Tamil Nadu News: तमिलनाडु सरकार ने पोंगल त्योहार से पहले सभी चावल राशन कार्डधारकों को 3,000 रुपये की नकद सहायता देने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा है कि यह राशि श्रीलंकाई तमिल पुनर्वास शिविरों में रहने वाले परिवारों को भी मिलेगी. राज्य में करीब 2.23 करोड़ चावल राशन कार्डधारक हैं, जबकि लगभग 19,000 परिवार पुनर्वास शिविरों में रहते हैं. हालांकि, केवल चीनी या बिना वस्तु वाले करीब 3.8 लाख राशन कार्ड इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे. यह पोंगल पर अब तक दी गई सबसे बड़ी नकद सहायता है. इससे पहले 2014 में 100 रुपये और 2021 के चुनाव से पहले 2,500 रुपये दिए गए थे.
इस साल विधानसभा चुनाव से पहले पोंगल गिफ्ट योजना के लिए सरकार ने 6,936.18 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है. नकद सहायता राशन दुकान के कर्मचारियों के माध्यम से सीधे वितरित की जाएगी. नकद के अलावा लाभार्थियों को 1 किलो चावल और 1 किलो चीनी के साथ गन्ना भी मिलेगा. इसके अलावा 1.76 करोड़ राशन कार्डधारकों को मुफ्त धोती और साड़ी दी जाएगी.
सभी राशन कार्ड सक्रिय बैंक खातों से लिंक हो जाएंगे
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो साल पहले राशन कार्ड और बैंक खातों की जांच में पता चला कि कई कार्ड बैंक से जुड़े नहीं हैं. इसलिए डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर तभी हो पाएगा जब सभी राशन कार्ड सक्रिय बैंक खातों से लिंक हो जाएंगे. पोंगल के अवसर पर नकद सहायता देने की परंपरा 1990 में तत्कालीन सीएम एम. करुणानिधि ने शुरू की थी, तब पेंशनधारकों को 100 रुपये दिए गए थे. 1998 में इसे 150 रुपये किया गया.
कब कितने रुपये मिले
वहीं, जनवरी 2014 में तत्कालीन सीएम जे. जयललिता ने नकद 100 रुपये के साथ 1 किलो चावल और 1 किलो चीनी देने की शुरुआत की. इसके बाद, 2019 में नकद राशि 1,000 रुपये हुई. 2021 में 2,500 रुपये और 2022 में 21 आइटम वाले गिफ्ट हैंपर दिए गए. 2023 और 2024 में नकद 1,000 रुपये दिया गया.
पिछले महीने क्या आई थी खबर
वहीं, पीछले महीने खबर सामने आई थी कि तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय को कहा कि फिलहाल कोई योजना नहीं है जिसके तहत महिलाओं और बच्चों को मुफ्त या सब्सिडी दर पर सैनिटरी नैपकिन राशन दुकानों के माध्यम से दी जाए. अटॉर्नी जनरल पी.एस. रमण ने सुनवाई के दौरान बताया था कि यदि ऐसा किया गया तो सरकार को इसके लिए 4,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे, इसलिए फिलहाल कोई नई योजना लाने का प्रस्ताव नहीं है. उन्होंने यह भी कहा था कि अभी पोस्टनैटल महिलाएं और स्कूल की लड़कियों को गांव के स्वास्थ्य नर्सों के माध्यम से सैनिटरी नैपकिन मुहैया कराई जा रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं.