देशभर में सड़कों पर उतरे किसान, ट्रेड यूनियनों ने किया भारत बंद.. राहुल गांधी ने किया समर्थन
India US Trade Deal: संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रहा है. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में किसान और मजदूर सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मार्च भी कर रहे हैं. वहीं, लेबर कानूनों के विरोध में ट्रेड यूनियन भारत बंद के तहत विरोध कर रहे हैं.
India US Trade Deal : भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए घरेलू बाजार खोले जाने के विरोध में आज देशभर में कई किसान संगठन विरोध प्रदर्शन और मार्च निकाल रहे हैं. वहीं, कई ट्रेड यूनियन ने आज भारत बंद का आह्वान किया है और दुकानों-बाजारों को बंद करा दिया है. संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर में किसान तहसीलों और जिला कलेक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, किसानों-मजदूरों के प्रदर्शन को राहुल गांधी ने सपोर्ट किया है.
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों का देशव्यापी प्रदर्शन
अमेरिका के साथ किए गए व्यापार समझौते पर किसान संगठनों ने नाराजगी जताई है. संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले भी सरकार को किसानों को बर्बाद नहीं करने के लिए समझौते का विरोध किया था. आज संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बुलाए गए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के चलते उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में किसान जिला कलेक्ट्रेट और तहसील परिसरों में धरना दे रहे हैं और नारेबाजी कर रहे हैं. वहीं, किसानों का कहना है कि वे ट्रेड डील की सांकेतिक प्रतियां भी जला रहे हैं.
लेबर कोड के विरोध में ट्रेड यूनियनों का भारत बंद
10 से ज्यादा ट्रेड यूनियनों ने आज 12 फरवरी को पूरे देश में भारत बंद (Bharat Bandh) का आह्वान किया है. यूनियन से जुड़े लोग केंद्र की ‘मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियों’ का विरोध कर रहे हैं. ट्रेड यूनियनों के सदस्य गुरुवार को कोयंबटूर में देशव्यापी हड़ताल के तहत विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वे चार लेबर कोड को रद्द करने और मजदूरों और किसानों पर असर डालने वाली कई प्रस्तावित और मौजूदा नीतियों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
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राहुल गांधी ने किसानों, मजदूरों और ट्रेड यूनियनों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किसानों, मजदूरों और ट्रेड यूनियनों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने सड़कों पर हैं. मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी. किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आखिरी सहारा भी छिन सकता है. जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज को नजरअंदाज किया गया. राहुल गांधी ने आगे कहा कि क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर किसी “grip” की पकड़ बहुत मज़बूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं.
Delhi: Congress MP Priyanka Gandhi Vadra says, “What they are doing is very wrong… The trade deal they have signed will cause huge losses to farmers. Today, all labour unions are on strike, and we extend our full support to them…” pic.twitter.com/XcU3hBjjdX
— IANS (@ians_india) February 12, 2026
व्यापार समझौते के विरोध में एसकेएम ने वाणिज्य मंत्री का मांगा था इस्तीफा
भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया है. किसान संगठनों और किसान नेताओं का कहना है कि इससे कृषि और किसानों को नुकसान होगा. 7 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान में कहा था अमेरिका-भारत व्यापार पर अंतरिम समझौते का फ्रेमवर्क अमेरिकी कृषि क्षेत्र की मल्टीनेशनल कंपनियों के सामने पूरी तरह से आत्मसमर्पण है. खासकर जॉइंट स्टेटमेंट में सूखे डिस्टिलर ग्रेन (DDGs), जानवरों के चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स, और अतिरिक्त प्रोडक्ट्स को शामिल करने का हवाला देते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) नेताओं ने कहा कि जानवरों के चारे के बाजार पर नियंत्रण पूरी तरह से अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार हो जाएगा. भारतीय किसानों को भारी नुकसान होगा. किसान नेताओं ने वाणिज्य मंत्री का इस्तीफा मांगा था और देशभर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी.
भाकियू ने ट्रेड डील की प्रतियां जलाईं
भारतीय किसान यूनियन ने लेटर जारी करते हुए अपने प्रदेश अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों से कहा है कि भारत-अमेरिका के मध्य हुए कृषि व्यापार समझौते को लेकर संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर 12 फरवरी 2026 को सभी प्रदेशों के जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा. इसके साथ ही इसके बाद दोपहर में भारतीय किसान यूनियन की सभी प्रदेशों की ग्राम इकाई इसी विषय को लेकर ‘हमारा खेत-हमारा अधिकार’ के तहत अपने खेतों पर भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौता की प्रतियां जलाएंगे.
एसकेएम के विरोध प्रदर्शन को लेकर भाकियू ने जारी की चिट्ठी.
राकेश टिकैत बोले- किसानों का नुकसान हम नहीं होने देंगे
एसकेएम के नेता और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि देश की 70 फीसदी आबादी पर यह सरकार का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार है. भारत-अमेरिका के बीच एग्रीकल्चर ट्रेड डील लगभग अब हो चुकी है. लेकिन इसके दूरगामी परिणामों को लेकर भारतीय किसानों की चिंताएं और गहरी हो गई हैं. अमेरिकी कृषि को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत का किसान लागत, कर्ज और अनिश्चित बाजार से पहले ही जूझ रहा है. अब सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत आएंगे तो देशी फसलों के दाम गिरेंगे, MSP कमजोर होगी और सबसे बड़ा नुकसान छोटे व सीमांत किसानों को होगा. यह डील आयात निर्भरता, कॉरपोरेट नियंत्रण और किसान की सौदेबाजी शक्ति को कमजोर करने की दिशा में कदम है. इससे न केवल किसानों की आमदनी प्रभावित होगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी खतरा बढ़ेगा. राकेश टिकैत ने कहा कि किसान विकास के विरोधी नहीं हैं. लेकिन किसानों की सहमति और संरक्षण के बिना किया गया कोई भी समझौता किसान हित में नहीं हो सकता.