जुलाई में जून से भी कम बारिश के अलर्ट से सूखे की आहट, कृषि वैज्ञानिकों ने इसे खेती पर खतरा बताया

कृषि वैज्ञानिक डॉ. मयंक कुमार राय ने बताया कि मौसम की स्थितियां खेती के विपरीत बनती दिख रही हैं. किसानों को जलवायु अनुकूल फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है. अल नीनो के चलते सूखे की आहट पर उन्होंने कहा कि किसानों को धान की बजाय कम पानी वाली फसलों की खेती करने की जरूरत है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 1 Jul, 2026 | 01:07 PM

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने जुलाई में कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. जबकि, बीता जून महीने पहले से ही कम बारिश के साथ गुजरा है. कम बारिश की वजह प्रशांत महासागर की सतह में गर्मी बढ़ने के असर से अल नीनो के और प्रभावी होने को बताया जा रहा है. वहीं, जुलाई में कम बारिश के अलर्ट ने साफ तौर पर सूखे की सांकेतिक पुष्टि कर दी है. यह स्थिति सबसे ज्यादा खेती-किसानी के लिए खतरे की घंटी साबित होने वाली है. कृषि वैज्ञानिकों ने मौसम की स्थितियों को कृषि के लिए जटिल बनने की चेतावनी दी है.

100 सालों में तीसरा सबसे सूखा महीना जून 2026 रहा

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार बीते जून महीने के दौरान सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. जून में पूरे देश में औसतन 99.5 मिलीमीटर (mm) बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य (165.3 mm) से करीब 40 फीसदी कम है. इससे पहले के अल नीनो वाले सालों में जून 2014 में बारिश में 44 फीसदी कमी दर्ज की गई थी. जबकि, जून 2009 में यह सामान्य से 47 फीसदी बारिश कम थी. हालांकि, जून में सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड साल 1926 का है, जब बारिश में 49 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी. वहीं, मानसून की धीमी शुरुआत और अल नीनो के असर से 1901 के बाद पिछले 125 सालों में यह 5वां सबसे सूखा और 100 सालों में तीसरा सबसे सूखा जून का महीना रहा है.

Rain Fall lower 40 percent than average in june 2026

जून में हुई 99.5 फीसदी बारिश, सामान्य से 40 फीसदी कम रही है. (IMD Rainfall Graph)

जुलाई में कम बारिश के पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ाई

मौसम विभाग के अनुसार जुलाई में लंबी अवधि के औसत (एलपीए) (1971-2020) की 94 फीसदी बारिश होने की संभावना है. यानी जून में हुई 99.5 फीसदी बारिश से भी कम बारिश जुलाई में होगी. जबकि, जुलाई में सामान्य बारिश लगभग 280.4 मिमी होती है. जून की तुलना में करीब 5 फीसदी कम बारिश जुलाई में होने के पूर्वानुमान ने मौसम विज्ञानियों और कृषि वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. कम बारिश की वजह अल नीनो के असर को माना जा रहा है. जुलाई को अब तक के सबसे सूखे महीने के रूप में दर्ज किए जाने की आशंका है.

अल नीनो के चलते सूखे की स्थिति बनने की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि जुलाई के दौरान भारत में मासिक औसत बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है. IMD के मौसम विज्ञान महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि जुलाई के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. अल नीनो के प्रभाव के चलते स्थिति सूखे और उमस जैसी स्थितियां बनने की चेतावनी दी गई है.

खरीफ बुवाई और अंकुरण प्रभावित होने से कृषि उत्पादन पर संकट

मौसम विज्ञानी नवदीप दहिया ने कहा कि मौजूदा मॉनसूनी रफ्तार को देखते हुए बेहतर बारिश की उम्मीद घट गई है. पूर्वी और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अभी भी अच्छी मॉनसून बारिश का इंतजार है, जो अल नीनो के प्रभाव से थमी हुई है. सही मात्रा में बारिश नहीं होने से ग्रामीण इलाकों में खरीफ सीजन में धान समेत अन्य फसलों की बुवाई में देरी हो रही है. अब जुलाई में कम बारिश के अनुमान ने खरीफ फसलों के अंकुरण और ग्रोथ के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. यह स्थितियां कृषि उत्पादन पर बड़ा संकट खड़ा कर सकती हैं.

Dr. Mayank Kumar Rai raising awareness among farmers at Krishi Vigyan Kendra Rampur about sowing climate resilient crops.

कृषि विज्ञान केंद्र रामपुर में किसानों को जलवायु अनुकूल फसलों की बुवाई के लिए जागरूक करते डॉ. मयंक कुमार राय.

कम पानी लागत वाली और सूखा झेलने में सक्षम फसलों की खेती ही बचाएगी

कृषि विज्ञान केंद्र रामपुर के प्रमुख डॉ. मयंक कुमार राय ने बताया कि मौसम की स्थितियां खेती विपरीत बनती दिख रही हैं. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देशन में खेत बचाओ अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें किसानों को जलवायु अनुकूल फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसान भी फसल विविधता पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे कृषि उत्पादन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि बिलासपुर तहसील के ग्राम दिनकरी के किसानों से मिट्टी की जांच कराकर उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, कृषि रसायनों के समुचित उपयोग करने की सलाह दी गई है. अल नीनो के चलते सूखे की आहट पर उन्होंने कहा कि किसानों को धान की बजाय कम पानी वाली फसलों की खेती करने की जरूरत है.

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Published: 1 Jul, 2026 | 01:00 PM

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