नॉर्थ-ईस्ट में मछली पालन की बड़ी क्रांति, ललन सिंह ने शुरू किए 32 करोड़ से ज्यादा के विकास प्रोजेक्ट

केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में मछली पालन को मजबूत बनाने के लिए कई नई परियोजनाएं शुरू की हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, रोजगार के अवसर तैयार करना और किसानों की आय में सुधार करना है. सरकार आधुनिक तकनीकों, बेहतर बाजार व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के जरिए मछली पालन क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है.

नोएडा | Published: 25 May, 2026 | 03:57 PM

Fisheries Development: पूर्वोत्तर भारत में मछली पालन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (Rajiv Ranjan Singh) उर्फ ललन सिंह ने मिजोरम की राजधानी आइजोल में करीब 32.15 करोड़ रुपये की कई बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष के तहत शुरू की गई हैं. सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से पूर्वोत्तर राज्यों में मछली उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और क्षेत्र आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा.

आइजोल में हुई बड़ी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक

मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय  की ओर से आयोजित क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र 2026 में कई अहम फैसले लिए गए. इस बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए. कार्यक्रम का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया, जिसमें अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हिस्सा लिया. बैठक में मछली पालन क्षेत्र को आधुनिक बनाने, नई तकनीकों को बढ़ावा देने और बाजार से बेहतर जुड़ाव बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई.

लाभार्थियों को मिले प्रमाण पत्र और सम्मान

केंद्रीय मंत्री ने मछली पालन से जुड़े लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए. इसमें मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड, सफल स्टार्टअप और बेहतरीन मत्स्य सहकारी समितियों को सम्मानित किया गया. सरकार का मानना है कि इससे युवाओं और किसानों का मछली पालन की ओर रुझान बढ़ेगा. कार्यक्रम में मौजूद लाभार्थियों ने भी सरकार की योजनाओं को क्षेत्र के लिए फायदेमंद बताया. केंद्रीय मंत्री ने लाभार्थियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझने की कोशिश की.

उत्पादन बढ़ाने और निर्यात पर रहेगा जोर

भारत में मछली उत्पादन  बढ़ाने और निर्यात को मजबूत करने पर खास फोकस किया गया. अधिकारियों ने बताया कि कई राज्यों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं और बाजार व्यवस्था की कमी है, जिसे नई योजनाओं के जरिए सुधारने की कोशिश की जाएगी. सरकार मूल्य श्रृंखला की कमियों को दूर करने, कोल्ड स्टोरेज और परिवहन सुविधाएं बेहतर बनाने तथा किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर काम करेगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार होगा.

नॉर्थ-ईस्ट को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी

सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर राज्यों को मछली उत्पादन  के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है. इसी दिशा में नई परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है. बैठक में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अपने-अपने राज्यों की जरूरतों और योजनाओं पर चर्चा की. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत देश के बड़े मत्स्य उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है.

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