Ken Betwa Protest: देश की पहली केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना एक बार फिर चर्चा में है. सरकार का कहना है कि, इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी दूर होगी, लाखों हेक्टेयर जमीन को सिंचाई मिलेगी और लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा. लेकिन दूसरी ओर, इस परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसान अपनी जमीन, घर और आजीविका को लेकर चिंतित हैं. उनका आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के बाद भी उन्हें न तो पूरा मुआवजा मिला और न ही उचित पुनर्वास. इसी मांग को लेकर छतरपुर जिले में पिछले दो सप्ताह से किसानों का आंदोलन चल रहा था, जिसे रविवार सुबह प्रशासन ने समाप्त करा दिया.
14 दिनों से धरने पर बैठे थे किसान
छतरपुर जिले के कुपी गांव में वरान नदी के किनारे अंडरब्रिज के नीचे परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसान पिछले 14 दिनों से धरना, जल सत्याग्रह और चिता सत्याग्रह कर रहे थे. किसानों का कहना था कि उनकी जमीन परियोजना के लिए ले ली गई, लेकिन बदले में उन्हें अभी तक उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला.
आंदोलन में किसान नेता अमित भटनागर भी शामिल थे. वे किसानों की मांगों के समर्थन में लगातार 14 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे और प्रशासन से बातचीत की मांग कर रहे थे.
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VIDEO | Madhya Pradesh police removed protesters and ended the ‘satyagraha’ that was launched against the Ken-Betwa Link Project and other irrigation schemes.
The protest, mainly by tribal women, was being held on the banks of the Barana river near Kupi village in Chhatarpur… pic.twitter.com/8cyMPglsJm
— Press Trust of India (@PTI_News) July 19, 2026
सुबह तड़के पहुंची पुलिस, खाली कराया धरना स्थल
रविवार तड़के भारी संख्या में पुलिस बल धरना स्थल पर पहुंची. इसके बाद प्रदर्शन कर रहे किसानों को वहां से हटाकर आंदोलन खत्म करा दिया गया. किसानों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया और कई लोगों को अपने साथ ले गई. उनका कहना है कि, प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन दिए बिना कार्रवाई की. हालांकि, प्रशासन का पक्ष इससे अलग है.
पुलिस ने गिरफ्तारी की बात से किया इनकार
छतरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आदित्य पटले ने कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया. उनके मुताबिक, धरना स्थल पर मौजूद अधिकतर लोग पन्ना जिले के रहने वाले थे, इसलिए उन्हें बसों के जरिए उनके घर तक भेजा गया. उन्होंने यह भी बताया कि, किसान नेता अमित भटनागर की तबीयत लंबे अनशन के कारण बिगड़ रही थी. इसी वजह से उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया.
VIDEO | Madhya Pradesh police removed protesters and ended the ‘satyagraha’ that was launched against the Ken-Betwa Link Project and other irrigation schemes.
ASP Chhatarpur Aditya Patle says, “A team of doctors came here along with the police and the administration so that… pic.twitter.com/Q30WPLqrjc
— Press Trust of India (@PTI_News) July 19, 2026
प्रशासन ने सुरक्षा को बताया वजह
प्रशासन का कहना है कि, जिस अंडरब्रिज के नीचे किसान धरना दे रहे थे, वहां निर्माण कार्य चल रहा है. ऐसे में किसी भी दुर्घटना की आशंका को देखते हुए आंदोलनकारियों को वहां से हटाया गया. अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल सुरक्षा के लिहाज से की गई है, आंदोलन को दबाने के लिए नहीं.
मुआवजा और पुनर्वास की मांग पर अड़े किसान
हालांकि, प्रभावित किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. उनका साफ कहना है कि जब तक अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा, पुनर्वास और बाकी अधिकार नहीं मिलते, तब तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. किसानों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं का सबसे ज्यादा असर गांवों और आदिवासी परिवारों पर पड़ता है, लेकिन फैसले लेते समय उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता.
केन-बेतवा लिंक परियोजना को बुंदेलखंड के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा भी लगातार सामने आ रहा है. ऐसे में सरकार और प्रभावित किसानों के बीच बातचीत किस दिशा में बढ़ती है, इस पर सभी की नजर रहेगी.