कावेरी के पानी पर फिर छिड़ी जंग! मेकेदातु परियोजना पर आमने-सामने आए तमिलनाडु और कर्नाटक

Mekedatu Dam: मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर कावेरी जल विवाद फिर तेज हो गया है. तमिलनाडु की माकपा ने केंद्रीय मंत्री के उस बयान का विरोध किया है, जिसमें कहा गया था कि कर्नाटक को मेकेदातु परियोजना के लिए निचले राज्यों की सहमति की जरूरत नहीं है.

नोएडा | Published: 29 Jul, 2026 | 05:21 PM

Kaveri Water Dispute: कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है. इस बार विवाद की वजह मेकेदातु बांध परियोजना और कावेरी का पानी छोड़ने से जुड़ा मामला है. एक ओर तमिलनाडु में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केंद्र सरकार के एक मंत्री के बयान का विरोध करते हुए प्रदर्शन का ऐलान किया है, तो दूसरी ओर कर्नाटक सरकार ने तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ने के निर्देश के खिलाफ अपील करने का फैसला लिया है. दोनों राज्यों के अलग-अलग रुख के कारण कावेरी जल विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

केंद्रीय मंत्री के बयान पर माकपा ने जताई नाराजगी

तमिलनाडु की माकपा ने उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में कहा था कि, कर्नाटक को मेकेदातु परियोजना के लिए निचले राज्यों की सहमति लेने की जरूरत नहीं है. माकपा का कहना है कि यह बयान तमिलनाडु के किसानों और राज्य के हितों के खिलाफ है. पार्टी ने केंद्र सरकार से इस बयान को तुरंत वापस लेने की मांग की है.

2 अगस्त को होगा विरोध प्रदर्शन

माकपा ने इस मुद्दे पर 2 अगस्त को कावेरी डेल्टा के कई जिलों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है. पार्टी के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने कहा कि इस बयान से तमिलनाडु के किसानों और आम लोगों में चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि अंतरराज्यीय नदियों के मामलों में कोई भी ऊपरी राज्य अकेले फैसला नहीं ले सकता और सभी प्रभावित राज्यों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है.

किसानों के हितों का उठाया मुद्दा

माकपा का आरोप है कि कर्नाटक लंबे समय से तमिलनाडु को तय मात्रा में कावेरी का पानी नहीं छोड़ रहा है. पार्टी का कहना है कि अगर मेकेदातु बांध बनता है तो तमिलनाडु के हिस्से का पानी और कम हो सकता है. पार्टी के अनुसार, इसका सबसे ज्यादा असर कावेरी डेल्टा के किसानों पर पड़ेगा. सिंचाई के लिए पानी की कमी हो सकती है और कई इलाकों में पेयजल संकट भी गहरा सकता है. माकपा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह निचले राज्यों के अधिकारों की रक्षा करे और इस मामले में सभी पक्षों को साथ लेकर फैसला करे.

कर्नाटक सरकार भी करेगी अपील

वहीं दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार ने भी अपना रुख साफ कर दिया है. राज्य के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि सरकार कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के उस आदेश के खिलाफ अपील करेगी, जिसमें तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य फिलहाल ऐसी स्थिति में नहीं है कि वह अतिरिक्त पानी छोड़ सके. इसलिए सरकार अब कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के सामने अपनी अपील पेश करेगी.

क्यों अहम है मेकेदातु परियोजना?

मेकेदातु परियोजना कर्नाटक की प्रस्तावित बांध परियोजना है, जिसका उद्देश्य पेयजल और जल भंडारण क्षमता बढ़ाना बताया जाता है. लेकिन तमिलनाडु का मानना है कि अगर इस परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो कावेरी नदी के पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और राज्य को उसके हिस्से का पानी मिलने में दिक्कत आ सकती है. इसी वजह से यह परियोजना लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच विवाद का कारण बनी हुई है.

आगे क्या होगा?

अब एक तरफ तमिलनाडु में इस मुद्दे पर राजनीतिक विरोध तेज हो रहा है, जबकि दूसरी तरफ कर्नाटक कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी कर रहा है. ऐसे में कावेरी जल विवाद का अगला चरण कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और आगे चलकर अदालतों में भी पहुंच सकता है. फिलहाल दोनों राज्यों के अलग-अलग रुख ने यह साफ कर दिया है कि मेकेदातु परियोजना और कावेरी जल बंटवारे का विवाद अभी खत्म होने वाला नहीं है.

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