फरवरी में संसद पहुंचेगा बीज विधेयक 2025, किसानों और बीज बाजार में आएंगे ये बड़े बदलाव
बीज विधेयक 2025, साल 1966 के पुराने बीज अधिनियम की जगह लेगा. पिछले कई दशकों में खेती, तकनीक और बीज उत्पादन के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है, लेकिन कानून उसी पुराने ढांचे पर चलता रहा. अब सरकार आधुनिक मानकों के हिसाब से नया कानून लाकर बीज सेक्टर को व्यवस्थित करना चाहती है.
देश के कृषि क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. केंद्र सरकार फरवरी में संसद के बजट सत्र के पहले चरण में बीज विधेयक 2025 पेश करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. इस बात की जानकारी देवेश चतुर्वेदी, कृषि सचिव ने दी है. सरकार का मानना है कि नया बीज कानून लागू होने से किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज मिलेंगे, साथ ही बीज बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी.
1966 के पुराने कानून की जगह लेगा नया बीज कानून
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, बीज विधेयक 2025, साल 1966 के पुराने बीज अधिनियम की जगह लेगा. पिछले कई दशकों में खेती, तकनीक और बीज उत्पादन के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है, लेकिन कानून उसी पुराने ढांचे पर चलता रहा. अब सरकार आधुनिक मानकों के हिसाब से नया कानून लाकर बीज सेक्टर को व्यवस्थित करना चाहती है. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को मिलने वाले बीज की गुणवत्ता भरोसेमंद हो और नकली या घटिया बीजों पर लगाम लगाई जा सके.
सुझावों की रिकॉर्ड संख्या, सरकार कर रही है समीक्षा
कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी के अनुसार, बीज विधेयक 2025 के मसौदे पर देशभर से करीब 9,000 सुझाव और आवेदन मिले हैं. इन सभी सुझावों की जांच की जा रही है और उन्हें शामिल करते हुए एक कैबिनेट नोट तैयार किया जाएगा. इसके बाद विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सुझाव मिलना यह दिखाता है कि किसान, बीज कंपनियां और कृषि विशेषज्ञ इस कानून को लेकर गंभीर और जागरूक हैं.
बीजों की गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी पर जोर
नए बीज विधेयक में बीजों की अनिवार्य रजिस्ट्रेशन व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है. इसका मतलब यह होगा कि किसी भी बीज किस्म, बीज उत्पादक और बीज विक्रेता को पंजीकरण कराना जरूरी होगा. बीज पैकेट पर क्यूआर कोड जैसे आधुनिक फीचर भी शामिल किए जाएंगे, ताकि किसान बीज की पूरी जानकारी आसानी से हासिल कर सकें. इससे यह पता लगाना आसान होगा कि बीज कहां से आया है, किसने बनाया है और उसकी गुणवत्ता क्या है.
किसानों के पारंपरिक अधिकार सुरक्षित रहेंगे
सरकार ने यह भी साफ किया है कि नया कानून किसानों के अधिकारों को कमजोर नहीं करेगा. किसान अपने खेत में पैदा किए गए बीजों को बचा सकते हैं, इस्तेमाल कर सकते हैं और आपस में अदला-बदली भी कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें किसी तरह का पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी. सरकार का कहना है कि किसानों की इस पारंपरिक आजादी को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि वे बीज कंपनियों पर पूरी तरह निर्भर न हो जाएं.
केंद्र और राज्य स्तर पर बनेगी निगरानी व्यवस्था
बीज विधेयक 2025 में केंद्र और राज्य स्तर पर बीज समितियों के गठन का भी प्रावधान है. ये समितियां बीजों की गुणवत्ता, पंजीकरण और बाजार में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखेंगी. इससे बीजों से जुड़ी शिकायतों का समाधान जल्दी हो सकेगा और पूरे सिस्टम में जवाबदेही तय होगी.
नियम तोड़ने पर सख्त सजा का प्रावधान
नए विधेयक में नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त दंड का प्रावधान रखा गया है. व्यक्तिगत मामलों में उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार 1 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर मामलों में तीन साल तक की जेल भी हो सकती है. अगर कोई कंपनी नियम तोड़ती है, तो उस समय कंपनी का संचालन संभाल रहे जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
सार्वजनिक राय लेने के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
बीज विधेयक 2025 के मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव देने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर 2024 तय की गई थी. इस प्रक्रिया के जरिए सरकार ने किसानों, विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े लोगों की राय जानने की कोशिश की. अब इन सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए विधेयक को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक भी आएगा बाद में
कृषि सचिव के अनुसार, संसद के अवकाश के बाद सरकार पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल 2020 को भी पेश करने की योजना बना रही है. इससे साफ है कि सरकार खेती से जुड़े कानूनों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
बीज सेक्टर में बड़े बदलाव की उम्मीद
अगर बीज विधेयक 2025 संसद से पास हो जाता है, तो इसका असर देश के पूरे बीज बाजार पर पड़ेगा. किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज मिलने की उम्मीद है, वहीं नकली बीज बेचने वालों पर सख्ती बढ़ेगी. साथ ही बीज उद्योग में पारदर्शिता आएगी और किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा. सरकार का कहना है कि यह विधेयक खेती को टिकाऊ और किसान हितैषी बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा.