अल नीनो के खतरे और कमजोर मॉनसून की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन से पहले व्यापक तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICAR-CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के विशेषज्ञों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर स्थिति का आकलन किया. पिछली लगभग हर मीटिंग के बाद शिवराज सिंह चौहान कह रहे हैं कि संकट आने से पहले उसकी तैयारी करना जरूरी है. इस बार भी उन्होंने यही कि कहा कि सरकार पहले से तैयारी कर रही है.
43 प्रतिशत कम बारिश ने बढ़ाई चिंता
बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस साल मॉनसून सामान्य से काफी पीछे चल रहा है. अब तक लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार 2 जुलाई तक भी बारिश कमजोर रहने की संभावना है. ऐसे में वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कई दिनों से संभावित स्थिति को देखते हुए पूर्व तैयारी में जुटी हुई है.
कृषि मंत्रालय और आईसीएआर ने वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर देश के 315 जिलों की पहचान की है जहां कम वर्षा और सिंचाई की सीमित उपलब्धता के कारण जोखिम अधिक हो सकता है.
इनमें 111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखे गए हैं, जहां सिंचाई कवरेज 25 प्रतिशत से कम है. 76 जिले मध्यम प्राथमिकता और 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में हैं. इन जिलों का बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित है.
फसल विविधीकरण पर विशेष जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में खेती की रणनीति बदलने की जरूरत है. ऐसे इलाकों में कम अवधि में पकने वाली और कम पानी की जरूरत वाली किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा. फसल विविधीकरण ऐसे समय सबसे जरूरी है.
इसके साथ ही दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि किसानों की निर्भरता केवल एक फसल पर न रहे. इंटरक्रॉपिंग और मिश्रित खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि यदि सामान्य बुवाई अवधि और मानसून के आगमन के बीच अधिक अंतर आ जाए तो वैकल्पिक फसल योजना तुरंत लागू की जाए. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि खेत खाली न रहें और उपलब्ध नमी के अनुसार किसानों को उपयुक्त फसल विकल्प उपलब्ध कराए जाएं.
पुनर्बुवाई के लिए अतिरिक्त बीज का इंतजाम
संभावित प्रभावित जिलों में पुनर्बुवाई की जरूरत को देखते हुए अतिरिक्त बीज भंडारण किया गया है. सरकार ने लगभग एक प्रतिशत अतिरिक्त बीज रिजर्व रखा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को तुरंत उपलब्ध कराया जा सके. कृषि मंत्री के अनुसार यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है.
वैज्ञानिक सलाह मानने की अपील
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को सलाह दी कि केवल शुरुआती बारिश देखकर बुवाई न करें. कम से कम 75 से 100 मिलीमीटर संचयी वर्षा और पर्याप्त मिट्टी नमी होने के बाद ही बुवाई करना बेहतर रहेगा. इससे बीज खराब होने और पुनर्बुवाई की नौबत कम आएगी.
देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि मौसम सलाह इकाइयों को किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने का जिम्मा दिया गया है. इसके लिए एसएमएस, व्हाट्सऐप, कॉल सेंटर, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया का उपयोग किया जाएगा.
जिला स्तर पर तैयार हैं आकस्मिकता योजनाएं
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि आईसीएआर और आईसीएआर–क्रिडा ने सभी जिलों के लिए District Agriculture Contingency Plans (DACP) तैयार कर लिए हैं. इनमें वैकल्पिक फसलों, फसल बदलाव, जल उपयोग और आय सुरक्षा से जुड़े उपाय शामिल हैं.
केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया है कि इन योजनाओं को केवल दस्तावेज न रहने दिया जाए, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपडेट कर ऑपरेशनल प्लान के रूप में तैयार रखा जाए ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें तुरंत लागू किया जा सके.
केंद्र से गांव तक बनेगा समन्वय तंत्र
कृषि मंत्री ने कहा कि किसी भी आकस्मिक योजना की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है. इसी उद्देश्य से केंद्र, राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव स्तर तक समन्वय ढांचा तैयार किया गया है.
दिल्ली में “अल नीनो मॉनिटरिंग सेल” और “क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप” गठित किए गए हैं, जो मॉनसून, बुवाई, फसल स्थिति, इनपुट सप्लाई और बाजार संकेतों पर लगातार नजर रखेंगे. राज्यों को भी कंट्रोल रूम स्थापित करने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं.