देशभर में पेपर लीक के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच केंद्र सरकार अब कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने शुक्रवार देर रात जारी अपने वीडियो संदेश में साफ कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं सामान्य अपराध नहीं हैं और इनके खिलाफ और कड़े कदम उठाने का समय आ गया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे.
पीएम ने संकेत दिया कि सरकार पहले से लागू सार्वजनिक परीक्षा कानून को और प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठा सकती है. मौजूदा कानून में पेपर लीक कराने वालों के लिए अधिकतम 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन सरकार का मानना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे अपराधों पर और सख्त कार्रवाई जरूरी है. प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देशभर में आज होने वाली कैबिनेट बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं.
प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक की घटनाएं देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय हैं. उन्होंने कहा, पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है. लाखों छात्रों, उनके माता-पिता के लिए पीड़ादायक है. इसलिए पेपर लीक से अब तक, पिछले ढाई महीनों में कई कदम उठाए हैं. गुनहगारों को पकड़ा है, वे जेल में हैं. हमारी जिम्मेदारी थी कि छात्रों का साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में 22 लाख छात्रों का एग्जाम कराया. 19 जुलाई को रिजल्ट भी आ गया. उन्होंने आगे कहा कि सरकार पहले भी इस दिशा में कानून बना चुकी है, लेकिन अब और सख्त कार्रवाई के लिए आज की कैबिनेट बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी.
More strict actions against paper leaks to come in tomorrow’s Cabinet! pic.twitter.com/NRysBukk5U
— Narendra Modi (@narendramodi) July 23, 2026
अभी क्या है कानून?
केंद्र सरकार पहले ही सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू कर चुकी है. इस कानून के तहत संगठित तरीके से पेपर लीक कराने, प्रश्नपत्र बेचने या परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों को अधिकतम 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है. माना जा रहा है कि सरकार अब इस कानून के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाने या अतिरिक्त प्रावधान जोड़ने पर विचार कर सकती है.
सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने करीब 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया. उनके अनशन खत्म करने के बाद आंदोलन की रणनीति में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन CJP ने साफ कर दिया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा.

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक
अनशन खत्म करते हुए उन्होंने कहा, नमस्कार दोस्तों आज 26वें दिन मैं आप लोगों को कुछ खास खबर बताना चाहूंगा. अभी रात के लगभग साढ़े 12 बज रहे हैं. अभी थोड़ी देर पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा साहब और जितेंद्र सिंह साहब यहां आए थे. लद्दाख एपेक्स बॉडी के शीर्ष नेता यहां आए थे. और उससे पहले आप लोगों को मामूल है विभिन्न दलों के लगभग 65 सांसदों ने आकर और हस्ताक्षर देकर हमसे अनशन तोड़ने को कहा. उन्होंने संसद में इन मुद्दों पर नीट पेपर और परीक्षा में धांधली पर चर्चा करेंगे, ऐसा आश्वासन दिया.’
CJP का नया बयान
#WATCH दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडिंग प्रेसिडेंट अभिजीत दिपके ने कहा, “जंतर-मंतर पर हमारा धरना तब तक जारी रहेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते। हमें बहुत राहत है कि सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल तोड़ दी है, क्योंकि 26 दिन से ज़्यादा हो गए थे। उनकी ज़िंदगी… pic.twitter.com/jEPalZhY5w
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 24, 2026
CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने कहा कि जंतर-मंतर पर धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते. उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत डिपके ने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर उनका धरना जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि सोनम वांगचुक ने 26 दिन से ज्यादा समय बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है, क्योंकि उनका जीवन देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.
आज की कैबिनेट बैठक क्यों अहम?
सरकार की ओर से दिए गए संकेतों के बाद माना जा रहा है कि आज की कैबिनेट बैठक में पेपर लीक रोकने के लिए नए प्रशासनिक और कानूनी कदमों पर फैसला लिया जा सकता है. यदि ऐसा होता है तो परीक्षा प्रणाली की निगरानी, जांच एजेंसियों की भूमिका और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा और मजबूत हो सकता है. हालांकि सरकार की ओर से अंतिम निर्णय कैबिनेट बैठक के बाद ही सामने आएगा.