Seafood Export में भारत का बड़ा रिकॉर्ड, झींगा ने विदेशों में मचाया धमाल, 47,973 करोड़ कमाए

भारत के सीफूड एक्सपोर्ट ने इस साल नया रिकॉर्ड बनाया है. समुद्री उत्पादों की बढ़ती विदेशी मांग से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है. खासतौर पर फ्रोजन झींगा कारोबार ने बड़ी भूमिका निभाई है. सरकार की योजनाओं और आधुनिक तकनीकों से मत्स्य क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं.

नोएडा | Published: 18 May, 2026 | 04:20 PM

India Seafood Export: भारत का मत्स्य क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है. केंद्र सरकार की योजनाओं और आधुनिक तकनीकों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है. PIB के अनुसार, भारत का सीफूड एक्सपोर्ट पहली बार 72 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. देश से कुल 19.32 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात हुआ. इसमें सबसे बड़ा योगदान फ्रोजन झींगा यानी (Frozen Shrimp) का रहा. अकेले झींगा एक्सपोर्ट से 47,973 करोड़ रुपये की कमाई हुई. सरकार का कहना है कि मत्स्य क्षेत्र ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाएगा. यही वजह है कि फिशरीज और एक्वाकल्चर सेक्टर को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है.

मछली पालन बना कमाई का बड़ा जरिया

अब मछली पालन Vसिर्फ पारंपरिक काम नहीं रह गया है. देश के कई किसान खेती के साथ फिश फार्मिंग भी कर रहे हैं. इससे उनकी आय में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. सरकार तालाब निर्माण, मछली बीज, फीड और आधुनिक उपकरणों पर सहायता दे रही है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी योजनाओं ने छोटे मछुआरों को भी नई ताकत दी है. तटीय राज्यों के साथ-साथ कई अंदरूनी राज्यों में भी फिश फार्मिंग का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है.

फ्रोजन झींगा की विदेशों में भारी मांग

भारत के फ्रोजन झींगा की विदेशों में जबरदस्त मांग है. अमेरिका, चीन, जापान और यूरोपीय देशों में भारतीय झींगा बड़े स्तर पर भेजा जा रहा है. PIB के अनुसार, कुल सीफूड एक्सपोर्ट में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी फ्रोजन झींगा की रही. इससे लगभग 47,973 करोड़ रुपये की कमाई हुई. आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और गुजरात जैसे राज्यों में झींगा पालन तेजी से बढ़ा है. सरकार अब प्रोसेसिंग और पैकेजिंग सुविधाओं को भी मजबूत कर रही है.

गांवों में बढ़ रहा रोजगार

सीफूड एक्सपोर्ट  बढ़ने से गांवों और तटीय इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं. मछली पालन, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्ट से लाखों लोग जुड़े हैं. महिलाएं भी इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में काम कर रही हैं. कई स्वयं सहायता समूह छोटे फिश प्रोसेसिंग यूनिट चला रहे हैं. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है. कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक सप्लाई चेन बनने से मछुआरों को अपने उत्पाद का बेहतर दाम मिल रहा है.

विकसित भारत 2047 में अहम भूमिका

सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत का सीफूड कारोबार और तेजी से बढ़ेगा. नए विदेशी बाजारों  की तलाश और बेहतर गुणवत्ता पर लगातार काम किया जा रहा है. मत्स्य क्षेत्र विदेशी मुद्रा कमाने के साथ लाखों लोगों की आय बढ़ाने में भी मदद कर रहा है. यही कारण है कि सरकार इस सेक्टर को भविष्य की बड़ी आर्थिक ताकत मान रही है. रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सीफूड एक्सपोर्ट यह दिखाता है कि भारत अब वैश्विक सीफूड बाजार में मजबूत पहचान बना चुका है.

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