पेट्रोल निर्यात महंगा, सरकार ने बढ़ाई स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी.. इन देशों को सीधा फायदा

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर शुल्क घटाया गया है. सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. वहीं, मॉरीशस और मालदीव को भी निर्यात शुल्क छूट वाले देशों की सूची में शामिल किया गया है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 1 Jul, 2026 | 01:39 PM

Petrol Export: केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से लागू होने वाले नए संशोधन में पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल गेन टैक्स (स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी – SAED) को बढ़ा दिया है. जबकि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स में कटौती की गई है. वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल निर्यात पर SAED घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 14 रुपये प्रति लीटर था. वहीं, एटीएफ पर यह टैक्स 12.5 रुपये से घटाकर 7.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. दूसरी ओर, पेट्रोल निर्यात पर टैक्स बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 1.5 रुपये प्रति लीटर था. नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं.

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाया था और इसकी दरों की हर पखवाड़े समीक्षा की जा रही थी. बाद में 16 मई से पेट्रोल निर्यात  पर भी शुल्क लागू किया गया था. अब सरकार ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इन दरों में संशोधन किया है. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSU) द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (ATF) निर्यात पर पहले से दी गई शुल्क छूट को अब मॉरीशस और मालदीव तक भी बढ़ा दिया गया है. यानी इन देशों को होने वाले निर्यात पर विंडफॉल टैक्स नहीं लगेगा.

डीजल पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है. नई व्यवस्था केवल निर्यात पर लागू होगी. सरकार ने पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों  की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह विंडफॉल टैक्स लगाया था. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों का फायदा उठाकर अत्यधिक निर्यात न करें और देश के भीतर ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे. इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है.

विंडफॉल टैक्स क्या होता है?

विंडफॉल टैक्स एक अतिरिक्त कर (टैक्स) है, जिसे सरकार उन कंपनियों या उद्योगों पर लगाती है जिन्हें किसी बाहरी कारण से अचानक और असामान्य रूप से ज्यादा मुनाफा होने लगता है. यह मुनाफा कंपनी की अपनी कारोबारी रणनीति या निवेश के कारण नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाओं की वजह से होता है. उदाहरण के लिए, युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव या कच्चे तेल जैसी वस्तुओं की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से तेल और गैस कंपनियों को बड़ा फायदा हो सकता है. ऐसे अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा सरकार टैक्स के रूप में वसूलने के लिए विंडफॉल टैक्स लगाती है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि वैश्विक परिस्थितियों से होने वाले अप्रत्याशित लाभ का कुछ हिस्सा सरकार के पास भी पहुंचे और उसका उपयोग जनहित के कार्यों में किया जा सके.

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Published: 1 Jul, 2026 | 01:25 PM

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