बिहार में चीनी उद्योग का विस्तार! 25 नई चीनी मिलें लगाने की तैयारी, किसानों की बढ़ेगी इनकम

Bihar Sugar Mills: बिहार सरकार ने अगले 5 साल में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, ताकि गन्ना किसानों की आय बढ़े और चीनी उद्योग को मजबूती मिले. इसके साथ ही सकड़ी, रैयाम और सासामुसा की बंद चीनी मिलों को इसी साल फिर से शुरू करने की तैयारी है.

नोएडा | Published: 27 Jul, 2026 | 12:36 PM

Sugar Mill Project Bihar: बिहार सरकार ने गन्ना किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है. राज्य में एनडीए सरकार के 100 दिन पूरे होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि, सरकार अगले पांच सालों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है. सरकार का मानना है कि इससे चीनी उद्योग को नई ताकत मिलेगी, गन्ना किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि, राज्य में कृषि को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उसे उद्योगों से जोड़कर किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने की दिशा में भी काम किया जाएगा.

पांच साल में 25 नई चीनी मिलों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार में नई चीनी मिलें लगाने की योजना पर तेजी से काम किया जाएगा. इस पहल का मकसद राज्य के चीनी उद्योग को फिर से मजबूत करना और गन्ना किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है. उन्होंने बताया कि, यह लक्ष्य केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सुझाव के आधार पर तय किया गया है. सरकार को उम्मीद है कि, नई चीनी मिलों के शुरू होने से गन्ने की खरीद आसान होगी और किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दराज के इलाकों में नहीं जाना पड़ेगा.

तीन बंद चीनी मिलें इसी साल होंगी शुरू

सरकार नई मिलें लगाने के साथ-साथ बंद पड़ी चीनी मिलों को भी दोबारा चालू करने पर जोर दे रही है. मुख्यमंत्री ने बताया कि सकड़ी, रैयाम और सासामुसा की चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया इसी साल शुरू कर दी जाएगी. इन मिलों के चालू होने से आसपास के हजारों गन्ना किसानों को सीधा फायदा मिलेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. सरकार का कहना है कि इन मिलों के शुरू होने से गन्ने की समय पर खरीद होगी और किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी.

नदी जोड़ो परियोजना से मजबूत होगी खेती

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बागमती और बूढ़ी गंडक जैसी प्रमुख नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं पर काम कर रही है. इस योजना का उद्देश्य किसानों को सालभर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है. सरकार का मानना है कि इससे बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं का असर कम होगा और कृषि उत्पादन अधिक स्थिर बनेगा. बेहतर सिंचाई व्यवस्था से किसान मौसम पर कम निर्भर रहेंगे और अधिक उत्पादन लेने में सफल होंगे.

नदियों के किनारे बनेंगे औद्योगिक गलियारे

बिहार सरकार ने गंगा, गंडक और कोसी जैसी प्रमुख नदियों के किनारे औद्योगिक गलियारे (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) विकसित करने की भी योजना बनाई है. इन क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि किसानों की उपज का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण किया जा सके. इससे परिवहन लागत कम होगी और किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी. सरकार का लक्ष्य है कि खेत से निकलने वाली उपज सीधे उद्योगों तक पहुंचे, जिससे वैल्यू एडिशन बढ़े और किसानों की आय में इजाफा हो.

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई चीनी मिलें समय पर स्थापित होती हैं और बंद मिलों का संचालन दोबारा शुरू होता है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ गन्ना किसानों को मिलेगा. उन्हें समय पर भुगतान, बेहतर बाजार और अपनी उपज बेचने की सुविधा मिलेगी. इसके अलावा, चीनी उद्योग से जुड़े परिवहन, प्रसंस्करण और अन्य छोटे कारोबारों को भी बढ़ावा मिलेगा.

इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के जरिए बिहार के कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों को नई गति देने का प्रयास किया जाएगा.

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