Sugarcane Dues: मॉनसून सत्र के दौरान संसद में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा उठा. खासतौर पर उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा क्षेत्र की शामली और थाना भवन जैसी निजी चीनी मिलों पर किसानों के करोड़ों रुपये के बकाये को लेकर सरकार से सवाल पूछा गया. इसके जवाब में केंद्र सरकार ने साफ किया कि फिलहाल गन्ना भुगतान के लिए कोई अलग बजट पैकेज देने की योजना नहीं है. साथ ही सरकार ने यह भी बताया कि किसानों की आय बढ़ाने और फसल को सुरक्षित बनाने के लिए नई और बेहतर गन्ना किस्मों पर लगातार काम किया जा रहा है.
गन्ना भुगतान पर सरकार ने क्या कहा?
लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री ने कहा कि, गन्ना किसानों को उनकी फसल का भुगतान संबंधित चीनी मिलें अपने संसाधनों से करती हैं. केंद्र सरकार सीधे तौर पर किसानों को भुगतान नहीं करती. सरकार ने स्पष्ट किया कि चीनी सीजन 2025-26 के दौरान गन्ना किसानों के बकाये के भुगतान के लिए केंद्र की ओर से कोई विशेष बजट पैकेज नहीं दिया गया है. यानी भुगतान की जिम्मेदारी पहले की तरह संबंधित चीनी मिलों की ही रहेगी.
किसानों की कमाई बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार का कहना है कि वह सिर्फ किसानों का गन्ना भुगतान समय पर कराने पर ही नहीं, बल्कि गन्ने की पैदावार और किसानों की कमाई बढ़ाने पर भी लगातार काम कर रही है. इसके लिए नई और बेहतर गन्ने की किस्में तैयार की जा रही हैं, जो ज्यादा उत्पादन दें और बीमारियों का बेहतर सामना कर सकें. खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दूसरे उपयुक्त इलाकों के लिए ऐसी उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, ताकि किसानों को अच्छी पैदावार, कम नुकसान और ज्यादा मुनाफा मिल सके.
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ये नई गन्ना किस्में किसानों के लिए होंगी फायदेमंद
सरकार के अनुसार, हाल के सालों में कई नई गन्ना किस्मों को अधिसूचित किया गया है. इनमें Co. 13235, Co. 18231, Co. 17231, Co. 19231 और Co. 17451 जैसी किस्में शामिल हैं. इन किस्मों को अधिक उपज देने और खेती को ज्यादा लाभदायक बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है. उम्मीद है कि इनके इस्तेमाल से किसानों का उत्पादन बढ़ेगा और खेती की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.
लाल सड़न रोग से बचाव में मिलेगी मदद
गन्ने की खेती में लाल सड़न (Red Rot) सबसे खतरनाक बीमारियों में मानी जाती है. इस समस्या से किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने Co 16202, Co 14201 और Co 15023 जैसी नई किस्मों को उत्तर प्रदेश के लिए अधिसूचित किया है. सरकार का कहना है कि ये किस्में लाल सड़न रोग के प्रति अधिक सहनशील हैं. इससे फसल खराब होने का खतरा कम होगा और किसानों को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी.
हर साल तैयार किए जाते हैं बेहतर बीज
सरकार ने बताया कि, पुराने और कम उत्पादक बीजों की जगह नई उन्नत किस्में किसानों तक पहुंचाने के लिए हर साल अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से ब्रीडर बीज तैयार किए जाते हैं. इसके बाद इन्हें राज्यों की जरूरत के अनुसार किसानों तक पहुंचाया जाता है. सरकार का मानना है कि, बेहतर बीज, नई तकनीक और रोग-रोधी किस्मों के इस्तेमाल से गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और किसानों की आय में भी सुधार आएगा. हालांकि गन्ना बकाया भुगतान के मामले में सरकार ने साफ कर दिया है कि इसकी जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिलों की ही रहेगी और फिलहाल इसके लिए किसी अलग केंद्रीय पैकेज का प्रावधान नहीं किया गया है.