पंजाब में आज बड़ा किसान आंदोलन, 18 जगहों पर थमेगी ट्रेनों की रफ्तार…इस वजह से भड़के किसान
किसान संगठनों के अनुसार यह आंदोलन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चलेगा. इस दौरान पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में किसान रेलवे ट्रैक पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और कई जगह धरना भी दिया जाएगा. किसान नेताओं ने साफ कहा है कि यह कदम मजबूरी में उठाया गया है.
Punjab farmers protest: पंजाब में इस समय गेहूं की खरीद को लेकर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. खेतों में मेहनत से तैयार की गई फसल जब मंडियों में पहुंच रही है, तो किसानों को उम्मीद थी कि समय पर खरीद होगी. लेकिन खरीद प्रक्रिया में हो रही देरी ने किसानों की चिंता को गुस्से में बदल दिया है. इसी के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और किसान मजदूर मोर्चा (KMM) समेत कई किसान संगठनों ने 17 अप्रैल यानी आज राज्यभर में ‘रेल रोको’ आंदोलन का ऐलान किया है.
तीन घंटे तक ‘रेल रोको’ से बढ़ेगा दबाव
किसान संगठनों के अनुसार यह आंदोलन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चलेगा. इस दौरान पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में किसान रेलवे ट्रैक पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और कई जगह धरना भी दिया जाएगा.
किसान नेताओं ने साफ कहा है कि यह कदम मजबूरी में उठाया गया है और अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
सरवन सिंह पंढेर ने बताई असली वजह
चंडीगढ़ में हुई संयुक्त बैठक के बाद किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने आंदोलन की वजह साफ करते मीडिया को बताया कि इस साल बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने पहले ही किसानों की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है. ऐसे हालात में किसानों को उम्मीद थी कि सरकार राहत देगी और खरीद प्रक्रिया जल्दी शुरू करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मंडियों में गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जिससे और नुकसान होने का खतरा बना हुआ है.
किसानों की फसल खुले में, बढ़ रही चिंता
किसानों का कहना है कि मंडियों में खरीदी शुरू नहीं होने से उनकी फसल कई दिनों से खुले में पड़ी हुई है. अगर बारिश फिर से होती है, तो यह पूरी तरह खराब हो सकती है. यह स्थिति किसानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है, क्योंकि पूरी साल की मेहनत दांव पर लगी होती है.
व्यापारी उठा रहे देरी का फायदा
किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि खरीद में देरी का फायदा व्यापारी उठा रहे हैं. जब सरकारी खरीद शुरू नहीं होती, तो किसान मजबूरी में अपनी फसल कम दामों पर बेचने को तैयार हो जाते हैं. ऐसे में उन्हें उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता. किसान संगठनों ने मांग की है कि सरकार तुरंत खरीद शुरू करे और प्रभावित फसल के लिए गुणवत्ता मानकों में ढील दे.
मंडियों की बदहाल व्यवस्था से भी नाराजगी
सिर्फ खरीद में देरी ही नहीं, बल्कि मंडियों की खराब व्यवस्था भी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है. कई मंडियों में बोरियों की कमी है, जिससे अनाज को सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है. इसके अलावा छांव, पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है. किसानों का कहना है कि इतनी गर्मी में घंटों मंडी में इंतजार करना और बुनियादी सुविधाएं न मिलना बेहद कठिन स्थिति है.
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
किसान नेताओं ने कहा है कि यह आंदोलन उनकी मजबूरी है, क्योंकि वे अपनी मेहनत की फसल को बर्बाद होते नहीं देख सकते. उन्होंने राज्य के अन्य संगठनों और आम लोगों से भी इस आंदोलन में समर्थन देने की अपील की है. प्रशासन के लिए यह आंदोलन बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि रेल सेवाएं बाधित होने से आम लोगों और व्यापार पर भी असर पड़ेगा.
इन जगहों पर होगा आज आंदोलन
- अमृतसर (देवीदासपुरा)
- संगरूर (सुनाम)
- होशियारपुर (होशियारपुर और दसूया रेलवे स्टेशन)
- कपूरथला (हुसैनपुर – रेल कोच फैक्टरी के पास, फगवाड़ा रेलवे स्टेशन)
- बरनाला (रेलवे स्टेशन)
- पठानकोट (परमानंद)
- जालंधर (शाहकोट रेलवे स्टेशन)
- बठिंडा (रामपुरा फूल रेलवे स्टेशन)
- लुधियाना (साहनेवाल रेलवे स्टेशन)
- फाजिल्का (रेलवे स्टेशन)
- मुक्तसर (मलोट रेलवे स्टेशन)
- गुरदासपुर (जिले के विभिन्न स्थानों पर आंदोलन)
- तरन तारन (रेलवे स्टेशन)
- मोगा (मोगा और जगराओं रेलवे स्टेशन)
- पटियाला (रेलवे स्टेशन)
- मानसा (रेलवे स
- फिरोजपुर (टंकन वाली बस्ती)
- मलेरकोटला (अहमदगढ़ रेलवे स्टेशन)
आगे और तेज हो सकता है आंदोलन
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. ऐसे में आने वाले दिनों में पंजाब में किसानों का विरोध और तेज हो सकता है, जो सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है.