मिलें गन्ना बकाया मूल्य पर ब्याज का भुगतान करेंगी, कोर्ट में किसानों की लड़ाई लड़ रहे वीएम सिंह का दावा

याचिकाकर्ता सरदार वीएम सिंह ने किसान इंडिया से कहा कि जिन चीनी मिलों ने किसानों के गन्ने का पैसा लंबे समय तक अटकाए रखा और ब्याज नहीं दिया. उन्हें अब उस रकम पर ब्याज का भुगतान करना होगा. उन्होंने कहा कि कोर्ट में मामला तेजी से आगे बढ़ रहा है और वह किसानों की लड़ाई जीतकर रहेंगे.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 25 Jul, 2026 | 08:10 PM

किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान में देरी करने पर मिलने वाले ब्याज का पैसा मिलने की उम्मीद बंध गई है. हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने किसान नेता सरदार वीएम सिंह की याचिका पर सरकार से पिछले 30 सालों का गन्ना मूल्य रिकॉर्ड मांग लिया है. किसान नेता सरदार वीएम सिंह ने किसान इंडिया से कहा कि वह कई साल से किसानों की लड़ाई लड़ रहे हैं और अब कोर्ट में यह मामला खुल गया है. उन्होंने कहा कि जिन चीनी मिलों ने किसानों के गन्ने का पैसा लंबे समय तक अटकाए रखा, उन्हें अब उस रकम पर ब्याज का भुगतान करना होगा. उन्होंने कहा कि वह किसानों की लड़ाई जीतकर रहेंगे.

किसानों को न्याय दिलाने के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे वीएम सिंह

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि किसानों के लिए लड़ाई लड़ने के बाद साल 2021 से नियम लाया गया है था कि चीनी मिलें किसानों के गन्ने का भुगतान 14 दिन के भीतर करना होगा और अगर इसमें देरी होती है तो उस रकम पर 15 फीसदी ब्याज का भुगतान भी चीनी मिलें करेंगी. लेकिन, मिलों ने किसानों का लंबे समय तक पैसा बकाया रखा और ब्याज भी नहीं दिया. इसके बाद 2024 में वह मामले को न्यायालय में ले गए.

हजारों करोड़ रुपये के भुगतान का मामला

किसान नेता ने कहा कि उनकी याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीड में बीती 16 जुलाई को सुनवाई हुई है. सुनवाई में कोर्ट ने मिलर्स के प्रतिनिधि अधिवक्ता से पूछा की मूल्य में देरी से भुगतान पर ब्याज की रकम क्यों नहीं दी गई है. इस पर मिलर्स की ओर से जवाब दिया गया कि हजारों करोड़ रुपये ब्याज देने से मिलें बंद हो जाएंगी. इस दलील पर कोर्ट ने कहा कि गन्ना किसानों की बदहाली के लिए कोई तो जिम्मेवार होगा. कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र को असंतोषजनक माना. न्यायालय ने कहा कि सरकार ने 1 मई 2024 के आदेश में मांगी गई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई और प्रश्नों से बचने का प्रयास किया है.

कोर्ट ने सरकार से 30 साल का गन्ना भुगतान रिकॉर्ड मांगा

हाईकोर्ट ने दोहराया कि गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिन के भीतर करना कानूनन अनिवार्य है. यदि भुगतान में देरी होती है तो 15 फीसदी वार्षिक ब्याज देय होगा, जैसा कि 23 दिसंबर 2021 के पूर्व निर्णय में घोषित किया जा चुका है. अदालत ने कहा कि यह मामला केवल 2006 तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 1996 से लेकर वर्तमान (2025-26) तक के सभी वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाएगा, क्योंकि यह जनहित याचिका किसानों के हित से जुड़ी है. न्यायालय ने गन्ना आयुक्त से विस्तृत विवरण मांगा है. इसमें किन-किन वर्षों में भुगतान में देरी हुई, कितना ब्याज देय था और कितना ब्याज वास्तव में किसानों को दिया गया.

3 अगस्त के बाद रोजाना सुनवाई करेगा कोर्ट

सरदार वीएम सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में सरकार से पिछले 30 सालों का गन्ना मूल्य रिकॉर्ड जांच करेगी है और गन्ना आयुक्त से सवाल जवाब करेगी. किसान नेता ने कहा कि अब अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी. उसमें सरकार की ओर से रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे और गन्ना आयुक्त से जवाब तलब होंगे. वीएम सिंह ने कहा कि मिलर्स की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद इस मामले की सुनवाई रोजाना की जाएगी.

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Published: 25 Jul, 2026 | 08:04 PM

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