पूर्वोत्तर में बाढ़ और भूस्खलन से पैदा हुए हालात का जायजा लेने पहुंचे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित हवाई सर्वे मंगलवार को खराब मौसम की वजह से नहीं हो सका. हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि राहत कार्यों की निगरानी और पीड़ितों तक पहुंचने का अभियान नहीं रुकेगा. अब वह 1 जुलाई यानी बुधवार को अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी और हवाई दौरा करेंगे.
उनके साथ केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरन रिजिजू और संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे. दौरे का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित किसानों, ग्रामीण परिवारों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करना है.
इटानगर पहुंचते ही लोगों से मिले, सुनी बाढ़ पीड़ितों की परेशानी
दिल्ली से इटानगर पहुंचने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से आए लोगों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की. इस दौरान लोगों ने खेतों में जलभराव, फसलों के नुकसान, मकानों की क्षति और रोजमर्रा की परेशानियों की जानकारी दी. केंद्रीय मंत्री ने सभी की बातें सुनने के बाद भरोसा दिलाया कि कोई भी प्रभावित परिवार सरकारी सहायता से वंचित नहीं रहेगा.
उन्होंने कहा कि मौसम ने भले ही हेलीकॉप्टर की उड़ान रोक दी हो, लेकिन राहत और पुनर्वास के प्रयासों की रफ्तार नहीं रुकेगी. उनका कहना था कि वह स्वयं प्रभावित इलाकों में जाकर हालात देखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि हर जरूरतमंद तक मदद पहुंचे.
अधिकारियों के साथ समीक्षा, केंद्र की मदद का भरोसा
इटानगर सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति, राहत कार्यों, पुनर्वास और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के किसानों और ग्रामीणों की चिंता केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
बैठक में राहत सामग्री के वितरण, क्षति के आकलन और पुनर्वास कार्यों को तेज करने पर भी चर्चा हुई.
बुधवार को अरुणाचल और असम में करेंगे हवाई और जमीनी सर्वे
1 जुलाई यानी बुधवार को केंद्रीय मंत्री सुबह से ही अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित गांवों और राहत शिविरों का दौरा करेंगे. इस दौरान वे किसानों की फसलों, पशुधन, ग्रामीण सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को हुए नुकसान का जायजा लेंगे. इसके बाद हेलीकॉप्टर से अरुणाचल और असम के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे कर नदियों, तटबंधों, कृषि क्षेत्रों और संपर्क मार्गों की स्थिति का आकलन करेंगे.
शाम को गुवाहाटी में असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक होगी, जिसमें राहत कार्यों की प्रगति, तटबंधों की मरम्मत, बाढ़ प्रबंधन और किसानों को आर्थिक सहायता जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
सिर्फ राहत नहीं, भविष्य की तैयारी पर भी रहेगा जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की कोशिश केवल तत्काल राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगी. बाढ़ से होने वाले नुकसान को भविष्य में कम करने के लिए बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, मजबूत तटबंध, सुरक्षित राहत शिविर और फसल बीमा जैसी दीर्घकालिक व्यवस्थाओं पर भी काम किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन का उद्देश्य केवल संकट के समय राहत देना नहीं, बल्कि भविष्य में नुकसान को कम करने वाली स्थायी व्यवस्था तैयार करना भी है.
‘किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, हरसंभव मदद देंगे‘
मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश इस समय गंभीर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है. लगातार बारिश और भूस्खलन से सड़कें, पुल और कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि संतरा, केला और धान जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर वह किरन रिजिजू और राज्य सरकार के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं. नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रभावित लोगों को इस संकट से बाहर निकालने में कोई कमी नहीं छोड़ेंगी.