Republic Day 2026: वंदे मातरम के 150 साल पर इतिहास रचेगी परेड, 1923 की दुर्लभ पेंटिंग्स से सजेगा कर्तव्य पथ

Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस 2026 की परेड इस बार ‘वंदे मातरम के 150 साल’ थीम पर आधारित होगी. कर्तव्य पथ पर 1923 की ऐतिहासिक पेंटिंग्स, विशेष झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए वंदे मातरम की गौरवशाली यात्रा को दिखाया जाएगा. यह परेड भारत की एकता, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम की भावना को नए अंदाज में पेश करेगी.

नोएडा | Published: 24 Jan, 2026 | 03:04 PM

Republic Day Parade: गणतंत्र दिवस की परेड हर साल देश की परंपरा, इतिहास और संस्कृति की खूबसूरत झलक दिखाती है. साल 2026 में यह परेड दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होगी, जिसकी थीम रखी गई है ‘वंदे मातरम के 150 साल’. इस मुद्दे पर हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में भी खूब चर्चा हुई थी. यह थीम सिर्फ एक गीत तक सीमित नहीं है, बल्कि आजादी की लड़ाई, देश की एकता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है.

इस बार परेड में सिर्फ सेना की ताकत ही नहीं, बल्कि भारत की रंग-बिरंगी संस्कृति और कला भी देखने को मिलेगी. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ से जुड़े दो बड़े नेता, एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन, मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे.

वंदे मातरम थीम का महत्व

संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल के अनुसार, गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शित झांकियां केवल शोपीस नहीं होतीं, बल्कि यह राष्ट्र की सभ्यता और ऐतिहासिक स्मृति का चलायमान दस्तावेज होती हैं. ये झांकियाँ विचारों, मूल्यों और ऐतिहासिक अनुभवों को साझा दृश्य भाषा में प्रस्तुत करती हैं. इसी सन्दर्भ में वंदे मातरम का स्थान अनन्य और स्थायी है.

वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष का प्रतीक था. इसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में लिखा था, जिसमें भारत को एक मां के रूप में चित्रित किया गया है, ‘सजलम, सुपफ्लम’, जो प्राकृतिक संपदा, स्नेह और आंतरिक शक्ति से परिपूर्ण है. ब्रिटिश काल में इस गीत ने देशवासियों में आत्म-सम्मान और विश्वास लौटाया, भक्ति को साहस में बदला और कविता को संकल्प में परिवर्तित किया.

परेड में वंदे मातरम की झलक

गणतंत्र दिवस पर, तेजेंद्र कुमार मित्रा द्वारा 1923 में बनाई गई वंदे मातरम की पंक्तियों पर आधारित चित्रावलियां प्रदर्शित की जाएंगी. इन चित्रों को ‘बांदे मातरम अल्बम’ (1923) में प्रकाशित किया गया था. परेड के दौरान, कर्तव्य पथ पर ये चित्र-आलेख दर्शकों के लिए विशेष दृश्य अनुभव प्रदान करेंगे. परेड के अंत में ‘वंदे मातरम’ का एक बैनर अनावरण किया जाएगा और रबर बैलून भी छोड़े जाएंगे.

इसके अतिरिक्त, परेड स्थल पर पुष्प सजावट, आमंत्रण कार्ड और टिकट भी वंदे मातरम थीम को दर्शाएंगे. कर्तव्य पथ पर स्क्रीन पर वंदे मातरम के वीडियो भी प्रदर्शित किए जाएंगे. संस्कृति मंत्रालय की झाँकी इस गीत की यात्रा को दृश्य रूप में प्रस्तुत करेगी, जिसमें गीत का पूरा संस्करण दिखाया जाएगा.

संसद में 150 साल वंदे मातरम

संसद के शीतकालीन सत्र 2025 में वंदे मातरम के 150 साल पर कई घंटे लंबी बहसें हुईं. गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर आलोचना की कि उन्होंने गीत के दो छंदों को हटाया था, जिससे देश की विभाजन की राजनीति को बढ़ावा मिला. वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि राष्ट्रीय गीत पर बहस की कोई आवश्यकता नहीं है और यह बीजेपी सरकार द्वारा चुनावी फायदे के लिए उठाया गया कदम था.

वंदे मातरम की यह 150 साल की यात्रा भारत की सांस्कृतिक एकता और स्वतंत्रता के संघर्ष का प्रतीक रही है. गणतंत्र दिवस 2026 पर इसकी झलक न केवल हमारे इतिहास की याद दिलाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी देशभक्ति और संस्कृति से जोड़ने का संदेश देगी.

 

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