अल नीनो भारत समेत कई देशों के लिए भयंकर तबाही का कारण बन रहा है. मौजूदा हालात और अल नीनो के चलते मौसम बदलाओं और सूखा-गर्मी स्थितियां बढ़ने की आशंकाओं ने चिंता बढ़ा दी है. एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देश खासतौर पर भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलिपीन कम फसल उत्पादन, उपज क्वालिटी में गिरावट, खाद्य महंगाई बढ़ने के साथ ही वनों में आग लगने और हवा में प्रदूषण-धुंध के खतरे में हैं. बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक भी अल नीनो को कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा जोखिम बता चुका है. वहीं, वैश्विक मौसम संगठन अगस्त से अक्टूबर के बीच अल नीनो के और मजबूत होने के संकेत दे चुका है.
रिसर्च फर्म ने अल नीनो के असर पर चिंता जताई
मार्केट रिसर्च फर्म एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार 2026 में शुरू हुआ अल नीनो एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों में कमजोर बारिश और जलवायु संबंधी दिक्कतों के जरिये आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है. खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच मौसम संबंधी दिक्कतें आपूर्ति को झटका देकर प्रभावित कर सकती हैं. हालांकि, इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव फिलहाल प्रबंधन के दायरे में रहने की उम्मीद है.
भारत समेत कई देशों में ये दिक्कतें होने का खतरा
एसएंडपी ने कहा कि अल नीनो के प्रमुख प्रभाव में कृषि उत्पादन में कमी, खाद्य महंगाई में बढ़ोत्तरी , जलविद्युत उत्पादन में गिरावट के साथ ही वनों में आग लगने की घटनाएं बढ़ने का खतरा है. इसके अलावा हवा में प्रदूषण और धुंध छाए रहने जैसी घटनाएं भी होने की चिंता जताई है. दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया दुनिया के उन क्षेत्रों में हैं, जहां अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है. यह देश भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, थाईलैंड और इंडोनेशिया आदि हैं.
पर्याप्त अनाज भंडार और किए जा रहे प्रयासों से उम्मीद
भारत के मामले में जुलाई 2026 तक उपलब्ध पर्याप्त खाद्य और अनाज भंडार संभावित खाद्य आपूर्ति झटकों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इसके अलावा, फसल नुकसान को कम करने के लिए अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ जिला स्तर पर समन्वय किया जा रहा है. एसएंडपी के मुताबिक कई एशियाई देशों ने खाद्य भंडार बढ़ाने, आयात की बेहतर योजना बनाने और बाजार प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने जैसे कदम उठाए हैं. इसके साथ ही जलाशयों के बेहतर प्रबंधन, सिंचाई ढांचे में निवेश से कम बारिश की अवधि में इन देशों की जुझारू क्षमता बढ़ी है.
अगस्त से अक्टूबर के बीच अल नीनो और मजबूत होगा – डब्ल्यूएमओ
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने पिछले महीने कहा था कि मजबूत अल नीनो परिस्थितियां विकसित हो रही हैं और अगस्त से अक्टूबर के बीच इनके और मजबूत होने की संभावना है. इससे दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और मौसम की गंभीर घटनाएं देखने को मिल सकती हैं.
पानी से बिजली उत्पादन घटने की चिंता
एसएंडपी ने कहा कि कृषि पर अधिक निर्भर अर्थव्यवस्थाएं और खाद्य पदार्थों के लिए अधिक आयात या कृषि उत्पादन पर निर्भर उपभोक्ता अल नीनो के गंभीर प्रभाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होंगे. हालांकि, क्षेत्र में कृषि की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही है, जिससे कुछ हद तक जोखिम कम हुआ है. इसके बाद कम जलविद्युत उत्पादन घटने की चिंता ने मुश्किल बढ़ाई है और इसे सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव माना गया है.
रिजर्व बैंक भी अल नीनो को बता चुका है बड़ा जोखिम
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि अल नीनो की परिस्थितियों के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और असमान बारिश कृषि क्षेत्र के परिदृश्य के साथ ही ग्रामीण मांग के लिए जोखिम पैदा कर सकती है. आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है.