Farm Pond Scheme: खेती में बढ़ती लागत और पानी की कमी किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है. ऐसे में किसानों को राहत देने और उनकी आय बढ़ाने के लिए सरकार खेत तालाब योजना चला रही है. इस योजना के तहत किसान अपनी निजी जमीन पर तालाब बनवा सकते हैं, जिसके लिए सरकार अनुदान भी दे रही है. इससे न केवल सिंचाई की समस्या कम होगी बल्कि मछली पालन और वर्षा जल संचयन के जरिए अतिरिक्त आय का रास्ता भी खुलेगा.
52,500 रुपये तक मिलेगा अनुदान
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित खेत तालाब योजना में किसानों को तालाब निर्माण की कुल लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है. योजना के तहत निर्धारित आकार का तालाब बनाने की लागत 1,05,000 रुपये तय की गई है. इसमें किसानों को 52,500 रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. यह राशि तीन किस्तों में सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाती है.
तालाब से सिंचाई के साथ मछली पालन का भी लाभ
खेत में बने तालाब का उपयोग कई तरह से किया जा सकता है. किसान इसमें वर्षा जल का संचयन कर सकते हैं, जिससे सूखे या कम बारिश के समय सिंचाई में मदद मिलती है. इसके अलावा तालाब में मछली पालन करके अतिरिक्त आय भी प्राप्त की जा सकती है. पशुपालन विभाग का मानना है कि खेती और मत्स्य पालन को एक साथ अपनाने से किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. यह योजना जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है.
ऐसे करें आवेदन, ये दस्तावेज होंगे जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर खेत तालाब योजना का विकल्प चुनना होगा. आवेदन के दौरान किसान को आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, भूमि से संबंधित दस्तावेज, पासपोर्ट आकार का फोटो और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी देनी होगी. आवेदन जमा होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा सत्यापन किया जाएगा. पात्र पाए जाने पर तालाब निर्माण की स्वीकृति दी जाएगी और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुदान की राशि जारी की जाएगी.
जल संकट से राहत दिलाने में मददगार योजना
विशेषज्ञों का कहना है कि खेत तालाब योजना किसानों के लिए दीर्घकालिक लाभ देने वाली पहल है. इससे खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है, भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है. साथ ही मछली पालन जैसी गतिविधियों से किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है.