Report: बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान, 9 राज्यों के 111 जिलों में उत्पादन गिरावट तय
इस बार सबसे बड़ी चिंता सिर्फ उत्पादन घटने की नहीं, बल्कि गेहूं की गुणवत्ता खराब होने की भी है. कई इलाकों में करीब 30 प्रतिशत तक फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. दानों के सिकुड़ने, उनका रंग फीका पड़ने और चमक खत्म होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं.
wheat crop damage: देशभर में इस बार गेहूं की फसल पर मौसम की मार ने बड़ा असर डाला है. मार्च और अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है. खेतों में खड़ी फसल जहां-तहां गिर गई, वहीं कई जगहों पर कटाई के लिए तैयार गेहूं भी खराब हो गया. ऐसे हालात में अब उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को लेकर चिंता बढ़ गई है.
9 राज्यों के 111 जिलों में असर
हाल ही में एग्रीवॉच द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट, जो रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के लिए बनाई गई है, उसमें बताया गया है कि देश के 9 राज्यों के 111 जिलों में गेहूं की फसल प्रभावित हुई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस नुकसान का असर केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बड़े कृषि क्षेत्रों में इसका प्रभाव देखा गया है. यही वजह है कि इस साल गेहूं उत्पादन में 5 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट की आशंका जताई जा रही है.
उत्पादन ही नहीं, गुणवत्ता भी प्रभावित
इस बार सबसे बड़ी चिंता सिर्फ उत्पादन घटने की नहीं, बल्कि गेहूं की गुणवत्ता खराब होने की भी है. कई इलाकों में करीब 30 प्रतिशत तक फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. दानों के सिकुड़ने, उनका रंग फीका पड़ने और चमक खत्म होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं. इसका सीधा असर बाजार में मिलने वाली कीमत पर पड़ सकता है.
अलग-अलग जिलों में अलग असर
रिपोर्ट के अनुसार, फसल को 3 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है. कुछ राज्यों में जहां 10 से 15 प्रतिशत तक फसल पहले ही कट चुकी थी, वहीं जिन जिलों में फसल पककर तैयार थी या कटाई के करीब थी, वहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. इन क्षेत्रों में 25 से 30 प्रतिशत तक फसल खराब होने की खबर है.
इन जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान
सबसे ज्यादा असर पंजाब के अमृतसर, होशियारपुर और रूपनगर में देखा गया है, जहां 15 से 25 प्रतिशत तक फसल प्रभावित हुई है. हरियाणा के रेवाड़ी, उत्तर प्रदेश के हमीरपुर, बिहार के बेगूसराय और पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर में भी इसी स्तर का नुकसान दर्ज किया गया है. इसके अलावा कुछ जिलों में 10 से 15 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की आशंका है, जबकि 8 राज्यों के करीब 51 जिलों में 3 से 5 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है.
राजस्थान के बीकानेर जिले में भी 3 से 5 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है, लेकिन 2 अप्रैल को हुई ओलावृष्टि ने यहां हालात को और खराब कर दिया, जिससे यह जिला सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हो गया.
सरकार के लक्ष्य पर असर पड़ने की आशंका
सरकार ने इस साल 120.21 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है, जो एक रिकॉर्ड स्तर है. साथ ही, 30 जून तक 303.36 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य भी तय किया गया है. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
गुणवत्ता नियमों में राहत की मांग
फसल की खराब स्थिति को देखते हुए राजस्थान और हरियाणा की सरकारों ने केंद्र से गेहूं खरीद के लिए तय गुणवत्ता मानकों में ढील देने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर नियमों में थोड़ी नरमी नहीं बरती गई, तो किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
केंद्र सरकार ने उठाए कदम
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रभावित इलाकों में केंद्रीय टीमों को भेजा गया है, जो जमीन पर जाकर फसल नुकसान का आकलन कर रही हैं. खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने भी माना है कि कुछ राज्यों से गुणवत्ता मानकों में राहत देने की मांग आई है और अगर जरूरत पड़ी तो इस पर फैसला लिया जाएगा.
किसानों की बढ़ी चिंता
फसल खराब होने से किसानों की सबसे बड़ी चिंता उनकी आमदनी को लेकर है. कई किसानों ने पूरी मेहनत से फसल तैयार की थी, लेकिन अचानक मौसम बदलने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा. अब उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द राहत देगी और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा.