धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रहलाद जोशी नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री, खाद्य मंत्रालय के साथ अतिरिक्त प्रभार मिला
नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. अब केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
Ministry of Education: नीट पेपर लीक को लेकर उठे सवाल, परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ता अविश्वास और लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राष्ट्रपति ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है. इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में सरकार के अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया इस्तीफा
आज यानी शनिवार, 25 जुलाई को राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. इसी आदेश में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है. इस फैसले के साथ ही केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में तत्काल नेतृत्व परिवर्तन कर दिया.
पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन बना बड़ा कारण
नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) के बाद देशभर में छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता गया. अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन हुए, जबकि दिल्ली में जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे रहे. सोशल मीडिया पर भी परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग तेज होती गई. आंदोलन के दौरान सरकार पर लगातार दबाव बढ़ा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विपक्ष के साथ-साथ छात्रों के निशाने पर रहे. अंततः बढ़ते राजनीतिक और जनदबाव के बीच उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे अब राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है.
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प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी
कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद चुने गए प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) केंद्र सरकार के अनुभवी मंत्रियों में गिने जाते हैं. वर्ष 2019 में उन्होंने पहली बार कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी और संसदीय कार्य, कोयला तथा खान मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी. जून 2024 में नई सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का दायित्व दिया गया. अब इन मंत्रालयों के साथ उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है. ऐसे में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई अहम फैसलों की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी.
A press release by Rashtrapati Bhavan reads: “The President of India, as advised by the Prime Minister, has accepted the resignation of Shri Dharmendra Pradhan from the Union Council of Ministers, with immediate effect, under clause (2) of Article 75 of the Constitution of India.… pic.twitter.com/EVcZSRLnjQ
— Press Trust of India (@PTI_News) July 25, 2026
सरकार के सामने भरोसा बहाल करने की सबसे बड़ी चुनौती
पेपर लीक विवाद ने केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी छात्रों से सीधे संवाद करते हुए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने, पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लागू करने तथा दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया था. अब शिक्षा मंत्रालय में हुए इस बदलाव के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास दोबारा जीतने और ऐसी व्यवस्था तैयार करने की होगी, जिसमें भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल न उठें. शिक्षा मंत्रालय के नए नेतृत्व से अब देशभर के लाखों छात्र ठोस सुधारों और तेज फैसलों की उम्मीद लगाए बैठे हैं.