CM मोहन यादव के परिवार पर उज्जैन में 168 एकड़ जमीन खरीद के आरोप, पत्नी और बहू के नाम भी शामिल

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार से जुड़े सदस्यों और कंपनियों ने दिसंबर 2023 के बाद उज्जैन में लगभग 137 भूखंड खरीदे जिनका क्षेत्रफल करीब 168 एकड़ है. खास बात यह है कि जमीनें मुख्यमंत्री की पत्नी, बेटे और बहू के नाम पर भी हैं.

नोएडा | Updated On: 23 Jun, 2026 | 02:38 PM

Ujjain Master Plan: मध्य प्रदेश का धार्मिक शहर उज्जैन इस समय बड़े पैमाने पर शहरी विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार का केंद्र बना हुआ है. शहर में नई सड़कें, हाईवे और भूमि उपयोग में बदलाव जैसे कई विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिससे आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं. इसी वजह से उज्जैन देश के सबसे तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी बाजारों में शामिल हो गया है. इसी बीच, अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में बड़ा दावा किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने पिछले कुछ समय में उज्जैन में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है. वहीं, इसके साथ ही मध्य प्रदेश में राजनीति गर्म हो गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने के बाद दिसंबर 2023 से उनके परिवार और रिश्तेदारों ने करीब 137 भूखंड खरीदे हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ और कीमत करीब 45 करोड़ रुपये बताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये जमीनें मुख्य रूप से उन इलाकों में खरीदी गई हैं, जहां विकास परियोजनाओं का सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है. इनमें मुख्यमंत्री की पत्नी, बेटे की पत्नी, भाई, भाभी, भतीजे और चचेरे भाइयों के नाम शामिल बताए गए हैं. जमीनों की खरीद सीधे तौर पर या परिवार से जुड़ी चार रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से की गई है. कुछ भूखंडों को बाद में बेचे जाने की भी जानकारी सामने आई है.

नई सड़क परियोजनाओं के पास हैं सारी जमीने

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जमीन खरीद को लेकर हितों के टकराव और पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठ रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि खरीदी गई अधिकांश जमीनें उज्जैन और उसके आसपास प्रस्तावित नई सड़क परियोजनाओं के करीब स्थित हैं या फिर उन क्षेत्रों में हैं, जहां उज्जैन मास्टर प्लान-2035 के तहत कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में बदलने की योजना है.

मुख्यमंत्री बनने से पहले का है उज्जैन मास्टर प्लान

हालांकि उज्जैन मास्टर प्लान-2035 मई 2023 में जारी किया गया था, जो मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले का है. लेकिन रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वे लंबे समय से उज्जैन के विकास और पर्यटन परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं. वह 2004 से 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) के अध्यक्ष रहे, 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPTDC) का नेतृत्व किया और 2013 से उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. इसी वजह से इन जमीन सौदों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

कब-कब खरीदी गई जमीन

111 एकड़ जमीन उज्जैन के आसपास

खास बात यह है कि मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार द्वारा खरीदी गई करीब 168 एकड़ जमीन में से लगभग 111 एकड़ जमीन उज्जैन और आसपास के उन क्षेत्रों में बताई जा रही है, जहां सड़क विकास और हाईवे परियोजनाएं प्रस्तावित या चल रही हैं. इनमें गरोठ, झालावाड़, नागदा, बड़नगर, इंदौर और भोपाल से जुड़े हाईवे कॉरिडोर शामिल हैं. कांग्रेस ने इस पर आरोप लगाया है कि उज्जैन नगर निगम पर दबाव डालकर मास्टर प्लान में बदलाव कराया गया है.

कांग्रेस ने किया सीएम मोहन यादव पर हमला

वहीं, कांग्रेस के दिग्गज नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हमला बोला है. उन्होंने भाजपा की मध्य प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि राज्य में ‘डबल इंजन’ की सरकार में ‘लूट का इंजन’ तेज रफ्तार से चल रहा है. कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इस पूरे मामले में शामिल हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, यह भी चर्चा में है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कुछ खबरें केंद्र में गए एक पूर्व कृषि मंत्री के इशारे पर करवाई गई हैं. कांग्रेस इसे सरकार के भीतर आपसी मतभेद और सत्ता में हिस्सेदारी की लड़ाई बता रही है.

 

 

 

Published: 23 Jun, 2026 | 02:25 PM

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