महिला किसानों को मिला नया मंच, कर्नाटक में शुरू हुआ खास एग्रो-प्रोसेसिंग सेंटर.. बढ़ेगी आय
Yadgir Agro Processing Center: कर्नाटक के यादगीर जिले में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महिलाओं द्वारा संचालित एक एग्रो-प्रोसेसिंग सेंटर का उद्घाटन किया. इस केंद्र में मूंगफली से पीनट बटर, तेल और अन्य उत्पाद बनाए जाएंगे, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा. साथ ही ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर बनने का मौका भी मिलेगा.
Agro Processing Center Karnataka: किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है. इसी दिशा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर्नाटक के यादगीर जिले के बद्देपल्ली गांव में महिला-नेतृत्व वाले एग्रो-प्रोसेसिंग सेंटर और किसान प्रशिक्षण एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर (FT-CFC) का उद्घाटन किया. इस पहल को कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
यह केंद्र न केवल किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करेगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने का भी काम करेगा.
किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार
उद्घाटन समारोह के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने NABARD से इस केंद्र को ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की अपील की. उनका मानना है कि यदि किसानों के उत्पाद सीधे ऑनलाइन बाजारों तक पहुंचेंगे, तो उन्हें अधिक ग्राहक और बेहतर कीमत मिल सकेगी. उन्होंने जिला प्रशासन से भी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग देने का आग्रह किया. इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच सकेंगे और किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी.
ಕರ್ನಾಟಕದ ಯಾದಗಿರಿ ಜಿಲ್ಲೆಯ ಬಾಡೇಪಲ್ಲಿ ಗ್ರಾಮದಲ್ಲಿ ಶ್ರೀಮತಿ ನಿರ್ಮಲಾ ಸೀತಾರಾಮನ್ ಅವರು ‘ರೈತರ ತರಬೇತಿ ಮತ್ತು ಸಾಮಾನ್ಯ ಸೌಲಭ್ಯ ಕೇಂದ್ರ’ವನ್ನು ಉದ್ಘಾಟಿಸಿದರು.
ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಹಣಕಾಸು ಸಚಿವರು ನಬಾರ್ಡ್ (NABARD) ಸಹಯೋಗದೊಂದಿಗೆ ಸಂಸದರ ಸ್ಥಳೀಯ ಪ್ರದೇಶಾಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆ (MPLAD) ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಧನಸಹಾಯ ನೀಡಿದ ಯಾದಗಿರಿಯ ಈ ರೈತರ… pic.twitter.com/hexlUCDeBM
— Nirmala Sitharaman Office (@nsitharamanoffc) June 4, 2026
महिलाओं द्वारा संचालित है पूरा केंद्र
द न्यू इंडयिन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसका संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथों में है. बद्देपल्ली महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड (FPO) इस केंद्र का संचालन करेगी, जिसमें 727 महिला सदस्य जुड़ी हुई हैं. यह कर्नाटक के इस क्षेत्र का पहला महिला-नेतृत्व वाला एग्रो-प्रोसेसिंग सेंटर माना जा रहा है. इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिलेगा और वे कृषि से जुड़े व्यवसाय में अहम भूमिका निभा सकेंगी.
फसल के नुकसान को कम करने पर जोर
किसानों को अक्सर फसल कटने के बाद कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सही भंडारण और प्रोसेसिंग की सुविधा न होने के कारण कई बार उपज खराब हो जाती है, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. इसी समस्या को कम करने के लिए NABARD ने MPLAD फंड की मदद से इस केंद्र की स्थापना की है. इस केंद्र में फसलों की प्रोसेसिंग, पैकिंग और उनसे ज्यादा मूल्य वाले उत्पाद तैयार करने की सुविधा मिलेगी. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने में मदद होगी और उनकी आमदनी बढ़ाने का रास्ता भी खुलेगा.
मूंगफली से तैयार होंगे कई उत्पाद
यादगीर जिला खेती-किसानी पर काफी हद तक निर्भर है. यहां करीब 75 फीसदी जमीन पर खेती होती है और हर साल लगभग 22,500 मीट्रिक टन मूंगफली का उत्पादन होता है. नए एग्रो-प्रोसेसिंग सेंटर में मूंगफली से कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाएंगे. इनमें भुनी हुई मूंगफली, नमकीन मूंगफली, पीनट बटर, मूंगफली का तेल और अन्य उत्पाद शामिल हैं. कच्ची मूंगफली बेचने की बजाय उससे बने उत्पाद बेचने पर ज्यादा कीमत मिलती है. इससे किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलने के साथ-साथ उनकी कमाई बढ़ने की भी उम्मीद है.
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ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का नया अवसर
वित्त मंत्री ने इस दौरान कहा कि, यह परियोजना सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी मदद करेगी. इस केंद्र के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा और रोजगार के नए मौके भी मिलेंगे. साथ ही, उन्हें खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), पैकिंग और उत्पादों की बिक्री से जुड़ी नई जानकारी और तकनीकें सीखने का मौका मिलेगा. इससे महिलाएं अपना छोटा कारोबार शुरू कर सकेंगी और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ पाएंगी.
ग्रामीण विकास का नया मॉडल बन सकता है यह केंद्र
महिलाओं की अगुवाई में शुरू किया गया यह एग्रो-प्रोसेसिंग सेंटर आने वाले समय में दूसरे राज्यों के लिए भी एक अच्छा उदाहरण बन सकता है. अगर ऐसी परियोजनाएं देश के अन्य कृषि क्षेत्रों में भी शुरू की जाएं, तो किसानों की आमदनी बढ़ाने और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में काफी मदद मिल सकती है. यह पहल खेती, महिला रोजगार और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़ने का काम कर रही है. इसी वजह से इसे एक सफल और प्रेरणादायक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है.