Telangana News: तेलंंगाना में कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास की खरीद प्रक्रिया रोक दी है. इसके चलते किसानों को बची हुई कपास बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि राज्य में बहुत से किसानों के पास अभी कपास की फसल बची हुई है. ऐसे में किसानों ने CCI से कपास खरीदी की तरीख को आगे बढ़ाने की मांग की है. वहीं, कई किसान सरकारी खरीदी बंद होने के बाद प्राइवेट व्यापारियों को कपास बेच रहे हैं. ऐसे में उन्हे एमएसपी से 1500 रुपये क्विंटल कम रेट मिल रहा है. इसके चलते किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
अधिकारियों के अनुसार, साल 2025 में आदिलाबाद, मंचेरियल, कुमारम भीम आसिफाबाद और निर्मल जिलों में करीब 12.60 लाख एकड़ क्षेत्र में कपास की खेती की गई थी. अनुमान था कि इन चारों जिलों में लगभग 70 लाख क्विंटल कपास का उत्पादन होगा, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण वास्तविक उत्पादन में काफी गिरावट दर्ज की गई.
12 प्रतिशत नमी वाली कपास का रेट
27 अक्टूबर को कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास की खरीद शुरू की थी और 8 से 12 प्रतिशत नमी वाली कपास के लिए 8,110 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया था. बाद में ज्यादा नमी और कपास के बीज का आकार छोटा होने का हवाला देते हुए कीमत में 100 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती कर दी गई, जिससे किसानों को नुकसान हुआ. इसके बाद CCI ने 20 फरवरी को खरीद प्रक्रिया बंद कर दी. किसानों के संगठनों और राजनीतिक दलों, खासकर BRS, के विरोध के बाद खरीद की अंतिम तारीख 27 फरवरी तक बढ़ाई गई. पार्टी ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और आदिलाबाद व कुमारम भीम आसिफाबाद के कलेक्टरों को ज्ञापन देकर खरीद की समय सीमा बढ़ाने की मांग की.
प्रति क्विंटल 1500 रुपये का नुकसान
तेलंगाना टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों और राजनीतिक दलों की मार्च 25 तक समय बढ़ाने की अपील के बावजूद CCI ने अपनी अंतिम तारीख 27 फरवरी पर ही कायम रखी. इसके बाद किसान मजबूरी में अपनी कपास निजी व्यापारियों को बेचने को मजबूर हुए, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ा. निजी बाजार में कपास की कीमत करीब 6,500 रुपये प्रति क्विंटल है, यानी किसानों को हर क्विंटल पर कम से कम 1,500 रुपये का नुकसान हो रहा है.
किसान कर रहे समस्याओं का सामना
रायथु स्वराज्य वेदिका के जिला संयोजक बोर्रन्ना ने तेलंगाना टुडे से कहा कि कपास किसान बीज बोने से लेकर कटाई तक कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले किसान इस फसल से अच्छा मुनाफा कमाते थे, लेकिन अब खराब मार्केटिंग अवसर और असमय बारिश के कारण वे गंभीर आर्थिक संकट में हैं. बोर्रन्ना ने कहा कि कपास की खेती अब लाभकारी नहीं रही.
अब तक करीब 45 लाख क्विंटल कपास खरीदी की गई
अधिकारियों के अनुसार, पहले आदिलाबाद जिले में अब तक करीब 45 लाख क्विंटल कपास खरीदी गई है, जबकि पिछले साल यह संख्या 56.94 लाख क्विंटल थी. आदिलाबाद शहर के कृषि मार्केट यार्ड में 18.93 लाख क्विंटल कपास खरीदी गई, जो पिछले साल के 25.38 लाख क्विंटल से कम है. इसी तरह, आसिफाबाद, निर्मल और मंचेरियल जिलों के मार्केट यार्ड में भी कपास की खरीदी पिछले साल की तुलना में कम दर्ज की गई.
कपास खरीद अवधि 15 दिन के लिए बढ़ाई
हालांकि, महाराष्ट्र में कपास खरीदी की तारीख मार्च तक बढ़ाई गई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मांग पर CCI ने महाराष्ट्र में कपास की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की अवधि को 15 दिन और बढ़ा दिया. यह फैसला 27 फरवरी की पहले तय समय-सीमा के एक दिन बाद लिया गया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिखकर किसानों को नुकसान से बचाने के लिए खरीद अवधि बढ़ाने की मांग की थी. वहीं, भारत-अमेरिका ड्यूटी-फ्री आयात की खबर के बाद बाजार में कपास की कीमतों में गिरावट भी देखी गई.