UP kharif production target: उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ा लक्ष्य तय किया है. राज्य सरकार का उद्देश्य वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को टिकाऊ, आधुनिक और निर्यात आधारित कृषि का वैश्विक केंद्र बनाना है. इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए वर्ष 2026-27 के खरीफ सीजन के लिए 30.25 मिलियन टन खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. यह लक्ष्य पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत अधिक है और राज्य की कृषि क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की योजना का हिस्सा माना जा रहा है.
खरीफ सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन की तैयारी
पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में खरीफ खाद्यान्न और तिलहन का कुल उत्पादन 25.62 मिलियन टन रहा था. अब सरकार इसे बढ़ाकर 30.25 मिलियन टन तक ले जाना चाहती है. इसके लिए खेती का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
कृषि विभाग के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए खरीफ फसलों का रकबा बढ़ाकर 11 मिलियन हेक्टेयर से अधिक करने की योजना बनाई गई है. राज्य सरकार का मानना है कि अधिक क्षेत्र में खेती और बेहतर तकनीक के उपयोग से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है.
आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर देश की जरूरतें पूरी कर रहा यूपी
कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश को खाद्यान्न के लिए दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज राज्य न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी कृषि उत्पादों की आपूर्ति कर रहा है. उन्होंने किसानों से मक्का, दलहन और तिलहन जैसी नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ाने की अपील की. उनका कहना है कि बदलते समय में किसानों को नई तकनीकों, बेहतर बीजों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाना होगा ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके.
2047 के लिए तैयार हो रहा कृषि विकास का ब्लूप्रिंट
योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति तैयार की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में वृद्धि करना, जैविक खेती का विस्तार करना और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना है. सरकार का मानना है कि कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और निर्यात से भी जोड़ना होगा. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
कई फसलों के उत्पादन में देश में नंबर वन है यूपी
उत्तर प्रदेश पहले से ही कई कृषि उत्पादों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है. खाद्यान्न, गेहूं, आलू, गन्ना, सब्जियों और शहद के उत्पादन में राज्य देश में पहला स्थान रखता है. इसके अलावा कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के मामले में भी उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 4.66 लाख करोड़ रुपये है.
साल 2017 से 2025 के बीच राज्य के कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है. इस दौरान तिलहन उत्पादन में 34 प्रतिशत और दलहन उत्पादन में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वहीं खाद्यान्न और गेहूं उत्पादन में क्रमशः 17 प्रतिशत और 16 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला.
आधुनिक खेती और बीमा योजनाओं पर फोकस
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में किसानों तक उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को भी किसानों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में मजबूत बनाया जा रहा है ताकि मौसम संबंधी जोखिमों से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके.
हाल ही में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मूंगफली, तिल, अरहर और मक्का की उन्नत किस्मों, रोग प्रबंधन, आधुनिक मशीनों और प्रसंस्करण तकनीकों की जानकारी दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने के साथ ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर
राज्य सरकार संतुलित उर्वरक उपयोग, सीधी धान बुवाई, तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ाने तथा गो-आधारित प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दे रही है. इन प्रयासों का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है.