीं अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान इसके बहुत मजबूत होने की संभावना 81 फीसदी बताई गई थी. अगर अल नीनो का असर अप्रैल 2027 तक बना रहता है, तो यह धान की खेती के कई अहम चरणों को प्रभावित कर सकता है. कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति से खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका है.

क्या दुनिया में चावल की कमी हो जाएगी?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा कि दुनिया में चावल खत्म होने वाला है. मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, उत्पादन घटने के बावजूद पिछले मार्केटिंग ईयर का बचा हुआ स्टॉक ग्लोबल सप्लाई को कुछ समय तक संभाल सकता है. हालांकि, चिंता की बात यह है कि चावल की मांग बढ़ने का अनुमान है. ग्लोबल चावल आयात करीब 40 लाख टन बढ़कर 59.7 मिलियन टन तक पहुंच सकता है. कई देश मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए पहले से चावल खरीदकर अपना स्टॉक सुरक्षित रखना चाहेंगे.

घटता स्टॉक बढ़ा सकता है जोखिम

ग्लोबल चावल का स्टॉक-टू-यूज रेश्यो करीब 36 फीसदी तक आने का अनुमान है. यह स्तर अभी ऐतिहासिक तौर पर बहुत खराब नहीं माना जा रहा, लेकिन स्टॉक में कमी का मतलब है कि बाजार के पास किसी बड़े झटके से निपटने के लिए सुरक्षा कवच पहले के मुकाबले कमजोर होगा. अगर किसी बड़े उत्पादक देश में अचानक फसल खराब होती है या निर्यात में रुकावट आती है, तो इसका असर कीमतों पर जल्दी दिखाई दे सकता है.

चावल महंगा होने की क्यों बढ़ रही आशंका?

चावल की कीमत सिर्फ उत्पादन से तय नहीं होती. खेती में इस्तेमाल होने वाले खाद, डीजल और दूसरे संसाधनों की लागत भी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा मध्य पूर्व में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण फ्यूल, फर्टिलाइजर और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ सकती है. अगर खेत से मंडी और फिर बंदरगाह तक चावल पहुंचाने का खर्च बढ़ता है, तो इसका असर आखिरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर पड़ सकता है.

भारत के लिए क्यों अहम है यह स्थिति?

भारत दुनिया के बड़े चावल उत्पादक, उपभोक्ता और एक्सपोर्टर देशों में शामिल है. इसलिए ग्लोबल उत्पादन या कीमतों में बड़ा बदलाव भारतीय किसानों, कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकता है. अभी दुनिया के पास पुराने स्टॉक का सहारा है, लेकिन अगर अल नीनो का असर अनुमान से ज्यादा हुआ और उत्पादन में बड़ी गिरावट आई, तो यह सुरक्षा कवच तेजी से कमजोर हो सकता है. ऐसे में 2027 में चावल की सप्लाई, कीमत और एक्सपोर्ट पॉलिसी पर दुनिया की नजर रहेगी.

Published: 13 Aug, 2026 | 06:00 AM

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