तेलंगाना ने रचा धान खरीदी का रिकॉर्ड, 70.82 लाख टन फसल पर 16,900 करोड़ रुपये खर्च…किसानों को मिला बोनस
धान खरीदी को सुचारू बनाने के लिए राज्य भर में करीब 8,500 खरीदी केंद्र खोले गए. इन केंद्रों की वजह से किसानों को दूर तक भटकना नहीं पड़ा और वे अपने नजदीकी केंद्र पर ही धान बेच सके. इससे परिवहन लागत भी घटी और किसानों का समय बचा.
Telangana paddy procuremen: तेलंगाना में खरीफ सीजन के खत्म होते ही धान खरीदी को लेकर एक नई मिसाल कायम हुई है. इस बार राज्य सरकार ने न सिर्फ रिकॉर्ड मात्रा में धान खरीदा, बल्कि समय पर भुगतान और बोनस देकर किसानों का भरोसा भी मजबूत किया है. खेतों में मेहनत करने वाले लाखों किसानों के लिए यह सीजन राहत और संतोष लेकर आया है.
रिकॉर्ड खरीदी से किसानों को मिली बड़ी राहत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 में कुल 70.82 लाख टन धान की खरीदी की है. इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार ने करीब 16,900 करोड़ रुपये खर्च किए. यह आंकड़ा राज्य के धान खरीदी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है. इससे पहले 2020-21 में 70.20 लाख टन धान की खरीदी हुई थी, जिसे इस बार पीछे छोड़ दिया गया.
राज्य के नागरिक आपूर्ति और सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने इसे तेलंगाना के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि इस बार की खरीदी ने यह साबित कर दिया है कि सरकार किसानों की फसल का पूरा सम्मान कर रही है और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का भरोसा दे रही है.
बारीक किस्म के धान पर खास फोकस
इस सीजन में खरीदे गए कुल धान में से 38.37 लाख टन बारीक किस्म का धान रहा. सरकार ने बारीक किस्म उगाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति क्विंटल 500 रुपये का बोनस दिया. इस मद में करीब 1,425 करोड़ रुपये किसानों को सीधे दिए गए. इससे किसानों में अच्छी गुणवत्ता वाली किस्में उगाने का रुझान और बढ़ा है.
14 लाख से ज्यादा किसानों को मिला फायदा
सरकार के अनुसार इस बार करीब 14 लाख किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेची. कुल 16,900 करोड़ रुपये की राशि में से लगभग 16,000 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है. समय पर भुगतान होने से किसानों को अगली फसल की तैयारी में मदद मिली है और उन्हें साहूकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा.
गांव-गांव तक पहुंची खरीदी व्यवस्था
धान खरीदी को सुचारू बनाने के लिए राज्य भर में करीब 8,500 खरीदी केंद्र खोले गए. इन केंद्रों की वजह से किसानों को दूर तक भटकना नहीं पड़ा और वे अपने नजदीकी केंद्र पर ही धान बेच सके. इससे परिवहन लागत भी घटी और किसानों का समय बचा.
उत्पादन भी रहा मजबूत
इस खरीफ सीजन में तेलंगाना में कुल धान उत्पादन करीब 1.48 करोड़ टन रहा. अच्छी बारिश, सिंचाई सुविधाओं और सरकारी समर्थन की वजह से उत्पादन में मजबूती देखने को मिली. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह खरीदी और भुगतान की व्यवस्था बनी रही, तो आने वाले वर्षों में राज्य में धान उत्पादन और किसानों की आमदनी दोनों में बढ़ोतरी होगी.