Report: अनाज से हटकर फल-सब्जियों की ओर बढ़ रहे किसान, खेती में दिख रहा बड़ा बदलाव

खेती में यह बदलाव सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लोगों की थाली से भी है. जैसे-जैसे लोगों की आमदनी बढ़ी है, वैसे-वैसे खान-पान की आदतों में भी बदलाव आया है. अब लोग सिर्फ अनाज पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि फल, सब्जियां, दूध, अंडा, मांस और प्रोसेस्ड फूड की मांग लगातार बढ़ रही है.

नई दिल्ली | Published: 21 Jan, 2026 | 08:52 AM

पिछले एक दशक में भारतीय खेती की तस्वीर धीरे-धीरे लेकिन साफ तौर पर बदलती नजर आ रही है. परंपरागत तौर पर गेहूं, धान और अन्य अनाजों पर निर्भर रहने वाले किसान अब तेजी से फल-सब्जियों और बागवानी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. यह बदलाव किसी एक साल या मौसम का नहीं है, बल्कि यह खेती की सोच, बाजार की मांग और आमदनी की जरूरतों से जुड़ा एक लंबा और गहराता हुआ ट्रेंड बन चुका है.

अनाज से बागवानी की ओर बढ़ता रकबा

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच बागवानी फसलों के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र लगातार बढ़ा है. इस दौरान फल और सब्जियों सहित कुल बागवानी क्षेत्र में औसतन सालाना लगभग 1.66 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, अनाज फसलों का रकबा भी बढ़ा है, लेकिन इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही और यह औसतन करीब 1.08 प्रतिशत सालाना ही बढ़ पाया.

पिछले दस वर्षों में फल फसलों का रकबा करीब 17 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है, सब्जियों का क्षेत्र लगभग 23 प्रतिशत बढ़ा है और कुल बागवानी क्षेत्र में 26 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है. इसके मुकाबले अनाज फसलों का रकबा सिर्फ करीब 10 प्रतिशत ही बढ़ सका. यही आंकड़े बताते हैं कि किसान अब ज्यादा मुनाफे वाली खेती को प्राथमिकता देने लगे हैं.

हाल के वर्षों में और तेज हुई रफ्तार

बीते पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह बदलाव और मजबूत दिखाई देता है. वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच सब्जियों के क्षेत्र में सालाना औसतन 2.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि फलों का क्षेत्र भी 1 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ा. कुल मिलाकर बागवानी फसलों का क्षेत्र इस अवधि में सालाना 2.17 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि अनाज फसलों का रकबा लगभग 1.57 प्रतिशत की दर से ही आगे बढ़ पाया.

यह संकेत साफ हैं कि किसानों की खेती की प्राथमिकताएं बदल रही हैं और वे जोखिम के बावजूद बेहतर आमदनी वाली फसलों को अपनाने के लिए तैयार हैं.

ज्यादा आमदनी, यही सबसे बड़ी वजह

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बागवानी फसलों से मिलने वाली बेहतर कमाई है. कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार, पिछले करीब एक दशक में अनाज फसलों के उत्पादन मूल्य में सालाना औसतन 2.36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि फलों के उत्पादन मूल्य में यह वृद्धि 3.68 प्रतिशत और सब्जियों में करीब 2.77 प्रतिशत रही. यानी साफ है कि फल-सब्जियों से किसान को अनाज की तुलना में ज्यादा मूल्य प्राप्त हो रहा है.

इसी दौरान चारा और घास जैसी फसलों के उत्पादन मूल्य में सबसे तेज, करीब 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई. इसका सीधा संबंध पशुपालन क्षेत्र के विस्तार से भी जुड़ता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी से मजबूत हो रहा है.

बदलती थाली, बदलती खेती

खेती में यह बदलाव सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लोगों की थाली से भी है. जैसे-जैसे लोगों की आमदनी बढ़ी है, वैसे-वैसे खान-पान की आदतों में भी बदलाव आया है. अब लोग सिर्फ अनाज पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि फल, सब्जियां, दूध, अंडा, मांस और प्रोसेस्ड फूड की मांग लगातार बढ़ रही है.

नीति आयोग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में सभी आय वर्गों में भोजन की पसंद बदल रही है. दालों, फल-सब्जियों और पशु-आधारित खाद्य पदार्थों की मांग अनाज की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि किसान भी बाजार की इस बदलती मांग के अनुसार अपनी खेती को ढाल रहे हैं.

भविष्य में और बढ़ेगी फल-सब्जियों की मांग

अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2047-48 तक देश में सब्जियों की मांग 365 मिलियन टन तक पहुंच सकती है, जबकि फलों की मांग 233 मिलियन टन तक जाने की संभावना है. अगर देश की आर्थिक वृद्धि और तेज होती है, तो यह मांग और भी ज्यादा हो सकती है. मौजूदा समय में भारत में फलों का उत्पादन करीब 115 मिलियन टन और सब्जियों का उत्पादन लगभग 220 मिलियन टन के आसपास आंका गया है, यानी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने की बड़ी गुंजाइश मौजूद है.

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