किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ SKM ने खोला मोर्चा, दिल्ली में जंतर-मंतर पर लगेगी किसान-मजदूर संसद

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष का ऐलान कर दिया है. इसके तहत 27 फरवरी के बाद SKM के प्रतिनिधिमंडल राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलेंगे. उनसे केंद्र की मोदी सरकार की ओर से सत्ता के केंद्रीकरण का विरोध करने, राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने, किसानों की आवाज बुलंद करने समेत अन्य मुद्दों पर बात करेंगे.

नोएडा | Updated On: 25 Feb, 2026 | 01:05 PM

देश के किसान संगठनों के समूह संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. एसकेएम ने अमेरिका से व्यापार समझौते, बिजली बिल, बीज विधेयक, श्रम कानून, वीबी रामजी अधिनियम और एमएसपी गारंटी कानून के साथ ही कर्जमाफी को लेकर दिल्ली में जुटने का ऐलान किया है. एसकेएम की ओर से कहा गया है कि दिल्ली के जंतर मंतर पर किसान-मजूदर संसद का आयोजन किया जाएगा. इसमें देशभर से भारी संख्या में किसान हिस्सा लेंगे.

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की राष्ट्रीय परिषद की बैठक ने निर्णय लिया गया है कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक स्वतंत्र संघर्षों के साथ-साथ मजदूरों के साथ संयुक्त संघर्षों को तेज किया जाएगा. SKM केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के मंच के साथ समन्वय बैठकें करेगा और संयुक्त संघर्षों के अंतिम कार्यक्रम पर निर्णय लेगा. एसकेएम की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करना, बिजली बिल, बीज विधेयक, चार श्रम संहिताओं, ग्राम-जी अधिनियम का विरोध तथा MSP@C2+50% की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी और 2013 के LARR अधिनियम के क्रियान्वयन जैसी मांगें शामिल हैं.

गांव-गांव तक किसान संघर्ष पहुंचाने का ऐलान

SKM 9 मार्च तक गांवों में जनसभाओं के जरिए संघर्ष को गांव-गांव तक ले जाएगा. इसमें भारत के राष्ट्रपति से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) को बर्खास्त करने, प्रधानमंत्री को राष्ट्रविरोधी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश देने तथा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को गेहूं और धान किसानों के बोनस को समाप्त करने वाले डीओ पत्र को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की जाएगी. किसान डाकघरों तक जुलूस निकालकर राष्ट्रपति को ऐसे खुले पत्र भेजेंगे. बैठक ने सेब, सोयाबीन, कपास, मक्का आदि प्रभावित फसलों की खेती करने वाले गांवों में विशेष अभियान चलाने का भी निर्णय लिया.

मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलेंगे एसकेएम नेता

SKM के प्रतिनिधिमंडल 27 फरवरी या उसके बाद संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलेंगे. उनसे केंद्र की मोदी सरकार की ओर से सत्ता के केंद्रीकरण का विरोध करने, राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने, संसद से जीएसटी अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्ति बहाल करने तथा विभाज्य कर पूल (सेस और अधिभार सहित) में राज्यों की हिस्सेदारी वर्तमान 33 फीसदी के बजाय 60 फीसदी करने की मांग की जाएगी.

जंतर-मंतर पर मजदूर-किसान संसद होगी

एसकेएम ने निर्णय लिया कि संसद के अगले सत्र के पहले दिन 9 मार्च को जंतर-मंतर पर ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के मंच के साथ मिलकर मजदूर-किसान संसद आयोजित की जाएगी. सभी राज्य समन्वय समितियों से आह्वान किया कि वे 10 मार्च से 13 अप्रैल (जलियांवाला बाग दिवस) तक देशभर में महापंचायतें आयोजित करें. इसकी शुरुआत पंजाब के बरनाला से होगी। इन महापंचायतों में हजारों किसान भाग लेंगे, भारत–अमेरिका व्यापार समझौते और मोदी सरकार की अन्य कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों के खतरों को समझाया जाएगा तथा भविष्य के लंबे संघर्ष की तैयारी की जाएगी.

राज्यों में किसानों के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा

23 मार्च शहीद दिवस को देशभर में साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा. इसके विस्तृत कार्यक्रम राज्य स्तर पर तय किए जाएंगे. बैठक ने पंजाब, ओडिशा और महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलनों पर किए गए पुलिस दमन की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) द्वारा भेजे गए पत्र पर चर्चा की गई और उनसे वार्ता के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया. इस समिति में जोगिंदर सिंह उग्राहां, युधवीर सिंह, पी. कृष्णप्रसाद, रामिंदर सिंह पटियाला और बलदेव सिंह निहालगढ़ शामिल होंगे.

MSP और संबंधित मुद्दों पर किसानों की मांगों के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति से मिलने के लिए 15 सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा. पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और केरल सहित 9 राज्यों से 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया.

Published: 25 Feb, 2026 | 12:58 PM

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