पूरे देश में लागू होगा मध्य प्रदेश के चार जिलों का कृषि रोडमैप! क्या है इसकी खासियत

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी इच्छा जताते हुए कहा कि देवास, सीहोर, रायसेन और विदिशा कृषि सुधार के ऐसे सफल मॉडल बनें, जिन्हें आगे चलकर देश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सके.

Kisan India
नोएडा | Published: 4 Jun, 2026 | 04:21 PM

जो मॉडल मध्य प्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास में बना है, वही देश में खेती के बदलाव में लागू होने जा रहा है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर इन चार जिलों का विशेष कृषि रोडमैप अब देश में कृषि परिवर्तन के एक मॉडल के रूप में उभरने जा रहा है. रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव के दौरान की गई घोषणा को आगे बढ़ाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसान की आय, जल संरक्षण, मिट्टी की सेहत, वैज्ञानिक खेती और योजनाओं के प्रभावी समन्वय पर आधारित एक जवाबदेह मिशन है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने मध्य प्रदेश के कृषि रोडमैप के लिए आज दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक ली, जिसमें मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों को कृषि विकास का आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा विजन सामने रखा है. उन्होंने कहा कि इन चार जिलों में जो कृषि रोडमैप लागू किया जा रहा है, वह केवल समीक्षा का दस्तावेज नहीं, बल्कि खेत, किसान और भविष्य की खेती को केंद्र में रखकर बनाया गया परिवर्तन का ठोस खाका है.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने स्वयं इन क्षेत्रों के खेतों की स्थिति देखी है. भूजल स्तर में गिरावट, मिट्टी की कमज़ोर होती सेहत और किसान की मेहनत के अनुरूप आय न मिलना चिंता का विषय है. इसी कारण उनकी दिली इच्छा है कि देवास, सीहोर, रायसेन और विदिशा कृषि सुधार के ऐसे सफल मॉडल बनें, जिन्हें आगे चलकर देश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सके.

उन्होंने साफ किया कि इस रोडमैप की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना किसान की शुद्ध आय होगी. हर जिले में वर्तमान आय क्या है और रोडमैप लागू होने के बाद उसमें कितना सुधार होता है, यही आने वाली हर समीक्षा का मुख्य आधार रहेगा. उनके मुताबिक, यह बैठक केवल प्रगति देखने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिणाम सुनिश्चित करने वाली जवाबदेही की बैठक है.

अल नीनो और जल संकट को देखते हुए उठाए जाएंगे जरूरी कदम

केंद्रीय मंत्री ने अल नीनो और जल संकट के संदर्भ में भी अपनी सोच रखी. उन्होंने कहा कि तात्कालिक हालात से आगे देखते हुए अभी से ऐसे कदम तय करने होंगे, जिनसे रबी फसल सुरक्षित रह सके. उन्होंने अल नीनो को चुनौती के साथसाथ अवसर भी बताया और कहा कि यदि कठिन परिस्थिति में भी इस रोडमैप के माध्यम से किसान की फसल और आय सुरक्षित रहती है तो वैज्ञानिक खेती और एकीकृत कृषि मॉडल पर किसानों का भरोसा और मजबूत होगा.

शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियों को स्पष्ट संदेश दिया कि केवल समितियों का गठन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखने चाहिए. उन्होंने “वन टीम वन टास्क” के मंत्र के साथ हर स्तर पर “कौन, क्या, कब तक” तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने राष्ट्रीय समिति के लिए तीन प्रमुख जिम्मेदारियां भी स्पष्ट कींनीतिगत बाधाओं की पहचान और उनका निराकरण, केंद्र और राज्य की योजनाओं का प्रभावी समन्वय और जिला स्तर तक जवाबदेही सुनिश्चित करना.

हर योजना को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जिम्मेदारी समिति की होगी

उन्होंने कहा कि PMKSY, NFSM, NMEO, MIDH और SMAM जैसी योजनाएं अलगअलग दिशा में नहीं चलेंगी, बल्कि किसान के खेत पर इनका एकीकृत और प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देना चाहिए. ICAR से उन्नत बीज आपूर्ति, KVK के माध्यम से प्रदर्शन खेत, और ATMA के जरिए विस्तार गतिविधियों को समयबद्ध रूप से जोड़ने की जिम्मेदारी राज्य स्तरीय समिति की होगी.

चारों जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला समितियों के गठन, KVK, DAO और जिला प्रशासन के संयुक्त कामकाज, तथा जमीनी समन्वय की स्थिति पर भी शिवराज सिंह चौहान ने विशेष रूप से जानकारी मांगी. उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के वितरण, सूक्ष्म सिंचाई के लक्ष्य और प्रगति, कृषि यंत्रीकरण उपकरणों की उपलब्धता तथा प्रत्येक ब्लॉक में कस्टम हायरिंग सेंटर की कार्यशील स्थिति की समीक्षा को जरूरी बताया.

फसल विविधीकरण को इस रोडमैप का केंद्रीय तत्व बताते हुए उन्होंने जिलेवार कृषि प्रणालियों को आगे बढ़ाने पर बल दिया. विदिशा में सोयाबीनमक्का अंतरफसल, सीहोर में उच्च मूल्य फसलें, रायसेन में धानलहसुन प्रणाली और देवास में मक्कालहसुनप्याज आधारित प्रणाली को किसानों तक पहुंचाने के प्रयासों की प्रगति पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए.

डेयरी, मत्स्य, बागवानी को कृषि के साथ जोड़ना समय की जरूरत

समेकित कृषि प्रणाली को लेकर भी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने खरीफ 2026 से प्रत्येक जिले में कम से कम एक ब्लॉक में पायलट शुरू करने का लक्ष्य रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि डेयरी, मत्स्य पालन और बागवानी को कृषि के साथ जोड़कर आय के बहुस्रोत विकसित करना समय की आवश्यकता है. इसके लिए पशुपालन, उद्यानिकी और कृषि विभागों के बीच ठोस समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा.

किसान उत्पादक संगठनों और बागवानी क्षेत्र को मजबूत बनाने पर भी उन्होंने फोकस किया. चारों जिलों के FPO को बाजार से जोड़ने, MIDH के अंतर्गत नर्सरी और कोल्ड चेन के लिए धनराशि जारी करने तथा जल संकट और शीत श्रृंखला जैसी बाधाओं के समाधान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए. इससे उत्पादन से विपणन तक किसानों को बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है.

किसान प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को रोडमैप की सफलता का आधार बताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने KVK नेटवर्क की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया. भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल जैसे संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने के साथ हर ब्लॉक में कम से कम एक अग्रणी किसान तैयार करने की दिशा में काम करने को कहा गया, ताकि वह स्थानीय स्तर पर प्रेरक और मार्गदर्शक की भूमिका निभा सके.

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