महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. राज्य में बीते साल की तुलना में 3.5 लाख हेक्टेयर जमीन पर फसलें नहीं बोई जा सकीं हैं. जो फसलें बोई गई हैं उन पर सूखने का खतरा मंडरा रहा है. वहीं, किसानों की लागत घटने के साथ ही सिंचाई आदि का खर्च भी कई गुना ज्यादा बढ़ गया है. राज्य के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने फसल के नुकसान का जायजा लेने के लिए लातूर का दौरा किया और किसानों से बातचीत की. उन्होंने किसानों से कहा कि जिनकी फसलों को नुकसान पहुंचा है उन्हें राहत राशि जरूर दी जाएगी.
सहकारिता मंत्री ने लातूर के सूखाग्रस्त खेतों में फसलें देखीं
महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने शुक्रवार को सूखा प्रभावित जिले लातूर का दौरा किया और खरीफ फसलों की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने खराब मौसम की मार झेल रहे किसानों से बातचीत की. उन्होंने मीडिया से बताया कि वह गुरुवार को अहमदपुर तहसील के लांजी गांव भी गए थे. मंत्री ने खेतों का निरीक्षण किया और कृषि विभाग से फसल की स्थिति के बारे में जानकारी ली.
कृषि विभाग से फसल नुकसान की सर्वे रिपोर्ट मांगी
सहकारिता मंत्री ने प्रभावित किसानों से कहा कि मुश्किल समय में राज्य सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी है. प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर फसल नुकसान का सही आकलन करने और सरकार को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं. कृषि विभाग के अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और नुकसान के सही आकलन की रिपोर्ट तुरंत सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रभावित किसानों को सरकारी नियमों के अनुसार मदद मिल सके.
सामान्य से 20 फीसदी कम बारिश से सूखे जैसे हालात
भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस मानसून सीजन में अगस्त 2026 तक 586.1 मिमी बारिश की उम्मीद थी, जो 479.1 मिमी ही दर्ज की गई है. यहां बारिश सामान्य से लगभग 20.3 फीसदी कम हुई है. वहीं, इस इलाके में आगामी सितंबर और अक्तूबर में बारिश की संभावना भी न के बराबर है. ऐसे में यहां बारिश पर निर्भर कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है.

सहकारिता मंत्री ने प्रभावित किसानों से बातचीत की.
लातूर और परभणी में सबसे कम बारिश
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र कुल 8 जिले आते हैं. इनमें छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, हिंगोली, लातूर, नांदेड़, धाराशिव और परभणी शामिल हैं. कम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में लातूर और परभणी हैं. परभणी में बारिश सामान्य से 34.7 फीसदी कम दर्ज की गई है. और लातूर में 40.6 फीसदी कम बारिश हुई है. इसी तरह अन्य जिलों में भी बारिश की कमी दर्ज की जा चुकी है.
3.5 लाख हेक्टेयर जमीन पर नहीं बोई जा सकीं फसलें
महाराष्ट्र कृषि विभाग के आंकड़ों अनुसार मॉनसून में कम बारिश के चलते इन इलाकों में बुवाई का रकबा इस साल करीब 3.5 लाख हेक्टेयर कम हो गया है. यानी इतनी जमीन पर किसान फसलों की बुवाई ही नहीं कर पाए हैं. इस साल बुवाई का रकबा 46.19 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले पांच वर्ष के 49.72 लाख हेक्टेयर के औसत से 7 फीसदी कम है. यह पिछले साल की तुलना में भी 2 लाख हेक्टेयर कम है.