क्लाइमेंट चेंज के खतरे से पेड़ ही बचाएंगे, पौधरोपण अभियान से धरातल के बदलाव जांच रहे आईआईटी

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसान के लिए सबसे बड़े सवाल केवल बीज और खाद नहीं हैं, बल्कि पानी की उपलब्धता, मिट्टी की गुणवत्ता और खेत की दीर्घकालिक सेहत हैं. असंतुलित रसायन प्रयोग और अंधाधुंध दोहन से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 12 Jul, 2026 | 06:55 PM

पर्यावरण संरक्षण संकल्प अभियान के तहत देशभर में आज पौधारोपण किया गया है. पद्म भूषण पर्यावरणविद अनिल जोशी ने दिल्ली में पूसा में आयोजित कार्यक्रम में क्लामेट चेंज को बड़ी चुनौती बताया और कहा कि हरियाली और पौधे ही इस संकट से बचा सकते हैं. उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान हर दिन एक पौधा लगाते हैं. पौधारोपण से धरातल पर क्या बदलाव हो रहे हैं, इस पर आईआईटी शोध कर रही है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पौधे लगाकर हम धरती को सुरक्षित रख सकते हैं. जल, मिट्टी और संतुलित खेती पर फोकस करना जरूरी है.

नई दिल्ली के पूसा में पर्यावरण संरक्षण संकल्प अभियान कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वृक्ष मित्रों के जनआंदोलन से हरित भारत का नया अध्याय शुरू हुआ है. देशभर के वृक्ष मित्रों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार से समाज तक, हर शुभ कार्य पर पेड़ लगाकर ‘वृक्ष मित्र’ आंदोलन को जनआंदोलन बनाने का काम करें. वृक्ष मित्र परिवार का राष्ट्रीय ढांचा बनेगा, गांव से लेकर राष्ट्र स्तर तक संगठित अभियान चलाया जाएगा. हरियाली अमावस्या पर देशव्यापी वृक्षारोपण किया जाएगा और परंपरा को पेड़ पर्व के रूप में मनाया जाएगा.

मिट्टी और संतुलित खेती पर फोकस करना जरूरी

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पंचायतों और नगर निकायों में प्लांटेशन स्थल निर्धारित किए जाएं और पेड़ लगाने के साथ सुरक्षा की भी गारंटी भी पंचायत दे. जल, मिट्टी और संतुलित खेती पर फोकस करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भविष्य की कृषि और किसान के जीवन को सुरक्षित करने की यह पहल है और इसे आगे बढ़ाना ही होगा. उन्होंने कहा कि आज किसान के लिए सबसे बड़े सवाल केवल बीज और खाद नहीं हैं, बल्कि पानी की उपलब्धता, मिट्टी की गुणवत्ता और खेत की दीर्घकालिक सेहत हैं.

उन्होंने यह भी संकेत किया कि असंतुलित रसायन प्रयोग और अंधाधुंध दोहन से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है, जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है. ऐसी खेती करें जिससे धरती की सेहत भी बची रहे और किसान की आय भी सुरक्षित रहे.

क्लाइमेट चेंज से बचाव के उपाय बताए

समाजसेवी डॉ. अनूप हजेला ने क्लाइमेट चेंज को सबसे बड़ी चुनौती बताया. उन्होंने क्लाइमेट चेंज और सस्टेनेबिलिटी को बेहद सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि दुनियाभर में बढ़ती गर्मी, फेल होते सिस्टम, टूटती स्वास्थ्य–व्यवस्थाएं दिखाती हैं कि यह संकट किसी एक देश या शहर तक सीमित नहीं है. उन्होंने ऊर्जा बचत, कम पानी इस्तेमाल और दोबारा पानी के इस्तेमाल पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि ग्रे–वॉटर के उपयोग, पेपर और प्लास्टिक के कम से कम इस्तेमाल करने से क्लाइमेट चेंज से निपटने में मददगार हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग फ्लैट में रहते हैं और नई जमीन पर पेड़ नहीं लगा सकते, वे भी रोज कहीं जाते–आते किसी एक छोटे पौधे को अपना मानकर उसे रोज पानी दें, उसकी देखभाल करें और उसे बड़े पेड़ में बदलते देखें. यही सच्ची सस्टेनेबिलिटी है.

कृषि मंत्री के पौधों से धरातल पर बदलावों पर आईआईटी का शोध

पद्म भूषण पर्यावरणविद अनिल जोशी ने कहा कि IIT के वैज्ञानिकों ने शिवराज सिंह चौहान के वृक्षारोपण और पर्यावरणीय कार्यों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया है. आईआईटी रिमोट सेंसिंग और अन्य तकनीकी साधनों से यह परखने में जुटी हैं कि उनके लगाए पेड़ों और चलाए अभियान ने धरातल पर क्या बदलाव पैदा किए हैं. उन्होंने कहा कि यह अध्ययन भविष्य में नीति–निर्माताओं, सामाजिक संगठनों और संसद में बैठे जनप्रतिनिधियों के लिए एक “केस स्टडी” होगा जिससे वे समझ सकेंगे कि कैसे निरंतर, सादगीपूर्ण और जन–आधारित प्रयास से पर्यावरण में ठोस सुधार लाया जा सकता है.

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