99 लाख की सब्सिडी विवाद पर मंत्री भागीरथ चौधरी ने दी सफाई, कहा- मैं भी किसान हूं, इसलिए…

Bhagirath Choudhary Controversy: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए 99.03 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिलने पर विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष ने इसे हितों के टकराव का मामला बताया है, जबकि मंत्री का कहना है कि उन्होंने 2018 में नियमों के तहत आवेदन किया था और सब्सिडी लेने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 27 Jun, 2026 | 04:09 PM

Cucumber Farming Subsidy Controversy: अपने ही मंत्रालय की योजना से करीब 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी लेने के मामले में अब केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी का बयान सामने आया है. उन्होंने मीडिया को सफाई देते हुए कहा है कि नियमों के तहत ही सब्सिडी ली है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है. केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है और पूरी प्रक्रिया सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार अपनाई गई है. उनका कहना है कि उन्होंने परियोजना के लिए बैंक से करीब 2 करोड़ रुपये का ऋण लिया है और आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को बढ़ावा देना चाहते हैं.

मीडिया से बात करते हुए चौधरी ने कहा कि उन्होंने कोई काम छिपाकर नहीं किया. उनके फार्म पर योजना से जुड़ा बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें परियोजना की लागत, मिली सब्सिडी और अन्य जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज है. उनका कहना है कि इससे दूसरे किसान भी उन्नत खेती और नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे. उन्होंने कहा कि जमीन उनके नाम पर है और सब्सिडी भी उनके नाम पर ही मिली है. चौधरी के अनुसार, उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए बैंक से ऋण लिया और उसी आधार पर उन्हें सब्सिडी स्वीकृत हुई. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में कई तरह की सब्सिडी दी जाती हैं, जैसे किसानों को डीएपी और यूरिया खरीदने पर भी सरकारी सहायता मिलती है. इसलिए इस मामले में कुछ भी छिपाने या नियमों के उल्लंघन का सवाल नहीं उठता.

क्या बोले भागीरथ चौधरी

भागीरथ चौधरी ने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि या राजनीतिक व्यक्ति उद्योग स्थापित करता है, तो उसे भी सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सब्सिडी का लाभ मिलता है. उन्होंने कहा कि उन्होंने भी नियमों के अनुसार योजना का लाभ लिया है और किसानों को आधुनिक व लाभकारी खेती के लिए प्रेरित करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान में पानी की गंभीर कमी है और कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है. ऐसे में उन्होंने अपने फार्म पर जल संरक्षण के लिए फार्म पॉन्ड (तालाब) बनाया है, जिसमें वर्षा का पानी संग्रहित किया जाता है. इसी पानी का उपयोग कर वे खेती कर रहे हैं और किसानों को भी ऐसी तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं. चौधरी ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर आरोप लगा सकता है, लेकिन उन्होंने पूरी मेहनत और सरकारी योजना के नियमों के तहत यह परियोजना विकसित की है. उनके अनुसार, यह परियोजना आधुनिक खेती और जल संरक्षण का एक मॉडल है, जिससे अन्य किसान भी सीख ले सकते हैं.

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के मुताबिक विवाद उस समय शुरू हुआ जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि, भागीरथ चौधरी को व्यावसायिक खीरे (ककड़ी) की खेती के लिए 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिली थी. यह सहायता मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के तहत दी गई, जिसका संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) करता है. इसी को लेकर विवाद खड़ा हुआ, क्योंकि केंद्रीय कृषि मंत्री NHB के पदेन (Ex-officio) अध्यक्ष होते हैं, जबकि कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं.

कैसे मिलती है यह सब्सिडी?

केंद्र सरकार ने साल 2014-15 में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना शुरू की थी. इसका उद्देश्य सब्जियों और फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत खीरा, शिमला मिर्च, टमाटर और कुछ फूलों की खेती के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक, अधिकतम 1 करोड़ रुपये प्रति परिवार तक की सब्सिडी दी जा सकती है.

NHB ने क्या स्पष्ट किया?

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, सब्सिडी मंजूर करने का फैसला NHB की प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी करती है. इस समिति में न तो केंद्रीय कृषि मंत्री और न ही कृषि राज्य मंत्री सदस्य होते हैं. यानी अंतिम मंजूरी अलग समिति द्वारा दी जाती है.

 

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Published: 27 Jun, 2026 | 03:49 PM

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