पंजाब सरकार ने ड्राफ्ट सीड्स बिल 2025 पर जताई आपत्ति, कहा- इससे सीमांत किसानों को होगा नुकसान

पंजाब सरकार ने ड्राफ्ट सीड्स बिल 2025 का विरोध करते हुए इसे किसान विरोधी बताया है. सरकार और किसान संगठनों का कहना है कि यह बिल कृषि कंपनियों को बढ़ावा देता है, राज्यों के अधिकार कमजोर करता है और छोटे किसानों को नुकसान पहुंचा सकता है.

नोएडा | Updated On: 31 Jan, 2026 | 12:04 PM

Punjab News: पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के ड्राफ्ट सीड्स बिल 2025 पर आपत्ति जताई है. राज्य सरकार का कहना है कि यह बिल छोटे और सीमांत किसानों के हितों को नजरअंदाज करता है और कृषि कंपनियों को फायदा पहुंचाता है. सरकार के अनुसार, अगर यह बिल लागू हुआ तो किसानों में असंतोष फैल सकता है, क्योंकि पंजाब के ज्यादातर किसान छोटी जोत वाले हैं. बिल से बीज कारोबार का नियंत्रण केंद्र के हाथ में चला जाएगा, जिससे राज्यों के मौजूदा नियामक अधिकार कमजोर होंगे.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि बिल की गहन जांच और चर्चा के बाद इसे खारिज किया गया है. उनका कहना है कि इसमें फसल खराब होने पर किसानों को मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि विदेशों में किए गए बीज परीक्षणों  को मान्यता देने की बात कही गई है. इससे भारत में ज्यादा जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) बीज आने का खतरा बढ़ सकता है और किसान बड़ी बीज कंपनियों पर निर्भर हो जाएंगे.

स्टेट सीड कमेटी के पास सिर्फ सलाह देने का अधिकार होगा

राज्य सरकार ने कहा है कि बिल में प्रस्तावित जोन-आधारित व्यवस्था से सेंट्रल सीड कमेटी में राज्य का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं होता, जबकि मौजूदा व्यवस्था में यह अधिकार मिलता है. इससे बीज क्षेत्र से जुड़े अहम फैसलों में राज्य की भूमिका सीमित हो जाएगी. कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित बिल में केंद्र स्तर पर केवल एक रजिस्ट्रेशन सब-कमेटी रखी गई है, जबकि धारा 10 के तहत बनने वाली स्टेट सीड कमेटी  के पास सिर्फ सलाह देने का अधिकार होगा. इसके अलावा, बिल में ऐसे किसानों के लिए मजबूत मुआवजा व्यवस्था का कोई जिक्र नहीं है, जिन्हें पंजीकृत बीज खराब निकलने पर नुकसान उठाना पड़ता है.

बिक्री रोकने के लिए भी कुछ सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं

साथ ही, विदेशों में परीक्षण और जारी किए गए बीजों को बिना राज्य की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में अनिवार्य परीक्षण के ही पंजाब और अन्य राज्यों में बेचने की अनुमति दी जा रही है. यह प्रस्तावित कानून सीड्स एक्ट 1966 और सीड्स कंट्रोल ऑर्डर 1983 की जगह लेने के लिए लाया गया है. केंद्र सरकार ने इसे नवंबर 2025 में जनता की राय के लिए जारी किया था. ड्राफ्ट बिल में सभी किस्मों के बीजों का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है, जबकि अभी केवल अधिसूचित किस्मों का ही पंजीकरण होता है. साथ ही, इसमें नकली बीजों की बिक्री रोकने के लिए भी कुछ सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं.

बड़ी बीज कंपनियों का बाजार पर एकाधिकार हो जाएगा

प्रस्तावित बिल के तहत किसानों को अपने खेत में बचाए गए बीजों को सहेजने, इस्तेमाल करने और बेचने का अधिकार दिया गया है, बशर्ते वे उन्हें किसी नए ब्रांड नाम से न बेचें. लेकिन किसान संगठनों के नेताओं को आशंका है कि चूंकि यह ड्राफ्ट बिल बीज निर्माण  में बड़ी कृषि कंपनियों के पक्ष में है, इसलिए भविष्य में किसानों को बीज दोबारा इस्तेमाल करने का यह अधिकार भी खत्म किया जा सकता है. बीकेयू (डाकौंदा) के महासचिव और संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि कई देशों के अनुभव बताते हैं कि जब बड़ी बीज कंपनियों का बाजार पर एकाधिकार हो जाता है, तो किसानों को हर फसल सीजन में नए बीज खरीदने पड़ते हैं और वे अपने बीज दोबारा इस्तेमाल नहीं कर पाते. उन्होंने कहा कि यह छोटे और सीमांत किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे देशी बीज भी खत्म हो जाएंगे. उन्होंने साफ कहा कि किसान संगठन इस बिल का पूरी ताकत से विरोध करेंगे.

Published: 31 Jan, 2026 | 12:01 PM

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