भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों ने बिगुल फूंका, AI प्रोजेक्ट में 7 हजार एकड़ जमीन नहीं देने का ऐलान

Karnataka Farmers protest against land acquisition: किसान संगठन कर्नाटक राज्य रैयत संघ के नेतृत्व में किसानों और ग्रामीणों ने 22 जून को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ इस विरोध प्रदर्शन का बीजेपी ने समर्थन करने की बात कही है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 14 Jun, 2026 | 01:50 PM

कर्नाटक जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर किसानों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है. ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) प्रोजेक्ट के लिए लगभग 500 एकड़ भूमि के अधिग्रहण से संबंधित अधिसूचना जारी किए जाने पर किसानों ने कड़ा विरोध जताया है. किसानों के संगठन कर्नाटक राज्य रैयत संघ ने कहा है कि किसानों से मनमाने तरीके से उनकी उपजाऊ जमीन सरकार जबरदस्ती ले रही है. ऐसा वह नहीं होने देंगे और इसके लिए सड़क पर उतरकर उनका संगठन लड़ाई लड़ेगा. कहा कि कई अन्य किसान संगठनों ने भी उनके आंदोलन के ऐलान का समर्थन किया है. वहीं, कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने कहा कि वह किसानों के साथ हैं और राज्य सरकार को यह अन्याय नहीं करने देंगे. इससे प्रोजेक्ट को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है.

कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी के पास प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना के लिए लगभग 500 एकड़ भूमि के अधिग्रहण से संबंधित अंतिम अधिसूचना जारी कर दी है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जीबीआईटी परियोजना के लिए रामनगर और हरोहल्ली तालुकों के तीन गांवों में स्थित 499 एकड़ भूमि के अधिग्रहण किया जाना है.

7 हजार एकड़ में एआई टाउनशिप बनाई जा रही

यह परियोजना मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों में से एक है और इसे भारत की पहली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित एकीकृत टाउनशिप के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है. परियोजना के लिए क्षेत्र के नौ गांवों में लगभग 7,481 एकड़ भूमि की जरूरत है. इस जमीन के लिए अधिग्रहण की शुरूआत की जा रही है. लेकिन, किसान उपजाऊ जमीन, कम मुआवजा और जबरदस्ती उनकी भूमि हथियाने का आरोप सरकार पर लगा रहे हैं.

राज्य रैयत संघ का 22 जून को आंदोलन का ऐलान

कर्नाटक में बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी के पास प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना के लिए लगभग 500 एकड़ भूमि के अधिग्रहण से संबंधित अंतिम अधिसूचना जारी किए जाने का कड़ा विरोध किया है. किसान संगठन कर्नाटक राज्य रैयत संघ के नेतृत्व में किसानों और ग्रामीणों ने 22 जून को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है. यह विरोध प्रदर्शन स्थानीय इलाकों के साथ ही पूरे बेंगलुरू में किए जाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है.

कई किसान संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया

यह विरोध प्रदर्शन में स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और कर्नाटक राज्य रैयत संघ समेत किसान संगठनों की ओर से आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य जीबीआईटी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के प्रति विरोध दर्ज कराना है. किसान नेताओं ने कहा कि कई अन्य किसान संगठनों ने भी उनकी लड़ाई का समर्थन किया है और आंदोलन में शामिल होने के लिए सहमति दी है.

सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ने का फैसला

जमीन अधिग्रहण को लेकर कर्नाटक राज्य रैयत संघ किसान नेताओं और विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की शनिवार को हुई बैठक में किसानों के हितों के लिए सड़क पर लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया गया है. किसान नेताओं ने पीटीआई से कहा कि सरकार के फैसले का विरोध करने तथा परियोजना का विरोध कर रहे किसानों और ग्रामीणों का समर्थन करने का निर्णय लिया गया.

किसानों के पक्ष का समर्थन करेगी बीजेपी

कर्नाटक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने कहा कि देश का कानून बिल्कुल साफ है. अगर कोई राज्य सरकार खेती की जमीन लेना चाहती है, तो कम से कम 80 फीसदी किसानों की सहमति जरूरी है. लेकिन यहां मुझे बताया गया है कि इस इलाके के लगभग 100 फीसदी किसान इस प्रोजेक्ट के खिलाफ हैं. इसलिए राज्य सरकार जबरदस्ती जमीन नहीं ले सकती. मुख्यमंत्री को इस नियम के बारे में पता होने के बावजूद, वे किसानों को अपनी जमीन देने के लिए मजबूर क्यों कर रहे हैं? भारतीय जनता पार्टी का इस मुद्दे पर रुख़ बिल्कुल साफ है. हमारी बीजेपी किसानों के पक्ष का समर्थन करेगी.

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Published: 14 Jun, 2026 | 01:50 PM

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