घर की गार्डनिंग में चमत्कार करेंगे मूंगफली के छिलके, पौधों की ग्रोथ होगी दोगुनी
मूंगफली के छिलकों में प्राकृतिक फाइबर और कार्बन भरपूर मात्रा में होता है. यही तत्व मिट्टी की सेहत सुधारने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. सही तरीके से इनका इस्तेमाल किया जाए, तो गमले की मिट्टी हल्की, हवादार और ज्यादा उपजाऊ बन सकती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको कोई अलग खर्च भी नहीं करना पड़ता.
Gardening tips: अक्सर ऐसा होता है कि हम बैठकर मूंगफली खाते हैं और उसके छिलकों को बिना सोचे-समझे कूड़ेदान में फेंक देते हैं. हमें लगता है कि ये किसी काम के नहीं हैं. लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. मूंगफली के छिलके गार्डनिंग करने वालों के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं. अगर आपके घर में गमले हैं, पौधे लगे हैं या आपको बागवानी का थोड़ा भी शौक है, तो इन छिलकों को फेंकने की गलती बिल्कुल न करें.
मूंगफली के छिलकों में प्राकृतिक फाइबर और कार्बन भरपूर मात्रा में होता है. यही तत्व मिट्टी की सेहत सुधारने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. सही तरीके से इनका इस्तेमाल किया जाए, तो गमले की मिट्टी हल्की, हवादार और ज्यादा उपजाऊ बन सकती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको कोई अलग खर्च भी नहीं करना पड़ता.
क्यों फायदेमंद हैं मूंगफली के छिलके?
मूंगफली के छिलके धीरे-धीरे गलते हैं और मिट्टी में मिलकर उसकी संरचना को बेहतर बनाते हैं. ये मिट्टी को सख्त होने से बचाते हैं, पानी के निकास को सुधारते हैं और जड़ों तक हवा पहुंचाने में मदद करते हैं. यही वजह है कि पौधों की ग्रोथ अच्छी होती है और वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं.
पहला तरीका: कम्पोस्ट बनाकर करें इस्तेमाल
मूंगफली के छिलकों को दोबारा इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा और असरदार तरीका है उन्हें कम्पोस्ट में बदलना. इसके लिए सबसे पहले छिलकों को अच्छी तरह सुखा लें. फिर हाथ से या मिक्सर में थोड़ा-थोड़ा तोड़ लें, ताकि वे जल्दी सड़ सकें. अब इन्हें किचन वेस्ट जैसे सब्जियों के छिलके, फल के बचे हुए हिस्से और सूखी पत्तियों के साथ मिलाकर कम्पोस्ट की बाल्टी या गड्ढे में डाल दें.
मूंगफली के छिलके कम्पोस्ट में कार्बन का काम करते हैं, जबकि गीला कचरा नाइट्रोजन देता है. दोनों मिलकर बढ़िया संतुलन बनाते हैं. कुछ हफ्तों बाद यह मिश्रण काली, भुरभुरी और पोषक कम्पोस्ट में बदल जाता है. जब आप इस कम्पोस्ट को गमलों की मिट्टी में मिलाते हैं, तो पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और ग्रोथ तेजी से होती है.
दूसरा तरीका: सीधे मिट्टी में मिलाकर बनाएं सॉइल कंडीशनर
अगर आपके पास कम्पोस्ट बनाने का समय या जगह नहीं है, तो भी चिंता की कोई बात नहीं. आप मूंगफली के छिलकों को सीधे गमले की मिट्टी में मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए छिलकों को पहले धोकर सुखा लें. फिर मिक्सर में हल्का दरदरा पीस लें, बिल्कुल पाउडर नहीं बनाएं.
अब इस दरदरे पाउडर को गमले की मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें. इससे मिट्टी हल्की और हवादार बनती है. जिन गमलों की मिट्टी जल्दी सख्त हो जाती है, वहां यह तरीका बहुत काम आता है. इससे पानी का निकास बेहतर होता है और जड़ों में सड़न की समस्या कम होती है.
तीसरा तरीका: मल्च की तरह करें इस्तेमाल
मूंगफली के छिलकों का एक और शानदार उपयोग है उन्हें मल्च के रूप में इस्तेमाल करना. इसके लिए छिलकों को धोकर अच्छी तरह सुखा लें और गमले की मिट्टी की ऊपरी सतह पर पतली परत में बिछा दें. यह परत मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखती है और पानी जल्दी सूखने नहीं देती.
साथ ही, इससे गमलों में अनचाहे घास-पौधे उगने से भी रोक लगती है. धीरे-धीरे जब ये छिलके सड़ते हैं, तो मिट्टी में पोषक तत्व भी मिलाते जाते हैं. गर्मियों के मौसम में यह तरीका खासतौर पर फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे मिट्टी ठंडी और नम बनी रहती है.
छोटी सी आदत, बड़ा फायदा
अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में बस इतना सा बदलाव कर लें कि मूंगफली के छिलकों को फेंकने के बजाय दोबारा इस्तेमाल करें, तो आपके पौधे ज्यादा हरे-भरे और मजबूत बन सकते हैं. यह न सिर्फ गार्डनिंग के लिए फायदेमंद है, बल्कि किचन वेस्ट को कम करने का भी एक आसान और नेचुरल तरीका है. अगली बार मूंगफली खाते वक्त याद रखें, छिलके कचरा नहीं, गमलों की ताकत हैं.