REPORT: गर्मी से पहले जल संकट की आहट, कई राज्यों में 50 प्रतिशत से नीचे पहुंचा बांधों का स्तर

मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव क्षेत्र से दक्षिण भारत को कुछ राहत मिलने की संभावना जताई है. लेकिन फिलहाल ज्यादा बारिश की उम्मीद नहीं है. अगर आने वाले हफ्तों में स्थिति नहीं सुधरी, तो जलाशयों का स्तर और गिर सकता है.

नई दिल्ली | Published: 27 Feb, 2026 | 11:54 AM

CWC reservoir storage report: गर्मी अभी पूरी तरह आई भी नहीं है, लेकिन देश के बड़े बांधों की हालत चिंता बढ़ाने लगी है. सर्दियों में कम बारिश और बढ़ती पानी की खपत के कारण जलाशयों का जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश के प्रमुख बांधों में अब कुल क्षमता का 60 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले महीनों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है.

आंकड़े क्या बताते हैं

केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 अरब घन मीटर है. लेकिन इस समय इनमें केवल 108.338 अरब घन मीटर पानी बचा है. यानी कुल क्षमता का करीब 59 प्रतिशत. यह आंकड़ा 60 प्रतिशत की सीमा से नीचे जा चुका है, जो चिंता का संकेत है.

सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि करीब 28 प्रतिशत बांध ऐसे हैं, जहां पानी आधे से भी कम बचा है. यानी हर तीन में से एक बांध में जल स्तर 50 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुका है.

सर्दियों की कमी अब दिख रही है

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह सर्दियों में कम बारिश है. जनवरी से फरवरी के बीच देश में औसतन 58 प्रतिशत कम वर्षा हुई. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में तो 90 प्रतिशत तक बारिश कम रही. मध्य भारत में भी 77 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई.

मौसम विभाग के अनुसार देश के 727 जिलों में से 78 प्रतिशत जिलों में या तो सामान्य से कम बारिश हुई या बिल्कुल नहीं हुई. यही वजह है कि जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया.

क्षेत्रवार तस्वीर

पश्चिम भारत में स्थिति कुछ हद तक संभली हुई है, जहां 53 जलाशयों में औसतन करीब 70 प्रतिशत पानी है. गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र में जल स्तर 69 से 71 प्रतिशत के बीच है.

दक्षिण भारत में हालात ज्यादा गंभीर हैं. यहां 47 जलाशयों में औसतन 50 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है. कर्नाटक और तेलंगाना में जल स्तर आधे से नीचे है. तमिलनाडु और केरल में भी 60 प्रतिशत से कम भंडारण है. आंध्र प्रदेश की स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां 62 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है.

मध्य क्षेत्र में औसतन 63 प्रतिशत पानी है. छत्तीसगढ़ में 77 प्रतिशत भंडारण राहत देता है, लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह 55 और 54 प्रतिशत पर सिमटा हुआ है.

पूर्वी भारत में औसतन 57 प्रतिशत पानी है, लेकिन असम में स्थिति बेहद कमजोर है, जहां केवल 21 प्रतिशत जल स्तर है. पश्चिम बंगाल और बिहार में भी 40 प्रतिशत से कम पानी बचा है.

उत्तरी क्षेत्र में औसतन 55 प्रतिशत पानी है. राजस्थान और पंजाब में स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में जल स्तर 48 प्रतिशत तक गिर चुका है.

क्या राहत मिल सकती है?

मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव क्षेत्र से दक्षिण भारत को कुछ राहत मिलने की संभावना जताई है. लेकिन फिलहाल ज्यादा बारिश की उम्मीद नहीं है. अगर आने वाले हफ्तों में स्थिति नहीं सुधरी, तो जलाशयों का स्तर और गिर सकता है.

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