केन-बेतवा प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासियों के साथ राहुल गांधी, बोले- मौके पर जाकर सरकार पर बनाएंगे दबाव
Ken Betwa Link Project: राहुल गांधी ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का विरोध कर रहे आदिवासियों के आंदोलन को समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि वह मौके पर जाकर उनकी समस्याएं समझेंगे और सरकार पर दबाव बनाएंगे. आदिवासियों का दावा है कि परियोजना से 21 गांव, करीब 7,000 परिवारों की जमीन और लाखों पेड़ प्रभावित हो सकते हैं.
Ken Betwa Project: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का विरोध कर रहे आदिवासियों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में वह आदिवासियों के साथ हैं और उनकी आवाज को मजबूती से उठाएंगे. राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वह खुद आंदोलन वाली जगह पर जाएंगे और सरकार पर उनकी मांगों को लेकर दबाव बनाएंगे. राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आदिवासी प्रतिनिधियों से हुई अपनी हालिया मुलाकात का वीडियो भी शेयर किया. इस वीडियो में आदिवासी लोगों ने परियोजना से होने वाली परेशानियों और अपनी मांगों के बारे में राहुल गांधी को बताया.
21 गांवों के प्रभावित होने का दावा
आदिवासी प्रतिनिधियों का कहना है कि केन-बेतवा परियोजना की वजह से 21 आदिवासी बहुल गांव प्रभावित हो सकते हैं. उनका दावा है कि परियोजना के लिए करीब 46 लाख पेड़ों पर भी असर पड़ सकता है. इसके अलावा पन्ना बाघ अभयारण्य को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई है. प्रतिनिधियों के मुताबिक, परियोजना की वजह से करीब 7,000 परिवारों की लगभग 11,500 एकड़ जमीन जा सकती है. उनका कहना है कि जमीन चली गई तो कई परिवारों के सामने खेती और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा.
राहुल गांधी ने कहा- मैं आपके साथ हूं
आदिवासी प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से इस मुद्दे को संसद में उठाने की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान उन्हें प्रशासन की तरफ से परेशान किए जाने की शिकायत है. राहुल गांधी ने कहा कि वह इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं. उन्होंने भरोसा दिया कि वह मौके पर जाकर लोगों से मिलेंगे और उनकी परेशानियों को समझेंगे. साथ ही सरकार पर उनकी मांगों को लेकर दबाव बनाने की बात भी कही. राहुल गांधी ने कहा कि बुंदेलखंड के लोग लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोगों की बात सुनी जानी चाहिए और उन्हें सम्मान और समर्थन मिलना चाहिए.
केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासी भाई-बहनों की समस्याएं, मांगें, संघर्ष और आपबीती – उनकी जुबानी।
सालों से सिर्फ़ अपने अधिकारों के लिए अन्याय और अत्याचार सह रहे ये बुंदेलखंड निवासी सम्मान और समर्थन के हक़दार हैं।
आदिवासी भाई-बहनों की इस लड़ाई में, मैं और… pic.twitter.com/graNKRt4IE
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 19, 2026
क्या है केन-बेतवा परियोजना?
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है. इसके तहत केन नदी के पानी को बेतवा नदी तक पहुंचाने की योजना है. सरकार का मकसद इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में पानी की कमी को कम करना है. इस परियोजना से इलाके में खेती के लिए पानी और लोगों के लिए पीने का पानी बढ़ाने की उम्मीद है. बुंदेलखंड में लंबे समय से पानी की कमी बड़ी समस्या रही है. इसी वजह से सरकार इस परियोजना को काफी अहम मानती है.
पानी की उम्मीद, लेकिन जमीन और जंगल की चिंता
केन-बेतवा परियोजना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि इससे इलाके को पानी का फायदा कितना मिलेगा और इसकी कीमत कौन चुकाएगा. सरकार जहां इसे बुंदेलखंड के लिए पानी की बड़ी जरूरत पूरी करने वाली परियोजना मानती है, वहीं प्रभावित आदिवासी अपनी जमीन, जंगल और रोजी-रोटी को लेकर चिंतित हैं. आदिवासियों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके लिए उनके घर, खेत और जंगल नहीं छीने जाने चाहिए. अब राहुल गांधी के समर्थन के बाद इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने की संभावना है. आने वाले दिनों में राहुल गांधी के मौके पर पहुंचने और सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी.