गंदा पानी बनेगा यूपी की ताकत, 2035 तक 100 फीसदी वेस्ट वॉटर के इस्तेमाल का लक्ष्य

UP water security plan: इस योजना के तहत उपचारित वेस्ट वॉटर का इस्तेमाल खेती, उद्योग, नगर निकायों के काम और गैर-पेय घरेलू जरूरतों में किया जाएगा. इससे न केवल भूजल पर दबाव कम होगा, बल्कि नदियों को प्रदूषण से भी बचाया जा सकेगा.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 1 Jan, 2026 | 09:11 AM

UP water security plan: तेजी से बढ़ते शहर, फैलता उद्योग और बदलता मौसम इन सबके बीच पानी की कमी उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. इसी चुनौती को अवसर में बदलने के लिए योगी सरकार ने एक ऐसा मेगा प्लान तैयार किया है, जो आने वाले दशकों तक प्रदेश की जल सुरक्षा की तस्वीर बदल सकता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने तय किया है कि अब वेस्ट वॉटर बोझ नहीं, बल्कि विकास का मजबूत संसाधन बनेगा. सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030 तक 50 फीसदी और 2035 तक 100 फीसदी अपशिष्ट जल का सुरक्षित पुनः उपयोग किया जाए.

इस योजना के तहत उपचारित वेस्ट वॉटर का इस्तेमाल खेती, उद्योग, नगर निकायों के काम और गैर-पेय घरेलू जरूरतों में किया जाएगा. इससे न केवल भूजल पर दबाव कम होगा, बल्कि नदियों को प्रदूषण से भी बचाया जा सकेगा.

जल सुरक्षा और सतत विकास की नई सोच

योगी सरकार की यह पहल सिर्फ पानी बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सतत विकास से जोड़ने की कोशिश भी है. सरकार मानती है कि अगर गंदे पानी को वैज्ञानिक तरीके से साफ कर दोबारा इस्तेमाल किया जाए, तो नदियों में जाने वाला प्रदूषण भी घटेगा और भूजल का दोहन भी कम होगा. यही वजह है कि इस योजना को जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन मजबूत करने का माध्यम माना जा रहा है.

वेस्ट वॉटर बनेगा विकास का संसाधन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत वेस्ट वॉटर को अब बोझ नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में देखा जा रहा है. उपचारित जल का इस्तेमाल शहरों में पार्कों की सिंचाई, सड़क धुलाई, निर्माण कार्यों और उद्योगों में किया जाएगा. ग्रामीण इलाकों में यही पानी खेती के लिए सहारा बनेगा. इससे किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल स्रोत मिलेगा और उद्योगों को पानी की कमी से राहत मिलेगी.

तीन चरणों में लागू होगा पूरा रोडमैप

योगी सरकार ने वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट के लिए स्पष्ट और चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की है. पहले चरण में उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है, जहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और संग्रहण की व्यवस्था पहले से मौजूद है. यहां 50 फीसदी वेस्ट वॉटर के पुनः उपयोग का लक्ष्य रखा गया है. दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 100 फीसदी पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा. तीसरे चरण में उन इलाकों में नई व्यवस्था विकसित की जाएगी, जहां अभी तक ऐसी सुविधा नहीं है, ताकि वहां भी धीरे-धीरे वेस्ट वॉटर का पूरा इस्तेमाल हो सके.

खेती, उद्योग और पर्यावरण…तीनों को मिलेगा फायदा

इस मेगा प्लान से किसानों को सिंचाई के लिए भरोसेमंद जल स्रोत मिलेगा, उद्योगों को पानी की कमी से राहत मिलेगी और पर्यावरण को भी संरक्षण मिलेगा. सरकार का मानना है कि यह योजना उत्तर प्रदेश को जल प्रबंधन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर देगी.

कुल मिलाकर, वेस्ट वॉटर को संसाधन में बदलने की यह सोच सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नींव रखेगी.

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Published: 1 Jan, 2026 | 08:32 AM

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