नलकूपों को बिजली नहीं देने से नाराज किसानों का हल्लाबोल, 17 जिलों में जोरदार प्रदर्शन-नारेबाजी

पंजाब में बिजली संकट को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है. धान की रोपाई के समय बिजली आपूर्ति में कमी और स्मार्ट मीटर के विरोध में किसान सड़कों पर उतर आए हैं. 17 जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं. किसान बेहतर बिजली व्यवस्था और नीतियों में बदलाव की मांग लगातार कर रहे हैं.

नोएडा | Published: 30 Jun, 2026 | 03:56 PM

Punjab Farmers Protest: पंजाब में बिजली संकट और धान की रोपाई के लिए कृषि नलकूपों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति न मिलने के विरोध में किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है. किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के बैनर तले राज्य भर में, विशेषकर अमृतसर में, 17 जिलों के 31 से अधिक स्थानों पर धरने और प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं. किसानों का कहना है कि खेती के सबसे अहम समय में बिजली की कमी ने उनकी फसल और मेहनत दोनों को खतरे में डाल दिया है.

घंटों की कटौती से परेशान किसान

किसानों का आरोप है कि भीषण गर्मी और धान के सीजन में बिजली की मांग  रिकॉर्ड स्तर पर लगभग 17,000 मेगावाट तक पहुंच गई है, लेकिन कृषि फीडरों को 8 घंटे की बजाय केवल 2.5 से 4 घंटे तक ही बिजली मिल रही है. इससे ट्यूबवेल चलाना मुश्किल हो गया है और खेतों में सिंचाई प्रभावित हो रही है. किसानों का कहना है कि पहले सरकार ने 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था, लेकिन अब स्थिति इसके बिल्कुल उलट हो गई है. इससे धान की रोपाई में देरी हो रही है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है.

स्मार्ट मीटर और निजीकरण नीति का कड़ा विरोध

इस आंदोलन का एक बड़ा कारण स्मार्ट मीटर लगाने  की योजना और बिजली विभाग के निजीकरण की नीतियां भी हैं. किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने इन नीतियों का पुरजोर विरोध किया है. किसानों का कहना है कि स्मार्ट मीटर और निजीकरण से बिजली महंगी और आम किसान के लिए और मुश्किल हो जाएगी. प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक सरकार इन नीतियों को वापस नहीं लेती और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

किसान नेता का बयान और सरकार-PSPCL की प्रतिक्रिया

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर (Sarwan Singh Pandher) ने कहा कि पंजाब भर में किसान मजदूर मोर्चा  राज्य में बिजली संकट को लेकर 17 जिलों के 31 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार ने पहले कहा था कि बिजली 24 घंटे उपलब्ध रहेगी, लेकिन अब दिन-रात बिजली नहीं मिल रही है. उन्होंने ये भी कहा कि पंजाब की धान की फसल सूख रही है और वे कृषि मशीनों के लिए 16 घंटे बिजली आपूर्ति तथा घरेलू उपयोग के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे हैं.

वहीं, पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने बयान दिया है कि रंजीत सागर बांध से जलविद्युत उत्पादन रुकने के कारण अस्थायी कमी आई थी, जिसे अब सुधार लिया गया है और किसानों को 8 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति देने का आश्वासन दिया गया है. दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने मौजूदा सरकार पर किसानों और आम उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली न देने  और स्थिति को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है.

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