खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन हुआ तेज! कमीज उतारकर PM मोदी को भेजेंगे किसान, 20 अगस्त को देशभर में शक्ति प्रदर्शन

खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन तीसरे दिन और तेज हो गया है. आज किसान बैरिकेड तक पैदल मार्च करेंगे और प्रतीकात्मक रूप से अपनी कमीजें उतारकर विरोध दर्ज कराएंगे. एमएसपी, कर्ज माफी और भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है.

नोएडा | Published: 19 Aug, 2026 | 12:25 PM

Khanauri Border Farmers Protest: पंजाब-हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया. धरने के तीसरे दिन किसान संगठनों ने हरियाणा की ओर लगाए गए बैरिकेड तक मार्च करने का ऐलान किया है. किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के अनुसार, आज यानी 19 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान किसान प्रतीकात्मक रूप से अपनी कमीजें उतारकर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजेंगे. किसान नेताओं का कहना है कि यह विरोध सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने और शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाने के अधिकार की मांग का प्रतीक होगा. 20 अगस्त को देशभर के जिला मुख्यालयों पर किसान रैलियां भी आयोजित की जाएंगी, जिनमें केंद्र सरकार की कृषि नीतियों और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन होगा.

बैरिकेड तक मार्च, प्रतीकात्मक विरोध की तैयारी

किसान नेताओं ने घोषणा की है कि प्रदर्शनकारी खनौरी बॉर्डर  से हरियाणा सीमा पर बने बैरिकेड तक पैदल मार्च करेंगे. वहां पहुंचकर वे केंद्र और हरियाणा सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे. किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के अनुसार, प्रदर्शन का सबसे चर्चित हिस्सा किसानों द्वारा अपनी कमीजें उतारकर उन्हें प्रधानमंत्री के नाम भेजना होगा. नेताओं का कहना है कि यह कदम किसानों की पीड़ा और सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचाने का प्रतीकात्मक माध्यम है, न कि किसी प्रकार का उग्र विरोध.

दिल्ली मार्च क्यों रुका?

16 अगस्त को किसानों ने “किसान बचाओ पदयात्रा” के तहत दिल्ली की ओर पैदल बढ़ने की कोशिश की थी. हालांकि हरियाणा प्रशासन ने पहले जत्थे को सीमा पर रोक दिया और कई स्तर की बैरिकेडिंग कर दी. इसके बाद किसान पंजाब की ओर ही धरने पर बैठ गए. किसान संगठनों  का आरोप है कि वे केवल पैदल और शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दे रहा. दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है.

इन मांगों को लेकर आंदोलन तेज

किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते  से कृषि क्षेत्र को बाहर रखना, सभी फसलों पर कानूनी एमएसपी गारंटी लागू करना, किसानों का कर्ज माफ करना और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना शामिल है. किसान नेताओं का कहना है कि यदि कृषि क्षेत्र को व्यापार समझौते में शामिल किया गया तो इसका असर देश के किसानों और कृषि बाजार पर पड़ सकता है. इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन लगातार तेज किया जा रहा है.

बातचीत बेनतीजा, अब जिला स्तर पर रैलियां

किसान प्रतिनिधियों  और हरियाणा सरकार के अधिकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद किसान संगठनों ने अपना धरना जारी रखने का फैसला लिया. किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के अनुसार, अब 20 अगस्त को देशभर के जिला मुख्यालयों पर किसान रैलियां निकाली जाएंगी. वहीं, प्रस्तावित पदयात्रा का उद्देश्य 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर किसान पंचायत आयोजित करना बताया गया है. फिलहाल खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.

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