प्याज ने निकाला पसीना! 60 रुपये किलो के पार भाव, अब चावल-तेल भी देने लगे महंगाई का झटका

रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ने लगा है. प्याज की कीमत पिछले साल से 90 प्रतिशत बढ़ चुकी है और दिल्ली-एनसीआर में भाव 60 रुपये किलो पार है. चावल और सरसों तेल भी महंगे हुए हैं. अक्टूबर तक प्याज की कीमतों में राहत मुश्किल बताई जा रही है.

नोएडा | Updated On: 11 Sep, 2026 | 08:09 PM

Onion Price: खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है. प्याज के दाम में सबसे तेज उछाल देखने को मिला है और दिल्ली-एनसीआर में इसका भाव 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीनी, सरसों तेल और प्याज पिछले साल की तुलना में महंगे हुए हैं. घरेलू उत्पादन में कमी और वैश्विक कीमतों में तेजी को इसकी प्रमुख वजह बताया जा रहा है. आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और बढ़ने की आशंका है.

प्याज की कीमतों ने बढ़ाई सबसे ज्यादा चिंता

बुधवार को प्याज का औसत खुदरा भाव 52.66 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 90 प्रतिशत अधिक है. पिछले एक महीने में ही प्याज की कीमत  50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी है. दिल्ली-एनसीआर में इसका भाव 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है. व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, देश में प्याज के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में बुवाई कम होने और मानसून में देरी के कारण खरीफ प्याज की फसल में 5 से 7 प्रतिशत की कमी आई है. बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार अपने बफर स्टॉक से 35 रुपये प्रति किलो के रियायती भाव पर प्याज बेच रही है. हालांकि, सूत्रों का अनुमान है कि नई फसल आने तक यानी अक्टूबर के अंत तक प्याज के भाव ऊंचे रह सकते हैं.

चावल और सरसों तेल भी महंगाई की जद में

प्याज के अलावा चावल और सरसों तेल के दाम  में भी बढ़ोतरी हुई है. बुधवार को चावल का खुदरा भाव 46.23 रुपये प्रति किलो और सरसों तेल का भाव 202.14 रुपये प्रति किलो रहा. दोनों की कीमतें पिछले साल की तुलना में करीब 7 प्रतिशत ज्यादा हैं. सरकारी अधिकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर तक सरकार को 10.25 मिलियन टन चावल का स्टॉक चाहिए, जबकि फिलहाल उसके पास करीब 40 मिलियन टन चावल मौजूद है. कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त चावल को ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत बाजार में उतारा जाएगा.

आलू, टमाटर और चना दाल ने दी राहत

जहां कुछ खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, वहीं आलू, टमाटर  और चना दाल ने उपभोक्ताओं को राहत दी है. भारी उत्पादन के कारण आलू की कीमत पिछले साल की तुलना में 9.5 प्रतिशत घटकर 22.74 रुपये प्रति किलो रह गई है. टमाटर का भाव भी 12 प्रतिशत गिरकर 39.07 रुपये प्रति किलो हो गया है. चना दाल की कीमत भी मामूली गिरावट के साथ 87.72 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई. अधिकारियों के मुताबिक, आयात और नेफेड (NAFED) तथा एनसीसीएफ (NCCF) जैसी सरकारी एजेंसियों के पास करीब 2 मिलियन टन का अच्छा स्टॉक मौजूद है, जिससे कीमतों पर दबाव कम हुआ है.

गेहूं का स्टॉक भरपूर, निर्यात पर भी छूट

गेहूं की कीमत  में भी मामूली गिरावट आई है और इसका खुदरा भाव 31.71 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. व्यापारियों के मुताबिक, राशन व्यवस्था यानी PDS और जरूरी स्टॉक की जरूरत पूरी करने के बाद भी सरकार के पास 20 मिलियन टन से अधिक गेहूं अतिरिक्त है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास फिलहाल 47.78 मिलियन टन गेहूं का स्टॉक है, जबकि 1 अक्टूबर के लिए 20.52 मिलियन टन की जरूरत होती है. जुलाई 2026 में गेहूं की खुदरा महंगाई दर सिर्फ 0.26 प्रतिशत रही. पर्याप्त स्टॉक को देखते हुए पिछले महीने गेहूं और इससे बने उत्पादों के निर्यात पर लगी सभी शर्तें हटा दी गईं और इसे तत्काल प्रभाव से मुक्त निर्यात की श्रेणी में डाल दिया गया है.

Published: 11 Sep, 2026 | 08:22 PM

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