UP Dairy Scheme: उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं और छोटे किसानों को डेयरी कारोबार से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने पर जोर दे रही है. इसी दिशा में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को प्रदेश के सभी 75 जिलों के गांव-गांव तक दुग्ध विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए होने वाली कागजी कार्रवाई आसान और पारदर्शी बनाने को कहा गया है, ताकि ग्रामीण महिलाएं और किसान बिना परेशानी डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकें.
हर गांव तक पहुंचेगी डेयरी योजना, पंचायत स्तर पर होगा अभियान
खाद्य प्रसंस्करण विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की संयुक्त बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि डेयरी योजनाओं का लाभ किसी भी गांव से दूर नहीं रहना चाहिए. इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान और शिविर चलाने पर जोर दिया गया है. सरकार का लक्ष्य महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़कर लखपति दीदी बनाना है. योजना के तहत पंजीकरण, आवेदन फॉर्म और अन्य दस्तावेजी प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कम पढ़ी-लिखी महिलाएं भी इसका लाभ आसानी से उठा सकें.
महिलाओं को डेयरी से जोड़ने पर खास जोर
उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों को डेयरी कारोबार से प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाएगा. महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को बढ़ावा देने पर भी जोर है. इसके साथ ही पशुपालकों के लिए गांवों में ही किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और पशुधन बीमा से जुड़ी सुविधाएं आसान बनाने की योजना है. सरकार की कोशिश है कि पशु खरीदने या डेयरी शुरू करने के लिए छोटे किसान और महिलाएं साहूकारों पर निर्भर न रहें. योजनाओं की आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
42 जिलों में 3.94 लाख महिलाएं डेयरी से जुड़ीं
बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, अभी उत्तर प्रदेश के 42 जिलों के 7,220 गांवों में 3.94 लाख महिला सदस्य दुग्ध उत्पादन से जुड़ी हैं. इन महिलाओं के जरिए हर दिन करीब 10.77 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है. बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी 7 जिलों के 1,440 गांवों में 95,100 सदस्यों के साथ काम कर रही है और यहां रोज 2.50 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है. काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी 10 जिलों के 1,770 गांवों में 55,000 सदस्यों के साथ रोज 1.60 लाख लीटर दूध का उत्पादन कर रही है. वहीं, सामर्थ्या मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी 10 जिलों के 1,550 गांवों में 1 लाख सदस्यों से जुड़ी है. बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क कंपनी 7 जिलों के 1,160 गांवों में 73,283 सदस्यों के साथ काम कर रही है. सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी 8 जिलों के 1,900 गांवों में 71,320 महिलाओं को जोड़ चुकी है.
72,669 महिलाएं बनीं लखपति दीदी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अब तक 72,669 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं. इस कारोबार से अब तक 5,839 करोड़ रुपये का कुल टर्नओवर हुआ है, जबकि महिलाओं ने 133 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है. केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तीकरण और लखपति दीदी बनाने के संकल्प का हिस्सा है. उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रखने और गांवों में जमीन पर पहुंचाने के निर्देश दिए. सरकार का मानना है कि डेयरी व्यवसाय ग्रामीण महिलाओं के लिए नियमित आय का मजबूत जरिया बनने के साथ गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है.